ट्रेन से कर सकेंगे बोधगया तक की यात्रा, लंबे इंतजार के बाद इस रेल रूट पर पटरी बिछाने को मिली मंजूरी, राशि भी जारी

ट्रेन से कर सकेंगे बोधगया तक की यात्रा, लंबे इंतजार के बाद इस रेल रूट पर पटरी बिछाने को मिली मंजूरी, राशि भी जारी

PATNA : अब तक बोधगया जाने के लिए गया जंक्शन पर उतरना पड़ता था, लेकिन आनेवाले कुछ सालों में यात्री सीधे बोधगया तक ट्रेन सेवा का लाभ उठा सकेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि रेलवे बोर्ड ने गया व चतरा के लोगों के लंबे समय से चली आ रही मांग को धरातल पर उतारने जा रही है। 

वर्षों से चले आ रहे सर्वे का काम पूरा होते ही गया जी से झारखंड के चतरा तक रेल लाइन बिछाने को रेल मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। इस बात की जानकारी खुद रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने चतरा सांसद सुनील कुमार सिंह को पत्र भेज कर दी है। इस परियोजना के तहत करीब 99.3 4 5 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई जाएगी। पहले चरण में 5, 452 करोड़ रुपए की स्वीकृति रेलवे बोर्ड की ओर से दी गई है। इस राशि में भूमि अधिग्रहण के लिए 926 करोड़ रुपए शामिल है।

बोधगया, शेरघाटी में बनेगा स्टेशन

गया से चतरा जिले को जोड़ने वाली प्रस्तावित रेल लाइन का निर्माण गया जंक्शन के निकट एफसीआई गोदाम के आसपास से निकलेगी। रेल लाइन पर गया के बाद परसावां, बोधगया, कमोद, शेरघाटी, हंटरगंज, जोरीकला, बोरियों व चतरा स्टेशन बनेगा। तीन टनल और छोटा बड़ा ब्रिज बनेगा। 1300 मीटर 150 मीटर और 300 मीटर के तीन टनल होंगे। इसके अलावा 9 बड़ा ब्रिज दो लेबल क्रासिंग, माइनर ब्रिज 105, आरओबी 35, आरयूबी 40, व 197 ब्रिज का निर्माण कराया जाएगा।

1998 में पहली बार सर्वे के लिए जारी हुई थी राशि

गया चतरा रेल लाइन निर्माण के तहत वर्ष 2009 में पहले फेस में 10 किलोमीटर रेल लाइन निर्माण के लिए 27.9 8 करोड रुपए की स्वीकृति मिली थी। गया चतरा न्यू रेल लाइन प्रोजेक्ट के तहत 1998 में 284. 21 करोड़ रूप सर्वे के लिए दिए गए थे। इसके बाद सर्वे के लिए 2005 में 38. 3.60 करोड़ और 2008-9 में 4 0 5 करोड़ की स्वीकृति मिली थी। इसके बाद अब रेल लाइन को धरातल पर उतारने के लिए स्वीकृति मिल गई है।

दोनों राज्यों के बीच विकास की गति होगी तेज़

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान रखने वाला विश्वधरोहर बोधगया बोधगया से लोग अब और आसानी से जुड़ेंगे। बिहार- झारखंड में विकास को गति मिलेगी। बिहार व झारखंड दोनों राज्यों में बौद्ध और जैन आस्था को लेकर व खनिज पदार्थ और खेती उत्पाद के क्षेत्र में भी विकास को गति मिलेगी।


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