बिहार के 13 जिलों में तेजी से बन रहे हैं अल्पसंख्यक स्कूल, जानिए आपके जिले में कब होगी शुरुआत!
बिहार सरकार मुस्लिम छात्र-छात्राओं के लिए बड़े पैमाने पर विकास योजनाएं लागू कर रही है, ताकि उनके शिक्षा स्तर में गुणात्मक सुधार हो सके। सरकार ने 13 जिलों में अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों के लिए जमीन चिन्हित कर ली है और निर्माण प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। लखीसराय, कटिहार, बेगूसराय, पश्चिम चंपारण, पटना, मधेपुरा, सहरसा, अररिया, मुजफ्फरपुर, सुपौल, मुंगेर और वैशाली जैसे जिलों में यह काम तेजी से हो रहा है।
हर जिले में लगभग 55 करोड़ रुपये की लागत से कम से कम एक अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय के निर्माण का निर्णय 2018-19 में लिया गया था। इस योजना के तहत दरभंगा के केवटी प्रखंड और किशनगंज में पहले ही काम पूरा हो चुका है। 2020-21 में पूर्णिया और मधुबनी में एक-एक अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय के निर्माण के लिए 159.71 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई थी। 2024-25 में नालंदा, जमुई, और कैमूर में विद्यालय निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है।
सरकार ने हाल ही में 13 अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों के संचालन के लिए 481 शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों को स्वीकृति दी है। इससे छात्रों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। राज्य कोचिंग योजना के तहत, 2023-24 में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार पुलिस अवर निरीक्षक, कैट और मैट जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी के लिए छात्रों को मुफ्त कोचिंग की सुविधा दी जा रही है। अब तक 15216 छात्रों को इस योजना से लाभ हुआ है, जिनमें से 5095 छात्र सफल होकर सरकारी और प्रतिष्ठित नौकरियों में चयनित हुए हैं।
बिहार में वर्तमान में 50 अल्पसंख्यक कल्याण छात्रावास चालू हैं, जिनमें 5158 छात्र-छात्राएं रह रहे हैं। इसके अलावा, कई जिलों में नए छात्रावास निर्माणाधीन हैं, और सरकार छात्रों को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। बिहार सरकार का उद्देश्य है कि अल्पसंख्यक छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी तरह की कमी न हो। इसके लिए न केवल आवासीय विद्यालय बनाए जा रहे हैं, बल्कि कोचिंग योजनाएं और छात्रावास जैसी सुविधाओं को भी बढ़ाया जा रहा है।