फल्गु नदी के तट पर मनी अनोखी दीवाली : पितरों की याद में दीयों की जगहमगाहट से रोशन हुआ देवघाट

फल्गु नदी के तट पर मनी अनोखी दीवाली : पितरों की याद में दीयों की जगहमगाहट से रोशन हुआ देवघाट

GAYA : पितरों के प्रति आस्था एवं श्रद्धा का महापर्व पितृपक्ष के 14 वें दिन त्रयोदशी तिथि यानी सोमवार को पिंडदानियों ने हर्षोल्लासपूर्वक पितरों की दीपावली मनाई। सूर्य ढलते ही देर शाम फल्गु के देवघाट पर पितरों की याद में पिंडदानियों ने असंख्य घी के दिये जला कर पितरों के प्रति अपनी असीम श्रद्धा रखते हुए उन्हें प्रसन्न किया। वहीं कई लोगों ने फल्गु नदी के जल में हजारों दीपक प्रवाहित किए।

दीपों की रोशनी से फल्गु तट पर एक अलग ही रौनक देखने को मिली।  दीयों की टिमटिमाती रोशनी से पूरा देवघाट का परिसर जगमग हो गया।ऐसा लग रहा था जैसे मानो पूरा देवलोक पृथ्वी पर उतर आया हो। चारों तरफ दीए की रोशनी से पूरा देवघाट जगमग हो गया। कई लोगों ने पटाखे छोड़कर जमकर आतिशबाजी की। इस मनभावन दृश्य को लोग कैमरे में कैद कर रहे थे। पिंडदानियों ने पितरों के निमित्त दीप दान कर स्वर्ग में पितरों के लिए मार्ग आलोकित किया।  

पं.रंजीत पांडेय ने बताया कि पितृ दिवाली के दिन दीपदान करने से पितरों को प्रकाश मिलता है और पितर प्रसन्न होकर श्राद्धकर्ता को आशीर्वाद देते हैं। पितरों की प्रसन्नता से सभी देवता प्रसन्न होते हैं। अंधकार का कोई वजूद नहीं होता है। इधर पितृ दीपावली से फल्गु तट की छटा अलौकिक प्रतीत हो रही थी। श्रद्धालुओं ने नदी की धारा में दीए जलाकर प्रवाहित किया। गर्भ गृह में स्थित विष्णु चरण का फूलों से आकर्षक ढंग से श्रृंगार कर भव्य मंगल आरती की गई। तिथि के अनुसार पिंडदानियों ने फल्गु में  तिल मिश्रित दूध से तर्पण कर पितरों का ध्यान लगाकर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित की। राजस्थान के नवलगढ़ से गया श्राद्ध करने आए विनोद कुमार संथोलिया  एवं शंभू सुंथोलिया ने बताया कि पितरों की दिवाली मनाकर हृदय को सुकून मिला।

मनोज कुमार सिंह  की रिपोर्ट

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