MY समीकरण के साथ न्यू जेनरेशन पड़ा अनुभवी नीतीश पर भारी, एग्जिट पोल में आई तेजस्वी की बारी

MY समीकरण के साथ न्यू जेनरेशन पड़ा अनुभवी नीतीश पर भारी, एग्जिट पोल में आई तेजस्वी की बारी

PATNA: बिहार चुनाव के नतीजे एक के बाद एक धड़ाधड़ आने लगे..टीवी स्क्रीन की ब्रेकिंग न्यूज पर ब्रेकिंग प्लेट टूटने की हर आवाज से तेजस्वी सत्ता के नजदीक नजर आने लगे। सोशल मीडिया की साईट हर साईट पर तेजस्वी को बढ़त दिखाई देने लगी। पक्ष विपक्ष के साथ बिहार में खबर आग की तरह फैल गई, इस बार तेजस्वी तय है। लेकिन असली नतीजों को लिए 10 नबंवर तक इंतजार करना होगा। 

यह सिर्फ पूर्वानुमान है। लेकिन पूर्वानुमान की माने तो मुकाबला और सत्ता के संग्राम के हर खेल में लड़ाई कांटे की नजर आने लगी थी। अहम सवाल यह है कि अनुभवी नीतीश और सुशासन के दंभ के आगे युवा तेजस्वी की सरकार आखिर बनेगी केसै। यह सवाल खाशकर उनलोगों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण जो नीतीश की विदाई पर सवाल उठा रहे थे। आखिर वह कौन सी वजह थी जिसके कारण सत्ता एकबार फिर लालू के हाथ में जाती दिखाई दे रही है। समीकरण की बात करें तो माई समीकरण के साथ युवाओं का उत्साह यानि की यूथ जेनरेशन का युवा तेजस्वी नौकरी के लिए लालच भरी निगाहों से देखने लगे। 

हार और जीत के बीच बेरोजगार युवा की टोली इस समीकरण को मजबूत बनाता चला गया। बिहार चुनाव के तीनों चरण के चुनाव प्रचार में ये भीड़ तेजस्वी के पक्ष में माहौल बनाता चला गया।  बिहार में लड़ाई 15 साल के शासन बनाम युवा जोश के बीच थी। सीएम नीतीश कुमार और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव इसके प्रमुख चेहरे थे। तीन चरण के मतदान के बाद धड़ाधड़ आए कई सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल में युवा जोश अनुभवी नीतीश पर भारी पड़ता दिखा। किसी एग्जिट पोल में तेजस्वी को बंपर सीटें मिल रही हैं, तो कहीं मुकाबला कांटे का है. लेकिन सभी के दिमाग एक ही सवाल घूम रहा है कि आखिरी तेजस्वी ने ऐसा कौन सा समीकरण साध लिया कि विरोधी साफ होते दिख रहे हैं. बिहार की ऐसी कौन सी नब्ज थी, जिसे तेजस्वी ने पकड़ लिया। 

एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक सिर्फ MY समीकरण के सहारे तेजस्वी इस चुनावी बाजी को जीतने में सफल नहीं होते दिख रहे हैं। बल्कि उनके साथ इस बार एक और Y जुड़ा है, जिसका मतलब यूथ है. यानी मुस्लिम, यादव और यूथ के दम पर तेजस्वी एनडीए के हर एक चक्रव्यूह को भेदते नजर आ रहे हैं. अभी तक यह माना जाता रहा है कि यादव और मुस्लिम ही आरजेडी के कोर वोटर हैं और इनके ही दम पर आरजेडी ने 15 साल तक बिहार पर राज किया। तेजस्वी के नौकरी के वादों ने युवाओं को आकर्षित किया है. एग्जिट पोल के अनुसार तेजस्वी का यह दांव सफल होता दिख रहा है और युवा वोटरों का साथ उन्हें मिला है।

चुनावी मंचों से तेजस्वी ने लगातार कमाई, दवाई और महंगाई के मुद्दे को उठाया था। आजतक-एक्सिस माई इंडिया के सर्वे के अनुसार बिहार में इस बार 47 प्रतिशत बेरोजगारों ने तेजस्वी यादव के पक्ष में वोट किया है। वहीं, इस मामले में 35 फीसदी युवा नीतीश के साथ गए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी लगातार 10 लाख नौकरी देने की बात कर रहे थे. वहीं, नीतीश कुमार इसे बोगस बताने में जुटे रहे. बिहार के 43 फीसदी ग्रेजुएट लोगों ने महागठबंधन को वोट दिया है जबकि एनडीए गठबंधन को 38 फीसदी लोगों ने वोट दिया है।

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