बिहार में जदयू-राजद को चारो खाने चित करने का पीएम मोदी ने बनाया प्लान, भाजपा की राह आसान बनाएंगे पसमांदा मुसलमान

बिहार में जदयू-राजद को चारो खाने चित करने का पीएम मोदी ने बनाया प्लान, भाजपा की राह आसान बनाएंगे पसमांदा मुसलमान

पटना. भारतीय जनता पार्टी की पहचान हिंदूवादी पार्टी के रूप में है. भाजपा को अपनी इस छवि से कुछ राज्यों में नुकसान भी होता है. इसमें बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य प्रमुख हैं जहाँ के मुस्लिमों में बड़ी संख्या पसमांदा मुसलमानों की है. भाजपा को राजद और जदयू जैसे दलों से बिहार में मिलने वाली बड़ी सियासी चुनौती के पीछे मूल रूप से मुस्लिम वोटरों का बीजेपी विरोधी दलों के लिए गोलबंद होना माना जाता है. ऐसे में भाजपा की कोशिश अब जदयू और राज्य के परम्परागत वोटों में सेंधमारी की है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के नेताओं को 2004 के लोकसभा चुनाव में जीत का नया मंत्र दिया. इसमें पार्टी को पसमांदा मुसलमानों के बीच पैठ बढ़ाने कहा गया है. 

दरअसल, आंकड़े बताते हैं कि भाजपा को बहुत कम मुस्लिम वोट मिलते हैं. मुसलमानों को शिया और सुन्नी के रूप में दो हिस्सों में बांटा गया है. इसके अलावा इस्लाम को मानने वाले 72 और फिरके हैं. इसमें बोहरा मुस्लिम को समृद्ध, संभ्रांत समुदाय के तौर पर देखा जाता है. देश में 25 लाख से ज्यादा बोहरा मुसलमानों की आबादी है. बोहरा समुदाय के ज्यादातर मुसलमान व्यापारी होते हैं. महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में बसते हैं और इनके बीच भाजपा की गहरी पैठ मानी जाती है. 

दूसरी ओर भारत में रहने वाले मुसलमानों में 15 फीसदी जो उच्च वर्ग के माने जाते हैं उन्हें अशरफ कहते हैं. वहीं अरजाल, अजलाफ को मुस्लिम में पिछड़े के रूप में माना जाता हैं. इन्हें ही पसमांदा कहा जाता है. इनकी आबादी करीब 85 फीसदी है. माना जाता है कि पसमांदा आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक हर तरह से पिछड़े और दबे हुए हैं. इनकी बड़ी आबादी बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि राज्यों में है. बिहार के सीमांचल के जिलों में बड़ी संख्या में पसमांदा मुसलमान माने जाते हैं. बिहार में जदयू- राजद को कड़ी चुनौती देने के लिए भाजपा की कोशिश इन्हीं पसमांदा मुसलमानों को अपने लिए गोलबंद करने की है. 

बिहार में 2011 की जनगणना के अनुसार, किशनगंज में 67 प्रतिशत मुस्लिम आबादी थी जो बिहार के अन्य जिलों की तुलना में सबसे अधिक है. इसके बाद उसका पड़ोसी जिला अररिया है जहां मुस्लिम आबादी 43 प्रतिशत थी. 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार की कुल आबादी 10,40,99,452 है. इसमें पुरुषों की संख्या 5,42,78,686 और महिलाओं की तादाद 4,98,21,295 है. कुल आबादी में मुसलमानों का प्रतिशत 16.9 है. वर्तमान बिहार में मुसलमानों की कुल आबादी 1,75,5,78,09 है. जिसमें पुरूष 90,44,086 और महिलाएं 85, 13,723 है.

हालांकि पिछले एक दशक के दौरान माना जाता है कि बिहार में मुस्लिम आबादी बढ़कर करीब 18 से 19 फीसदी के करीब है. राज्य के 13 लोकसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां मुसलमान मतदाताओं की संख्या 12 से 67 फीसदी के बीच है. बिहार में सर्वाधिक मुस्लिम वोटर वाला लोकसभा क्षेत्र किशनगंज है, यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या 67 फीसदी है, वहीं दूसरे स्थान पर कटिहार है, जहां मुस्लिम वोटर की संख्या 38 फीसदी, अररिया में 32 फीसदी, पूर्णिया में 30 फीसदी, मधुबनी में 24 फीसदी, दरभंगा में 22 फीसदी, सीतामढ़ी में 21 फीसदी, पश्चिमी चंपारण 21 फीसदी और पूर्वी चंपारण 20 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। सीवान, शिवहर खगडिय़ा, भागलपुर, सुपौल, मधेपुरा, औरंगाबाद, पटना और गया में 15 फीसदी से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं. इसमें बड़ी संख्या ऐसे मुसलमानों की है जो पसमांदा हैं. 

भाजपा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव 2025 में बिहार में अपने प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए इन्हीं पसमांदा को जोड़ने की जुगत में है. अगर भाजपा इसमें सफल हो जाती है इससे जदयू और राजद जैसे दलों को बड़ा झटका लग सकता है. 


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