पप्पू ने पार्टी छोड़ी, भाजपा-जेडीयू में खुशी, अब पूर्णिया सीट पर जीत तय मान रहा है NDA

पप्पू ने पार्टी छोड़ी, भाजपा-जेडीयू में खुशी, अब पूर्णिया सीट पर जीत तय मान रहा है NDA

PATNA: पूर्णिया में बीजेपी की मुराद बिना मांगे ही पूरी हो गयी. पार्टी में पूरी तरह से किनारे कर दिये गये पूर्व सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने आज पार्टी छोड़ दी. पप्पू सिंह को लंबे अर्से से पार्टी में कोई भाव नहीं दिया जा रहा था. आज उन्होंने पटना में प्रेस कांफ्रेंस बुलायी और पार्टी से इस्तीफे का एलान कर दिया. उनके कांग्रेस में जाने की चर्चा है. बीजेपी-जेडीयू ये मान रही है कि अगर ऐसा होता है तो पूर्णिया सीट से एक बार फिर जदयू उम्मीदवार की जीत तय हो जायेगी.

पटना में इस्तीफे का एलान

पूर्णिया के पूर्व सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने आज पटना में प्रेस कांफ्रेंस कर भाजपा से इस्तीफा देने का एलान किया. उन्होंने कहा कि भाजपा ने नीतीश कुमार के साथ दोस्ती कर गलती की. बीजेपी में लोकतंत्र खत्म हो गया है. लिहाजा वे पार्टी छोड़ रहे हैं. लेकिन वे पूर्णिया से चुनाव लड़ेंगे. पप्पू सिंह ने इशारों में बताया कि वे कांग्रेस में जाने को तैयार हैं.

जेडीयू-बीजेपी खुश, पूर्णिया में जीत पर शक नहीं

अमूमन किसी नेता के पार्टी छोड़ने पर दल के लोग परेशान होते हैं. लेकिन, बीजेपी और जेडीयू में खुशी दौड़ पड़ी है. खुशी इसलिए क्योंकि पप्पू सिंह को कांग्रेस से टिकट मिलने की उम्मीद है. जेडीयू के मुताबिक पप्पू सिंह के कांग्रेसी उम्मीदवार बनने के बाद NDA की जीत में कोई संदेह नहीं रह जायेगा. वैसे भी सियासी जानकार मानते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू को पप्पू सिंह के कारण ही जीत मिली थी. बीजेपी ने किसी दूसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारा होता तो शायद परिणाम कुछ और होता.

पप्पू से परेशान थी बीजेपी

दरअसल, भारी मोदी लहर में भी भारतीय जनता पार्टी को 2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्णिया सीट पर हार का सामना करना पड़ा था. पूर्णिया सीट पर जदयू के संतोष कुशवाहा ने 2014 में जीत हासिल की थी. पार्टी का मानना था कि उदय सिंह पप्पू को लेकर जनता में भारी नाराजगी का खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ा था. पप्पू सिंह के खिलाफ नाराजगी इतनी ज्यादा थी कि लोगों ने नरेंद्र मोदी को भी भुला दिया. जबकि पूर्णिया बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है. पार्टी के आंतरिक सर्वे में भी पप्पू सिंह के खिलाफ भारी नाराजगी की बात सामने आयी थी. ऐसे में लोकसभा चुनाव के बाद से ही पप्पू सिंह को पार्टी ने किनारे लगा दिया था. 2017 में जब बीजेपी और नीतीश कुमार के बीच फिर से दोस्ती हुई तो पप्पू सिंह की संभावनायें पूरी तरह खत्म हो गयीं. पूर्णिया जेडीयू की जीती हुई सीट है और बीजेपी-जदयू तालमेल के बाद इसे हर हाल में नीतीश के कोटे में ही जाना तय था. हालांकि हर हाल में चुनाव लड़ने को बेताब पप्पू सिंह ने अपने टिकट के लिए कोशिशें खूब की. जेडीयू सूत्रों के मुताबिक पप्पू सिंह ने नीतीश कुमार से भी सेटिंग की कवायद की लेकिन नीतीश ने मुलाकात करने से भी इंकार कर दिया था.

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