नीतीश राज में ये कैसा सुशासन? पटना DTO में करोड़ों का घोटाला, जांच के नाम हांफ रही परिवहन विभाग की टीम,बचाने की ली सुपारी!

नीतीश राज में ये कैसा सुशासन? पटना DTO में करोड़ों का घोटाला, जांच के नाम हांफ रही परिवहन विभाग की टीम,बचाने की ली सुपारी!

PATNA: पटना के DTO ऑफिस में 83 दिन पहले बड़े स्तर पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ था। पटना के तत्कालीन डीटीओ और एक क्लर्क की मिलीभगत से करोड़ों की सरकारी राशि का वारा-न्यारा किया गया था। साहब और बाबू ने मिलकर नियमों को ताक पर नीतीश सरकार के कथित सुशासन को तार-तार किया था। तत्कालीन डीटीओ अजय कुमार ठाकुर और लिपिक अमित कुमार गौतम पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगे थे। 17 सितंबर 2020 को ही मामले का खुलासा हुआ था। इसके बाद लाज बचाने के लिए परिवहन विभाग की तरफ से जांच टीम गठित की गई थी। लेकिन 83 दिन बीत गए अब तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है।ऐसे में अब तो जांच टीम पर ही गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. बताया जाता है कि जांच टीम मामले को रफा-दफा करने में जुटी है। परिवहन आयुक्त का कहना था कि चुनाव की वजह से थोड़ी देरी हुई है यह कहे हुए भी 22 दिन बीत गए लेकिन सरकार के नाक के नीचे पटना डीटीओ में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि जांच टीम ने ही बचाने की सुपारी ले ली है।ऐसे ही अधिकारी सीएम नीतीश के सुशासन को तार-तार कर रहे।

जानिए पूरा मामला

पटना के तत्कालीन डीटीओ-कर्मी की मिलीभगत से वाहन BS-4 वाहन का बिना सरकारी राजस्व के ही निबंधन और चोरी की गाड़ी का भी निबंधन किया गया था. इस कारनामें से सरकार को पचास करोड़ से अधिक के राजस्व की क्षति हुई थी। इसके साथ ही तत्कालीन डीटीओ अजय कुमार ठाकुर और कर्मी अमित कुमार गौतम पर कई अन्य आरोप लगे थे। वर्तमान डीटीओ ने 17 सितंबर को  अपनी रिपोर्ट परिवहन कमिश्नर को भेज दिया था,जिसमें पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारी और कर्मी पर कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था। डीटीओ के घोटाले वाले पत्र के बाद परिवहन कमिश्नर ने जांच के लिए कमेटी बनाई थी। तत्कालीन डीटीओ और कर्मी ने हर गुनाह किये लेकिन परिवहन विभाग के आलाधिकारी मौन साधे रहे। करोड़ों के इस खेल का खुलासा होने के बाद परिवहन विभाग ने इज्जत बचाने के लिए जांच टीम तो बैठाई लेकिन अब तक टीम आगे नहीं बढ़ पाई इतने दिन भी अब तक जांच टीम ने क्या जांच किया,यह अब तक किसी को पता नहीं। ऐसे में बड़ा सवाल खड़े हो रहे कि क्या चहेते सरकारी कर्मियों को बचाने की साजिश तो नहीं ? अब तो जांच कमेटी ही सवालों के घेरे में आ गई है। बड़ा सवाल यही कि पटना डीटीओ में हुए घोटाले की जांच करने वाली टीम 80 दिनों से क्या कर रही है? कहीं रखूखदार अफसर और कर्मी को बचाने की चाल तो नहीं ? 


क्या बचाने का चल रहा खेल?

पटना के वर्तमान डीटीओ ने अपनी जांच में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी. इशके बाद उन्होंने 17 सितबंर को पत्र के माध्यम से परिवहन विभाग को सूचित किया था। इसके बाद विभाग ने चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया। जांच टीम के गठन के बाद जांच की कार्रवाई शुरू हुई। लेकिन जांच की गाड़ी थोड़ी आगे बढ़कर रूक गई। जांच टीम ने अब तक अपनी जांच रिपोर्ट परिवहन आयुक्त सीमा त्रिपाठी को नहीं सौंपी है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या जांच के नाम पर मामले को दबाने और फाइल को डंप करने की साजिश तो नहीं ? 

18 नवंबर को परिवहन आयुक्त ने क्या कहा था?

