नीतीश कैबिनेट का विस्तार कब? बोझ तले दबे हैं मंत्री, सत्ताधारी विधायक कह रहे काम क्या होगा MLA का पत्र भी नहीं देख रहे मंत्री

नीतीश कैबिनेट का विस्तार कब? बोझ तले दबे हैं मंत्री, सत्ताधारी विधायक कह रहे काम क्या होगा MLA का पत्र भी नहीं देख रहे मंत्री

PATNA : बिहार में 16 नवबंर को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। मुख्यमंत्री के अलावे 14 अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली थी। इनमें से भाजपा कोटे से 7,जेडीयू कोटे से 5 ,हम से 1और वीआईपी से एक मंत्री बनाये गए थे।विभाग बंटवारे में एक-एक मंत्री को 5-6 विभागों का जिम्मा थमा दिया गया. ऐसे में नीतीश कैबिनेट के मंत्री विभागों की बोझ तले दबे हुए हैं.नई सरकार के गठन के 25 दिन हो गए लेकिन अब तक कैबिनेट का विस्तार नहीं हो सका है।मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं होने से पूरा काम अटका पड़ा है। 17 नवंबर के बाद नीतीश कैबिनेट की बैठक भी नहीं हुई है। इन सब के बीच नए विधायकों का कोई काम नहीं हो पा रहा। नई सरकार के गठन के बाद जहां जनता की अपेक्षा हाई रहती है वहीं विधायक भी पूरे जोश में रहते हैं। लेकिन नई सरकार जिसे काम करना है वह बोझ तले दबी हुई है। बिहार के मंत्रियों की स्थिति ये हो गई है कि वे आम आदमी की बात छोड़िए विधायकों के पत्र तक को देख नहीं पा रहे। कई सत्ताधारी विधायकों ने नाम शेयर नहीं करने पर कहा कि लग ही नहीं रहा कि बिहार में नई सरकार बनी है।

सत्ताधारी विधायक परेशान

 राजद विधायकों की बात छोड़िए,सत्ताधारी बीजेपी-जेडीयू के विधायक जिनसे जनता की अधिक अपेक्षा है वे ज्यादा परेशान हैं.वैसे भी चुनाव बाद नई सरकार बनने पर जनता की अपेक्षा ज्यादा होती है। वैसे विधायक जो पहली दफे चुन कर आते हैं उन पर काम का दबाव भी अधिक होता है लेकिन वे मजबूर हैं. वे क्षेत्र में विकास योजनाओं को लेकर विभागीय मंत्री को पत्र लिख रहे, लेकिन मंत्री जी बोझ तले इतने दबे हैं कि वे माननीयों के पत्र का जवाब देने या फिर क्रियान्वयन कराने की स्थिति में नहीं। सत्ताधारी पार्टी के एक बड़े नेता जो विधायक हैं और पहले मंत्री भी रह चुके हैं उन्होंने कहा कि हमने अपने क्षेत्र की एक समस्या को लेकर विभागीय मंत्री को पत्र लिखा। लेकिन वह पत्र उसी तरह से पड़ा है. मंत्री जी को पत्र देखने की भी फुर्सत नहीं। ऐसे में समझा जा सकता है कि नई सरकार में क्या काम हो रहा है.  

मंत्रियों को समझ में नहीं आ रहा कौन विभाग रहेगा कौन जाएगा

नीतीश कैबिनेट के मंत्री भी परेशान हैं. उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि किस विभाग पर अधिक ध्यान दें। कौन सा विभाग उनके पास रहेगा और कौन ले लिया जाएगा, यह पता ही नहीं। लिहाजा मंत्री जी भी बेमन से ही काम कर रहे। मंत्रियों की चिंता यह है कि अगर एक विभाग पर पूरा फोकस करेंगे और मंत्रिमंडल विस्तार में अगर वही विभाग ले लिया जाएगा तो फिर सारा मेहनत बेकार.लिहाजा विभागों के बोझ तले दबे मंत्री भी वेट एंड वाच की स्थिति में हैं.

नई एनडीए सरकार में बनाए जा सकते 36 मंत्री

बिहार विधानसभा के सदस्यों की संख्या 243 है। कुल कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत विधायक मंत्री बन सकते हैं। इस लिहाज से बिहार कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित 36 सदस्य शामिल हो सकते हैं। नीतीश के साथ शपथ लेने वाले शिक्षा मंत्री डा. मेवालाल चौधरी इस्तीफा दे चुके हैं। लिहाजा, राज्य कैबिनेट में 20 से अधिक नए सदस्यों के शामिल होने की गुंजाइश है।

मंत्रिमंडल विस्तार पर किसी के पास कोई जानकारी नहीं

कैबिनेट का विस्तार पर दोनों दल के नेता चुप हैं. कैबिनेट का विस्तार कब होगा अबतक किसी की आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।मुख्यमंत्री या अन्य घटक दलों के नेताओं की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार के बारे में कुछ नहीं कहा जा रहा है। इसके चलते विधायकों की सांसे अटकी हुई हैं।बताया जाता है कि इस बार मंत्रियों को लेकर भाजपा-जेडीयू में पेंच फंसा हुआ है। इसी वजह से मंत्रिमंडल विस्तार में देरी हो रही है।



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