पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी को स्थाई भवन का इंतजार, तीन साल में तीन कदम भी नहीं बढ़ा भवन का काम, जानिए विस्तार से....

पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी को स्थाई भवन का इंतजार, तीन साल में तीन कदम भी नहीं बढ़ा भवन का काम, जानिए विस्तार से....

डेस्क...  बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ड्रीम यूनिवर्सिटी में शामिल पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी की स्थापित हुए 3 साल का समय होने को जा रहा है, लेकिन आज तक उसे एक स्थाई भवन नहीं मिल सका है। पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी की स्थापना मार्च 2018 में की गई, लेकिन जितने जोर-शोर से इसकी स्थापना हुई, उतने ही जोर-शोर से इस यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग बनाने का काम नहीं हो पाया है। आलम यह है कि अगले कई साल तक पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी को बिल्डिंग नहीं मिलने वाली है। 

बिहार में पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी ड्रीम यूनिवर्सिटी के तौर पर मगध यूनिवर्सिटी से अलग कर मार्च 2018 में पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई, लेकिन 3 साल होने को है लेकिन आज भी यूनिवर्सिटी को एक स्थाई बिल्डिंग नहीं मिली है। यूनिवर्सिटी के अधिकारी कर्मचारी भी मानते हैं कि स्थाई बिल्डिंग के अभाव में छात्रों का पढ़ाई प्रभावित हो रहा है, उनका कहना है कि नया विश्वविद्यालय मिला है। बल्डिंग अभी तक नहीं मिली है। यह सरकार का काम है। सरकार जब चाहे भवन बनाएगी। जैसे ही बनेगा निसंदेह जो थोड़ी बहुत कठिनाई है। वह दूर करने का प्रयास करेंगे। 

कहां फंसा है मामला?

जानकारी के मुताबिक पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय को 8.5 एकड़ जमीन मीठापुर बस स्टैंड के पास मिली है। फिलहाल मीठापुर बस स्टैंड से बसों का संचालन हो रहा है। बस स्टैंड खाली होने पर कागजी कार्रवाई होगी और फिर बिल्डिंग का निर्माण शुरू होगा। यानी बिल्डिंग बनने जितने साल लगेंगे, इतने साल इस यूनिवर्सिटी का काम प्रशासनिक भवन के जरिए होगा।

अभी पीजी की पढ़ाई यूनिवर्सिटी के अलग-अलग कॉलेजों में हो रही है

स्थाई भवन नहीं होने की वजह से पीजी में आर्टस और ह्यूमिनिटीज की पढ़ाई कॉलेज ऑफ कामर्स में, साइंस की पढ़ाई अनुग्रह नारायण कॉलेज में, जबकि कॉमर्स की पढ़ाई बीडी कॉलेज में हो रही है। 

आखिर जिम्मेदार कौन?

वहीं शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि जमीन एलोटेड है और आने वाले साल में भवन की समस्या सुलझ जाएगी। अगर मुख्यमंत्री की ड्रीम यूनिवर्सिटी को अब तक स्थाई इमारत 3 साल में नहीं मिल सकी है और निकट भविष्य में इसके आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं तो उसके लिए आखिर कौन जिम्मेदार है जिस तरह से कुलपति दार्शनिक जवाब देते हैं क्या उस जवाब से छात्रों की परेशानी दूर होगी। 

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