नेहरू ने की घोषणा, अटल ने शिलान्यास, मोदी ने किया उद्घाटन, जानिये मुंगेर पुल निर्माण के संघर्ष की कहानी

नेहरू ने की घोषणा, अटल ने शिलान्यास, मोदी ने किया उद्घाटन, जानिये मुंगेर पुल निर्माण के संघर्ष की कहानी

मुंगेर : गंगा पर बने रेल सह सड़क पुल का जिलेवासियों ने जो ख्वाब देखा था, वह आज पूरा हो गया. लेकिन इस ख्वाब को पूरा करने के पीछे एक लंबे संघर्ष की कहानी है. जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी दिल्ली तक इसके लिए संघर्ष हुआ था. मुंगेर की धरती पर 14 दिनों तक आमरण अनशन, मुंगेर-बेगूसराय-खगड़िया जिला का एकीकृत आंदोलन का परिणाम है यह पुल. इसे लेकर मुंगेर के साथ ही खगड़िया एवं बेगूसराय की जनता में हर्ष और उत्साह का माहौल है. 

आजादी के पूर्व से ही हो रही थी मुंगेर में गंगा पुल की मांग

आजादी के पूर्व से ही मुंगेर में गंगा नदी पर पुल की मांग उठनी शुरू हो गयी थी. यहां तक कि जब पहली बार पंडित जवाहर लाल नेहरू जब मुंगेर आये थे तो उनकी सभा लाल दरवाजा स्थित गंगा तट पर हुई थी. उन्होंने मुंगेर में गंगा पुल की घोषणा की थी. किंतु राजनीति कारणों के कारण मुंगेर का पुल सिमरिया घाट चला गया. उस समय सिमारिया मुंगेर जिला का ही अंग था. बाद के वर्षों में पुल पर ऐसी राजनीति हुई कि भारत सरकार के एक एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कह दिया कि मुंगेर की मिट्टी पुल बनने के लायक नहीं है. किंतु मुंगेर वासियों की दृढ़ इच्छाशक्ति व आंदोलन के कारण पुल की मांग जोर पकड़ती गयी. जागृति नामक संस्था के नेतृत्व में पुल का आंदोलन चलता रहा. बाद में मुंगेर के तत्कालीन सांसद ब्रह्मानंद मंडल ने पुल की मांग को लेकर जब अनशन प्रारंभ किया तो पहली बार भारत सरकार के तत्कालीन योजना आयोग के उपाध्यक्ष प्रणव मुखर्जी ने मुंगेर में पुल बनाने पर सहमति दी थी. नीतीश कुमार के रेलमंत्रित्व काल में इस पुल की स्वीकृति हुई और फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस पुल का शिलान्यास किया था. 

लंबे संघर्षों का प्रतिफल है रेल सह सड़क पुल

मुंगेर में गंगा नदी पर पुल बनने की मांग काफी पुरानी रही है. 70 के दशक में पुल की मांग ने तब जोर पकड़ा जब राजनीतिज्ञों ने अपना रंग चढ़ाना शुरू किया. 1971 में आंदोलनों की रफ्तार तेज हो गयी. लेकिन 1976 में रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक संस्था ने तो अपने सर्वे रिपोर्ट में इस बात का खुलासा कर दिया कि मुंगेर एक भूकंप प्रभावित क्षेत्र है और यहां पुल का निर्माण जोखिम भरा व खर्चीला उपक्रम है. लेकिन मुंगेर, बेगूसराय व खगड़िया के लोगों ने बेगूसराय के शालिग्रामी उच्च विद्यालय में बैठक कर आंदोलन को अनवरत चलाने का निर्णय लिया. नयी क्रांति का नया बिगुल, लक्ष्य हमारा गंगा पुल... के नारे के साथ वर्ष 1988 में आंदोलन को नया रूप मिला.

जागृति नामक सामाजिक संस्था ने पुल निर्माण के आंदोलन को तेज कर दिया. जिसके बाद अनवरत बाजार बंद, सड़क जाम सहित अन्य तरह के आंदोलन होने शुरू हो गये. यहां तक कि मुंगेर, बेगूसराय व खगड़िया में लोगों ने काला बिल्ला लगाकर, स्कूली बच्चों के प्रदर्शन के साथ युवाओं द्वारा रन फोर गंगा ब्रिज का आयोजन किया गया था. 1989 में जागृति की ओर से 9 व 10 अगस्त को दो दिवसीय जनता कर्फ्यू लगाया गया. उसी वर्ष सरकार पर दबाव बनाने के लिए सितंबर महीने में दो दिनों तक आइटीसी के सिगरेट भरे वाहनों को रोक दिया गया था. 

तत्कालीन सांसद ब्रह्मानंद मंडल ने किया था अनशन

तत्कालीन सांसद ब्रह्मानंद मंडल ने पहली बार 1991 में लोकसभा में मुंगेर में गंगा पर रेल सह सड़क पुल का मुद्दा उठाया था. रेल एवं भूतल परिवहन मंत्रालय से लगातार पुल की मांग को लेकर पत्राचार किया. परंतु तत्कालीन सरकार ने जब मुंगेर में गंगा पर पुल की मांग को अस्वीकार कर दिया. तब सांसद ने 13 सहयोगियों के साथ अक्तूबर 1994 में आमरण अनशन करते हुए सत्याग्रही आंदोलन मुंगेर में शुरू किया.  

10वीं पंचवर्षीय योजना में शामिल किया गया था मुंगेर पुल

आमरण अनशन के 14 वें दिन जार्ज फर्नांडिस ने तत्कालीन योजना आयोग के उपाध्यक्ष प्रणव मुखर्जी को पत्र लिख कर मामले में हस्तक्षेप करने और मांग को मान लेने का आग्रह किया. तत्पश्चात प्रणव मुखर्जी ने सांसद ब्रह्मानंद मंडल को पत्र लिख कर आमरण अनशन समाप्त करने का आग्रह करते हुए मुंगेर में रेल सह सड़क पुल निर्माण का लिखित आश्वासन दिया. इसके बाद केंद्र सरकार ने 10वीं पंचवर्षीय योजना में पुल निर्माण की परियोजना को शामिल किया और 15 अगस्त 2002 को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लाल किला के प्राचीर से मुंगेर में पुल निर्माण की घोषणा की और 25 दिसंबर 2002 को दिल्ली से ही रिमोट द्वारा इस पुल का शिलान्यास किया था. 

वर्ष 2002 में हुआ था गंगा पुल का शिलान्यास

गंगा रेल सह सड़क पुल का शिलान्यास 26 दिसंबर 2002 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली से ही रिमोट दबा कर किया था. वह दिन मुंगेर के लिए ऐतिहासिक दिन था. तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार शिलान्यास के मौके पर मुंगेर में मौजूद थे. शिलान्यास स्थल लाल दरवाजा में जब शिलापट्ट से पर्दा हटा तो लोग झूम उठे थे और उस दिन मुंगेर में दीपावली मनायी गयी थी. आज फिर मुंगेर वासियों ने शुक्रवार की शाम दीपावली मनाने का निर्णय लिया है. मुंगेर के विधायक प्रणव कुमार ने बताया कि शुक्रवार का दिन मुंगेर के लिए ऐतिहासिक होगा. जहां शहर के सभी चौक चौराहों व महापुरुषों के स्थल पर दीपोत्सव मनाया जायेगा. वहीं सभी लोग अपने घरों में भी दीप जला कर दीपावली मनायेंगे.


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