नीतीश-तेजस्वी सरकार का पूरा हुआ एक महीना, विवादों में उलझी सरकार का जानिए विकास

नीतीश-तेजस्वी सरकार का पूरा हुआ एक महीना, विवादों में उलझी सरकार का जानिए विकास

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महागठबंधन संग सरकार बनाने का एक महीना पूरा हो गया है. उनकी सरकार 9 अगस्त को एक महीने के कार्यकाल पूरा कर चुकी है. लेकिन, इस एक महीने में सरकार के लिए सुकून के पल कम ही आए. 9 अगस्त को शपथ लेने के बाद से नीतीश और तेजस्वी यादव अपने नेताओं के विवादों की वजह से लगातार विपक्ष के निशाने पर हैं. दरअसल, नीतीश – तेजस्वी के शपथ लेने के बाद सबसे पहला विवाद तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा से जुड़ा रहा. उन्हें पद से हटाने की तमाम कोशिशों के बाद भी वे अपनी मर्जी से ही पद छोड़े. इसे लेकर भाजपा ने सरकार पर नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. 

इसी तरह जब गया के विष्णुपद मंदिर में नीतीश कुमार के साथ आईटी मंत्री मोहम्मद इसराइल मंसूरी ने प्रवेश किया तो बड़ा विवाद शुरू हो गया. एक गैर-हिंदू के साथ मंदिर परिसर में प्रवेश करने पर नीतीश कुमार पर न सिर्फ भाजपा बल्कि कई हिंदू संगठनों ने भी विरोध जताया. राजद एमएलसी कार्तिक सिंह को मंत्री बनाए जाने के बाद यह मामला राष्ट्रीय सुर्खियां बन गया. भाजपा ने कार्तिक सिंह को फरार अपराधी बता दिया. विवाद इतना गहराया कि 16 अगस्त को मंत्री पद की शपथ लेने वाले कार्तिक सिंह ने 15 दिन बाद ही पद से इस्तीफा दे दिया. 

इसी तरह सहकारिता मंत्री सुरेन्द्र यादव पर सार्वजनिक मंच से अभ्रद भाषा का उपयोग करने का आरोप लगा. इसे लेकर भी भाजपा ने हमला बोला. राजद विधायक रीतलाल यादव के भाई पर अधिकारियों को धमकाने के आरोप लगा. वहीं राजद के पूर्व एमएलसी अनवर अहमद के बेटे अफसर अहमद पर पटना के पीरबहोर थाना में पुलिस के साथ बदतमीजी करने के आरोप लगा. इस मामले में अफसर अहमद को गिरफ्तार भी किया गया है. 

इसके अलावा राज्य के विभिन्न हिस्सों में हत्या और अपराध के मामलों को इंगित कर भाजपा ने राज्य में जंगलराज आने का दावा किया. इसके काट में नीतीश कुमार ने बयान देकर कहा कि बिहार में जनताराज है. एक प्रकार से एक महीने के दौरान नीतीश कुमार को महागठबंधन सरकार चलाते हुए लगातार विवादों से सामना करना पड़ा है. इसी कारण भाजपा सरकार पर हमलावर है. विशेषकर सरकार में शामिल लोगों और दलों से जुड़े लोगो के विवाद सामने आने पर भाजपा को पिछले एक महीने में कई ऐसे मौके आए जब उसने सरकार के इक़बाल पर सवाल उठाया. साथ ही विधि व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरा. 

हालांकि इस महीने में राज्य सरकार की ओर से भले कोई लोकलुभावन घोषणा नहीं की गई हो लेकिन नीतीश सरकार लगातार इस बात का भरोसा दे रही है आने वाले दिनों में रोजगार और नौकरी के मुद्दे पर बड़ी घोषणा होगी. विशेषकर तेजस्वी यादव इस दिशा में काफी सक्रिय दिखे हैं. 


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