Bihar Road: ड़ेढ़ घंटे का सफर महज 10 मिनट में, सिपारा- महुली एलिवेटेड रोड से बदली बिहार की तक़दीर, पटना से चार जिलों की दूरी हुई कम

Bihar Road: बिहार में विकास की राजनीति अब काग़ज़ों से निकलकर ज़मीन पर दौड़ने लगी है। सड़कों के ज़रिये जिलों को जोड़ने की मुहिम में सिपारा-महुली एलिवेटेड रोड एक ऐसा खास प्रोजेक्ट बनकर उभरा है, जिसने न सिर्फ़ दूरी घटाई है...

 Sipara Mahuli Elevated Road
ड़ेढ़ घंटे का सफर महज 10 मिनट में- फोटो : reporter

Bihar Road:  बिहार में विकास की राजनीति अब काग़ज़ों से निकलकर ज़मीन पर दौड़ने लगी है। सड़कों के ज़रिये जिलों को जोड़ने की मुहिम में सिपारा-महुली एलिवेटेड रोड एक ऐसा खास प्रोजेक्ट बनकर उभरा है, जिसने न सिर्फ़ दूरी घटाई है, बल्कि वक़्त की क़ीमत भी बढ़ा दी है। इसके आगे महुली से पुनपुन तक सड़क लगभग बनकर तैयार है, सिर्फ़ करीब 2.20 किलोमीटर का हिस्सा शेष है। फोरलेन रोड के बनने से इन इलाकों के बीच सफ़र अब थकान नहीं, राहत बन गया है।

इस परियोजना के पूरा होते ही सियासी और सामाजिक दोनों मोर्चों पर बड़ा संदेश गया है। सिपारा–महुली एलिवेटेड रोड से चार ज़िलों अरवल, जहानाबाद, गयाजी और नालंदा (बिहारशरीफ) की कनेक्टिविटी सीधे तौर पर मज़बूत हुई है। जो दूरी पहले डेढ़ घंटे की मशक्कत मांगती थी, वही अब महज़ 10 मिनट में सिमट गई है। पटना से डुमरी तक का सफ़र इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। घंटों का इंतज़ार अब इतिहास बनता जा रहा है।

करीब 1013.14 करोड़ रुपये की लागत से बने इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत लगभग 11 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण किया गया है। इसका सीधा फायदा दक्षिण पटना के लाखों लोगों को मिला है, जो अब ट्रैफिक जाम से निजात पाकर बेफिक्र सफ़र कर पा रहे हैं। यह सिर्फ़ सड़क नहीं, बल्कि दक्षिण पटना के लिए लाइफ़लाइन बन चुकी है।

इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया गया। पहले चरण में सिपारा परसा से महुली तक 6.7 किलोमीटर लंबी सड़क बनी, जिसमें 5.4 किलोमीटर एलिवेटेड हिस्सा शामिल है। दूसरे चरण में मीठापुर से सिपारा और महुली से पुनपुन तक 4.3 किलोमीटर सड़क का काम लगभग पूरा हो चुका है। बढ़ते ट्रैफिक दबाव के बीच यह प्रोजेक्ट पटना के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, सिपारा महुली एलिवेटेड रोड ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में विकास अब रुकने वाला नहीं। सड़कें जब मज़बूत होती हैं, तो सिर्फ़ ज़मीन नहीं जुड़ती आर्थिक रफ़्तार, सामाजिक सुविधा और सियासी भरोसा भी एक साथ आगे बढ़ता है।