बिहार के परिवहन आयुक्त ने 18 नवंबर को न्यूज4नेशन से बातचीत में कहा था कि पटना डीटीओ ऑफिस में फर्जीवाड़े को लेकर जो जांच टीम गठित की गई थी उसने अभी अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। हमने भी उस संबंध में कोई जानकारी नहीं ली है। उन्होंने बताया कि चुनाव की वजह से जांच में देरी हुई है। अब नई सरकार बन गई है और जांच टीम जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई के संबंध में जानकारी देंगे।जानकार बताते हैं कि 22 दिन बाद भी अब तक जांच टीम ने जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है।

 2018 में डीटीओ ऑफिस के 3 फर्जीवाडे में आया था नाम

2018 में पटना डीटीओ कार्यालय में फर्जीवाड़ा के तीन गंभीर मामले सामने आए थे। उन मामलों मे ऑफिस के एक रसूखदार कर्मी अमित कुमार गौतम  का नाम सामने आया था। दो मामलों में गांधी मैदान थाना मे केस भी दर्ज हुआ, लेकिन पुलिस भी जांच के नाम पर फाईल पर कुंड़ली मारकर बैठी रही। तत्कालीन डीटीओ और कर्मी की इस तरह से तूती बोलती थी कि पुलिस ने भी जांच के नाम पर लिपा-पोती कर दी।  पटना DTO कार्यालय मे फर्जीवाड़े का पहला मामला उस समय सामने आया जब कार्यालय के अधिकारियों ने अपने कारनामे से मृत व्यक्ति को जिंदा कर दिया। बता दें कि 19 मई, 2017 को गोपालगंज में भाजपा नेता कृष्णा शाही की हत्या अपराधियों ने कर दी थी। मौत के बाद उनकी गाड़ी को दूसरे के नाम पर कर दिया गया.उन्होनें पटना डीटीओ ऑफिस के कर्मियों पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा गांधी मैदान थाने मे मामला दर्ज कराई। पीड़िता ने सीधे तौर पर ऑफिस के कर्मचारियों पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा मामला दर्ज कराया था.

पुलिस की छापेमारी में भी गौतम का आया था नाम 

परिवहन आयुक्त के आदेश पर23 जून 2018 को पटना डीटीओ कार्यालय में छापेमारी हुई थी। छापेमारी में पकड़े गए दलाल ने पुलिस के समक्ष ऑफिस के एक रसूखदार कर्मी का नाम लिया था। गिरफ्तार शख्स ने पुलिस के समक्ष  परिवहन कार्यालय के फर्जीवाड़े की पोल खोली थी। पूछताछ में उसने डीटीओ कार्य़ालय के रसूखदार कर्मी गौतम कुमार औरअन्यके नाम लिये थे। तब गांधी मैदान पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की बात कही थी। उस वक्त टाउन डीएसपी सुरेश कुमार ने कहा था कि मामला गंभीर है और इस केस को वो खुद देख रहे हैं। लेकिन इस मामले को भी गांधी मैदान थाने की पुलिस ने ठंडे बस्ते मे डाल दिया


पानी सिर के ऊपर से गुजरने पर विभाग की खुली नींद

पानी सर के ऊपर से बहने पर परिवहन विभाग की नींद खुली है.पटना डीटीओ ऑफिस में खुलेआम गड़बड़ी की जा रही थी।लेकिन बड़े हाकिम सबकुछ चुपचाप देखते रहे। जानकार तो बताते हैं कि पटना डीटीओ दफ्तर में लूट मचाने के लिए तत्कालीन डीटीओ और उक्त कर्मी को खुली छूट दे दी गई थी।लिहाजा जितने गैर कानूनी काम हो सकते थे वे पिछले दो सालों में किये गए। तत्कालीन डीटीओ का प्रताप ऐसा था कि गड़बड़ी का खुलासे के बाद भी विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा था।

न्यूज4नेशन ने 2018 में ही तत्कालीन DTO-कर्मी के फर्जीवाड़े की खोली थी पोल

न्यूज4नेशन ने  2018 में ही परिवहन विभाग के पटना डीटीओ ऑफिस में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया था।न्यूज4नेशन ने अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में खुलासा किया था कि बिना अधिकारी के आदेश  और गाड़ी की जांच किये 20 हजार से अधिक वाहनों का निबंधन कर दिया गया. हैरत की बात ये रही थी कि,निबंधन के लिए ना तो MVI ने वाहन फिटनेस सर्टिफिकेट दिया और ना DTO ने वाहन का निबंधन पत्र जारी करने का आदेश दिया। परिवहन विभाग के पटना कार्यालय में यह खेल काफी समय से चला आ रहा था।बावजूद इसके अधिकारी चुप्पी लगाए बैठे रहे।

न्यूज 4नेशन को जो कागजात हाथ लगे थे उसमें डीटीओ कार्यालय की पोल खुल गई .पटना के डीटीओ कार्यालय से BR01-DJ और BR01-DR सिरीज़ में हजारों RC बिना अधिकारी की अनुमति के जारी हुआ है । यह खेल पिछले कई सालों से चलते रहा. न्यूज4नेशन के हाथ जो कागजात लगे उसमें DJ नं सीरीज के 8390,8381,8385,8387,8388,8371,8379,8375,8389,8378,8373,8377 सहित कई नंबर बिना अनुमति के ही जारी किए गए.जानकारों का कहना है की DJ सीरीज में लगभग 9000 नंबर के कागजात पर एमवीआई और डीटीओ ने हस्ताक्षर नही किए। यानी बिना आदेश के ही तत्कालीन कर्मी अमित कुमार गौतम की मिलीभगत से गाडियों का निबंधन पत्र जारी कर दिए गए।

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