गिरिडीह में पारा शिक्षकों की बढ़ी परेशानी, 15 महीनों से नहीं मिला मानदेय

गिरिडीह में पारा शिक्षकों की बढ़ी परेशानी, 15 महीनों से नहीं मिला मानदेय

GIRIDIH : इसे एनआइओएस की गलती मानें या पारा शिक्षकों की खुद की लापरवाही. डीएलएड की ट्रेनिंग पूरी नहीं हुई और पारा शिक्षकों पर आफत का पहाड़ टूट पड़ा है. किसी को साल भर तो किसी को 15 महीने से मानदेय नहीं मिला है. आलम ये है कि जिले के करीब 200 पारा शिक्षकों के घरों में खाने को दाने नहीं हैं. वहीं, बीमार पड़ने के बाद पैसे के अभाव में इलाज नहीं करा पाने के कारण अब असमय मौत को भी गले लगाने की मजबूरी आन पड़ी है. ऐसे में इन परिवारों को मदद की दरकार है और सभी उम्मीद भरी नजरों से अपने सरकार की ओर देख रहे हैं. उनके सामने परिवार के लिए भोजन जुटाना भी मुश्किल हो गया है. गिरीडीह जिले के करीब 200 पारा शिक्षकों को महीनों से मानदेय भुगतान नहीं हुआ है. किसी को एक साल से तो किसी को 15 महीना से मानदेय नहीं मिला है. मानदेय के अभाव में पारा शिक्षकों और उनके परिवार को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है. बीमार पड़ने पर पैसे के अभाव में पारा शिक्षक इलाज भी नहीं करा पा रहे हैं. बुधवार को उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बरोटांड़ के पारा शिक्षक 45 वर्षीय किशुन दास की मौत हो गई. वे बीमार चल रहे थे और पैसे के अभाव में उनका सही से इलाज नहीं हो पाया. इसके कुछ माह पूर्व भी आर्थिक तंगी से बेंगाबाद में एक पारा शिक्षक की मौत हो गई थी. 

क्या है मामला

यहां बता दें कि सरकार और विभाग की ओर से पारा शिक्षकों को एनआइओएस से डीईएलएड का प्रशिक्षण कराया जा रहा था. सभी को मई 2019 तक प्रशिक्षण पूरा कर लेना था. एनआइओएस ने सितंबर 2019 तक के सभी लंबित मामलों का निष्पादन कर दिया. इसके बाद आवेदन करने और फॉर्म भरनेवाले पारा शिक्षकों का मामला अटक गया. जिले के ऐसे ही करीब 200 पारा शिक्षकों के मानदेय भुगतान पर सरकार ने रोक लगा दी है. साथ ही उन्हें हटाने का आदेश भी दे दिया है. लेकिन इस आदेश के खिलाफ पारा शिक्षकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी है, जिस कारण उन्हें हटाया नहीं जा सका है और वे अपने-अपने स्कूल में लगातार सेवा दे रहे हैं. 

एनआइओएस भी है जिम्मेदार

इस मामले में पारा शिक्षकों की लापरवाही तो है ही, लेकिन एनआइओएस भी जिम्मेदार है. परियोजना से जुड़े लोगों का कहना है कि एनआइओएस ने ऐसी कोई सूचना जारी नहीं की थी कि सितंबर 2019 के बाद पारा शिक्षकों का प्रशिक्षण पूरा नहीं कराया जाएगा. लेकिन यह पत्र अवश्य जारी किया था कि सितंबर 2019 तक पारा शिक्षक अपने लंबित प्रशिक्षण को पूरा कर लें. हालांकि इससे स्पष्ट नहीं हो पाया था कि इसके बाद पारा शिक्षकों को प्रशिक्षण पूरा करने का मौका नहीं मिलेगा. 

मौत के बाद किस काम का मानदेय

एडीपीओ अभिनव सिन्हा ने कहा कि मृत पारा शिक्षक किशुन दास को बकाया मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा. यह काम के विरुद्ध भुगतान का मामला बनता है. उसके परिवार को भुगतान कर दिया जाएगा. वहीं, डीएसई अरविंद कुमार ने कहा कि बीमार पारा शिक्षक की मौत होने की सूचना मिली है. अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों के मानदेय भुगतान पर रोक सरकार के स्तर से ही लगाई गई है. इस मामले में विभाग या मैं कुछ नहीं कर सकता. 

गिरिडीह से चन्दन पाण्डेय की रिपोर्ट

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