राधामोहन सिंह का हैट्रिक लगाना अब नहीं होगा आसान, अखिलेश सिंह के बेटे आकाश के रण में उतरने से बदली सियासत

राधामोहन सिंह का हैट्रिक लगाना अब नहीं होगा आसान, अखिलेश सिंह के बेटे आकाश के रण में उतरने से बदली सियासत

न्यूज4नेशन डेस्क- केंद्रीय कृषि मंत्री एक बार फिर से मोतिहारी सीट जिसे पूर्वी चंपारण लोकसभा के नाम से जानते हैं वहां से चुनावी मैदान में है। अब उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस के राज्य सभा सांसद डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह से होगा। क्योंकि RLSP ने मोतिहारी सीट से उनके बेटे आकाश प्रसाद सिंह को मैदान में उतारा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश प्रसाद सिंह के लिए वह क्षेत्र नया नहीं है बल्कि वे 2004 में पहली बार मोतिहारी सीट से लोकसभा का चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी और केंद्र में मंत्री बने थे।

2009 में अखिलेश सिंह को हार का करना पड़ा था सामना

राधामोहन सिंह इस बार जीत की हैट्रिक लगाने उतरे हैं।क्योंकी 2009 में उन्होंने राजद प्रत्याशी अखिलेश सिंह को हरा दिया था।फिर 2014 के मोदी लहर पर सवार होकर वो लगातार दूसरी बार जीते थे।

अबतक बड़े निश्चिन्त मुद्रा में थे राधामोहन

हालांकि इस बार महागठबंधन में लोकसभा सीट को लेकर जारी जिच से राधामोहन सिंह निश्चिन्त थे।उनके विरोधी टिकट के लिए मारामारी कर रहे थे तो वे निश्चिन्त भाव से चुनाव प्रचार कर रहे थे।कुछ दिन पहले तक चर्चा थी कि उपेंद्र कुशवाहा इस सीट से माधव आनंद को प्रत्याशी बनाएंगे। माधव आनंद ने तो मोतिहारी में चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था। जानकर बताते हैं कि राजनीतिक तिकड़म में माहिर राधामोहन सिंह रालोसपा सुप्रीमो कुशवाहा के इस निर्णय से गदगद थे।

राधामोहन सिंह इस कोशिश में जुटे थे कि कांग्रेस नेता और राज्य सभा सांसद अखिलेश सिंह से सीधी टक्कर नहीं हो। क्योंकि अखिलेश सिंह की मोतिहारी से काफी लगाव रहा है। भले ही वे 2009 में चुनाव हार गए हो लेकिन उनका मोतिहारी से संपर्क लगातार बना हुआ था। जानकर बताते हैं कि अखिलेश सिंह कि सभी जाति और धर्म में अच्छी पकड़ बतायी जाती है। राधामोहन सिंह इस आशंका से सहमे थे कि अगर अखिलेश सिंह से सीधी टक्कर होगी तो बीजेपी की परंपरागत वोटर उनके पाले में जा सकते हैं। जिसका सीधा नुकसान उन्हें उठाना पड़ सकता है।

2004 में राजद के टिकट पर चुनाव जीते थे अखिलेश

2004 में राजद कैंडिडेट होने के बाद भी ऊंची जातियों के लोगों ने अखिलेश प्रसाद सिंह के पक्ष में मतदान किया था।सिर्फ सवर्ण समाज ही नहीं बल्कि अन्य जाति के वोटरों ने उनके पक्ष में मतदान किया था। जिसका नतीजा हुआ कि बाहरी होने के बाद भी अखिलेश प्रसाद सिंह ने वहां के स्थानीय और कई बार के सांसद बीजेपी उम्मीदवार राधामोहन सिंह को हरा दिया था।

क्षेत्र से लगाव का मिलेगा फायदा

पुर्वी चंपारण के रण में इस बार भले ही अखिलेश प्रसाद की जगह उनके बेटे आकाश प्रसाद सिंह  हो लेकिन वहाँ के लोग अखिलेश सिंह को ही मैदान में उतरा मान रहे हैं।2009 में चुनाव हारने के बाद भी क्षेत्र के लोगों से जुड़े रहने का फायदा मिलेगा।साथ ही इस बार RLSP के टिकट से उम्मीदवार का भी फायदा होगा।क्यो की  उस संसदीय क्षेत्र में उनके समाज वोटरों के साथ-साथ  कुशवाहा ,सहनी वोटर भी काफी संख्या में हैं।साथ ही राजद के परंपरागत वोट का लाभ भी मिलेगा। कुल मिलाकर अब मोतिहारी का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है।

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