चिराग की मुखालफत नहीं कर पाए चाचा पशुपति पारस, अब कहा-लोजपा चीफ के हर फैसले के साथ खड़ा हूं...

चिराग की मुखालफत नहीं कर पाए चाचा पशुपति पारस, अब कहा-लोजपा चीफ के हर फैसले के साथ खड़ा हूं...

PATNA : बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही अब सियासी हलचल तेज हो गई है. सियासी दल अपने उम्मीदवारों के चयन और उन्हें मैदान में भेजने की तैयारी में जुटे हैं लेकिन इस बीच यह खबर आई की परिवार वालों ने ही चिराग को विरोध करना शुरू कर दिया. लोजपा सांसद और चिराग पासवान के चाचा ने एनडीए से अलग होने की बात पर ऐतराज जता दिया था लेकिन अब वो इससे पलट गए हैं. पशुपति पारस अब चिराग के हर फैसले के साथ खड़े रहने के लिए मान गए हैं. 

लोक जनशक्ति पार्टी में विवाद की खबरों के बीच सुलह की कवायद तेज हो गई है. एलजेपी सांसद पशुपति कुमार पारस ने कहा है कि  हम राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के फैसले के साथ हैं. एलजेपी के सिद्धांत के साथ हैं. उन्होंने कहा कि हम 43 साल से विधानसभा के सदस्य हैं. हमने पार्टी को बनाया है और हम पार्टी के हर फैसले के साथ हैं.  

पीएम के चेहरे पर बना हूं सांसद
जबकि इससे पहले खबर आई थी कि शनिवार की देर रात तक सांसद पशुपति पारस ने अन्य सांसदों के साथ टेलीफोन पर बातचीत की थी. पारस ने कहा था कि वे एनडीए के वोट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही सांसद बने हैं. लिहाजा, ऐसा कुछ नहीं करेंगे, जिससे एनडीए में फूट पड़े.लेकिन अब पशुपति पारस को अब मैनेज करने की बात सामने आ रही है.

चिराग किस विकल्प की और बढ़ेंगे आगे
लोजपा की तरफ से बताया गया है कि सीटों को लेकर अभी फाइनल बातचीत नहीं हुई है. ऐसे में चिराग के अपनों का विरोध इस चुनाव के दिशा को बदल सकता है. बताया जाता है कि चिराग खुद को और पार्टी को इस चुनाव में मजबूत हालात में खड़ा करना चाहते थे. इसलिए 143 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात हो रही थी. चिराग के इस तेवर का उपेन्द्र कुशवाहा और पप्पू यादव कब से इंतजार कर रहे हैं कि चिराग कोई फैसला लें तो तीसरा मोर्चा बनाकर चुनावी मैदान में एक साथ उतरा जाए. ऐसे में चिराग के घर में ही चिराग का घर में अगर विरोध हो जाता है तो चिराग के लिए सियासी सतह पर काफी परेशानियों को सामना करना पड़ सकता है.

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