CAG रिपोर्ट से नीतीश सरकार की पिट गई भद्द ! इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षक-कर्मियों का घोर अभाव, 19 संस्थानों में 61% सीटें रह गई खाली

CAG रिपोर्ट से नीतीश सरकार की पिट गई भद्द ! इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षक-कर्मियों का घोर अभाव, 19 संस्थानों में 61% सीटें रह गई खाली

PATNA: कैग रिपोर्ट से नीतीश सरकार की पूरी पोल ही खुल गई है। महालेखाकार की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि तकनीकी शिक्षा के विकास को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। सरकार सभी जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज खोल रही है, लेकिन संसाधन उपलब्ध नहीं करा रही। इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षकों व कर्मियों की घोर कमी है. इस वजह से पचास प्रतिशत से अधिक सीटें खाली रह जा रहीं. यानी सरकार सिर्फ बिल्डिंग बनाने पर फोकस रही, शिक्षकों की बहाली को लेकर प्रयत्नशील नहीं है। 

तकनीकी शिक्षा से मजाक, 61 फीसदी सीटें खाली 

कैग रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि सूबे के 19 इंजीनियरिंग कॉलेजों को दूसरे संस्थानों से जोड़कर शुरू कराया गया है। वहां की स्थिति बेहद ही खराब है। इन19 इंजीनियरिंग कॉलेज जो 2019-20 से क्रियाशील किए गए थे, उनमें 4560 सीटों में 2784 सीटें रिक्त रह गईं. यानी 61% सीट पर नामांकन ही नहीं हुआ. जिन 19 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 61% सीटें खाली रह गई उनमें अररिया, अरवल, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, गोपालगंज, जहानाबाद, कैमूर, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मधुबनी, मुंगेर, नवादा, समस्तीपुर, शेखपुरा, शिवहर ,सिवान तथा पश्चिम चंपारण शामिल हैं. लेखा परीक्षा में पाया गया कि सीटों के खाली रहने के पीछे आवश्यक मानव बल (शिक्षण तथा गैर शिक्षण कर्मचारियों) एवं आधारभूत संरचना के बिना संस्थान की स्थापना किया जाना रहा .

इंजीनियरिंग-पॉलटेक्निक संस्थानों में संसाधन का घोर अभाव

महालेखाकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि वही 2016-17 के फेज-6 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 2016-17 से 2019-0 की अवधि के दौरान 13680 सीटों में 3500 ( 26%) सीट को भरा नहीं जा सका. जबकि पॉलिटेक्निक संस्थान की 8640 सीटों में 642 (7%) सीटें खाली रह गई। अवसर बढ़े आगे पढ़ें के तहत स्थापित संस्थानों के संबंध में 31 इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षक कर्मचारियों में 90% की कमी और गैर शिक्षण कर्मचारियों में 98% की कमी थी. जबकि 15 पॉलिटेक्निक संस्थानों में शिक्षण कर्मचारियों में 80% और गैर शिक्षण कर्मचारियों में 96% की कमी थी. कैग ने यह रिपोर्ट फरवरी 2022 की जांच के आधार पर तैयार किया है।  



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