मैट्रिक के अब नहीं होगी ड्रॉप आउट की समस्या, बिहार बोर्ड ने इंटर में एडमिशन के लिए बढ़ाई 5.89 लाख सीटें

मैट्रिक के अब नहीं होगी ड्रॉप आउट की समस्या, बिहार बोर्ड ने इंटर में एडमिशन के लिए बढ़ाई 5.89 लाख सीटें

PATNA : बिहार में अब मैट्रिक के बाद एडमिशन नहीं होने के कारण छात्रों को पढ़ाई बीच में छोड़ने की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। बिहार बोर्ड ने इसको लेकर एक बड़ा फैसला लेते हुए इस साल से इंटर में 5.89 लाख सीटें बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए बिहार बोर्ड की तरफ से राज्य  2948 उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 11वीं के लिए स्कूल कोड जारी करेगा। बड़ी बात यह है कि स्कूलों द्वारा आवेदन करने के बाद उनके मूलभूत संरचना के आधार पर विज्ञान, कला, वाणिज्य संकाय के लिए एक से तीन सेक्शन तक नामांकन की अनुमति बोर्ड दे रहा है। 

अब इंटर में 22 लाख सीटें 

बिहार में इंटर में एडमिशन के लिए 17 लाख सीटें निर्धारित थी। लेकिन अब नए फैसले के बाद इस बार 11वीं में नामांकन के लिए यह संख्या बढ़कर 22 लाख 91 हजार से अधिक हो जायेगी। इससे पहले 2020 में भी बोर्ड ने एडमिशन के लिए दो लाख सीटें बढ़ाई गयी थीं। जबकि 2021 में 17 लाख दो हजार सीटों पर ही नामांकन लिया गया था। अब पांच लाख से अधिक सीटें इंटर नामांकन में बढ़ेंगी। 

512 स्कूल और कॉलेज में नामांकन का मिलेगा मौका 

2021 में 3564 स्कूल और कॉलेजों में नामांकन लिया गया था। 2020 में हर पंचायत में स्कूल योजना के तहत 2948 नए स्कूलों में नौंवीं और दसवीं की पढ़ाई शुरू की गई थी। अब इन स्कूलों को इस वर्ष 11वीं और 12वीं की पढ़ाई की मान्यता दी जा रही है। वहीं मान्यता मिलने के बाद इस बार इस बार 6512 स्कूल और कॉलेजों में इंटर में नामांकन होगा।  11वीं नामांकन के लिए छात्र ऑनलाइन फैसिलिटेशन सिस्टम फॉर स्टूडेंट्स (ओएफएसएस) पर स्कूलों का विकल्प चुन सकेंगे। 


हर स्कूल में होंगी 200 सीटें

बिहार बोर्ड द्वारा लगभग हर दिन उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालयों को स्कूल कोड के साथ सीटें आवंटित की जा रही है। अब तक ज्यादातर स्कूलों को विज्ञान, कला संकाय में 80-80 और वाणिज्य संकाय में 40 सीटें आवंटित हुई हैं। पटना जिले के 166 नए उत्क्रमित विद्यालयों में 11वीं की पढ़ाई इस बार शुरू होगी। सभी स्कूलों में कोएड शिक्षा की मान्यता दी गई है। जिसके कारण इन स्कूलों में छात्र छात्राएं एक साथ एडमिशन करा सकेंगे। 

 मैट्रिक बाद ड्रापआउट नहीं होंगे बच्चे 

बिहार बोर्ड के इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन छात्रों को मिलेगा, जिनके नंबर कम होने के कारण कहीं भी एडमिशन नहीं हो पाता था। नतीजा उन्हें मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता था। उन्हें न सिर्फ अब पढ़ाई जारी रखने का मौका मिलेगा। बल्कि दूर के स्कूल में जाने से भी मुक्ति मिलेगी। अब छात्र-छात्राएं मैट्रिक बाद अपने ही गांव के स्कूल में इंटर में नामांकन ले सकेंगे। मैट्रिक करने के बाद अब उनकी पढ़ाई नहीं छूटेगी। 

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