एमए पास शिक्षामित्र शबनम ने आखिर क्यों 10 माह के भतीजे सहित सात लोगों को मार डाला? बिहार से मंगाई जा रही है फांसी की रस्सी

एमए पास शिक्षामित्र शबनम ने आखिर क्यों 10 माह के भतीजे सहित सात लोगों को मार डाला? बिहार से मंगाई जा रही है फांसी की रस्सी

DESK : आजाद हिंदुस्तान की सरजमीं पर फांसी के मामले में इतिहास की नई तारीख लिखने की तैयारी की जा चुकी है। आजादी के बाद पहली बार किसी महिला को जेल के सलाखों के पीछे फंदे से टांग दिया जाएगा । यानी 1947  के बाद देश का यह पहला वाकया होगा ।बिहार के बक्सर जेल में रस्सी बनाई जा रही है ।निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने वाले जल्लाद भी मथुरा जेल का दौरा कर चुके हैं।

फांसी की सजा जिस महिला को मिलेगी उसका नाम है शबनम। उससे नफरत ऐसी कि गांव की छोड़ दें उस इलाके में भी कोई अपनी बेटी का नाम शबनम नहीं रखना चाहता ।उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में आज से 13 साल पहले शबनम और उसके प्रेमी सलीम ने एक ऐसी हत्याकांड को अंजाम दिया था जिसकी चीख आज भी उस इलाके को रह-रहकर सुनाई देती है। उसके परिवार के लोगों ने फांसी के बाद शव लेने से इनकार कर दिया है। 

शबनम और प्रेमी सलीम की कहानी

बता दें की शबनम उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव के शिक्षक शौकत अली की इकलौती बेटी है। शबनम एक पढ़ी-लिखी महिला है ।उसने प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद एमए किया और शिक्षामित्र हो गई ।गांव के ही आठवीं पास सलीम से उसको इश्क हो गया। लेकिन परिवार वालों को एमए पास शबनम का आठवीं पास सलीम के साथ प्यार मंजूर नहीं था। यही वजह थी कि परिवार वालों ने शबनम को सलीम से शादी करने से मना कर दिया। लेकिन शबनम के सिर पर तो इश्क का भूत सवार था। वह हर कीमत पर सलीम का साथ चाहती थी। इसके लिए रास्ता कोई भी अख्तियार करना क्यों न पड़े। सलीम से शादी के लिए मना कर देने पर शबनम ने अपने दिमाग में एक घातक प्लान तैयार किया जिसका अंजाम इतना बुरा था कि आज उसे फांसी के फंदे से लटकना पड़ रहा है ।सलीम से शादी की मंजूरी नहीं मिलने से खफा शबनम ने 14 अप्रैल 2008 को पूरे परिवार को खाने में नींद की गोली खिला दी। फिर अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर सो रहे पिता, मां हाशमी ,भाई अनीश, राशिद, भाभी अंजुम, फुफेरी बहन राबिया  और 10 माह के भतीजे अर्श का गला काटकर मौत की नींद सुला दिया

एक बेटे की माँ है शबनम

गौरतलब है की हत्यारिन शबनम एक बेटे की मां भी है। बता दें कि शबनम ने जब अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर मां पिता के साथ-साथ घरवालों घर वाले लोगों को मौत की नींद सुलाया था उस दौरान उसके पेट में 2 माह का गर्भ था। 7 साल तक जेल में मां के रहने के साथ बेटा ताज मोहम्मद 12 साल का हो गया है ।उसकी देखभाल एक और परिवार कर रहा है ।शबनम को लेकर उसके गांव बावन खेड़ी नफरत का आलम क्या है की हत्याकांड के बाद कोई परिवार अपनी बच्ची का नाम शबनम नहीं रखता है।

बिहार से मंगाई जा रही है फांसी की रस्सी

बावनखेड़ी हत्याकांड को लेकर अप्रैल 2008 के बाद से ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक फांसी की सजा पर मुहर लगा चुके हैं। शबनम ने राष्ट्रपति से दया की गुहार लगाई थी जिसे उन्होंने 15 फरवरी को ठुकरा दिया ।यही वजह है कि आजादी के बाद शबनम पहली ऐसी महिला होगी जिसे फांसी के फंदे से लटकाया जाएगा। निर्भया को निर्भया केस के आरोपियों को फांसी पर लटका चुके जल्लाद पवन ने मथुरा जेल का दौरा भी कर लिया है। फांसी की दो रस्सियां बिहार के बक्सर जेल से मंगाई गई है ।अदालत से तारीख तय होने के बाद मथुरा जेल के फांसी घर में ट्रायल किया जाएगा।



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