जहरीली बनी मत्स्य पालन योजनाः नगर निगम की लापरवाही से मछली पालकों की टूटी कमर, मछलियों के मरने से हो रहा आर्थिक नुकसान

जहरीली बनी मत्स्य पालन योजनाः नगर निगम की लापरवाही से मछली पालकों की टूटी कमर, मछलियों के मरने से हो रहा आर्थिक नुकसान

PATNA CITY: बिहार में मछली पालन के लिए सरकार कई तरह की योजनाएं चला रही हैं। वहीं मत्स्य पालकों को प्रोत्साहित करने के लिए कई तरह की सब्सिडी भी दे रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग मछली पालन के प्रति उत्सुक हो। वहीं अगर बात करें तो इस योजना से बड़ी संख्या में लोग जुड़ भी रहे हैं, मगर उन्हें फायदे से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

दरअसल यह मामला मालसलामी थाना क्षेत्र के बाजार समिति स्थित गुरु के बाग के पास का है, जहां पर तालाब में सैंकड़ों की संख्या मं मछलियां मर रही हैं। मछलियों के मरने का कारण तालाब में फैक्ट्रियों द्वारा छोड़ा जा रहा जहरीला पानी है। फैक्ट्रियों द्वारा निकलने वाला जहरीला पानी मछली वाले तालाब में जा रहा है, जिसके कारण मछली पालकों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मछली पालक किसान राहुल यादव और कमलेश यादव ने बताया कि फैक्ट्रियों द्वारा जो जहरीला पानी निकल रहा है, वही तालाब में आ रहा है। जिसके कारण मछलियां मरने लगी हैं। इसके कारण करीब 5 से 10 लाख रूपए लागत तक की मछलियां मर चुकी हैं। मछली पालक राहुल यादव ने बताया कि प्रति वर्ष ढाई लाख रुपया तालाब का किराया देना होता है। वैसी स्थिति में अगर तालाब की मछलियां मरती जाती हैं तो हमारे सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाती हैं। कई बार नगर निगम और मत्स्य विभाग को भी इसकी जानकारी दी गई लेकिन इस समस्या का कोई भी निराकरण नहीं किया गया। अब भी नगर निगम के नाले से जहरीला पानी इस तालाब में छोड़ा जा रहा है।

बता दें, अभी से 4 साल पहले भी मछली पालकों को करीब 40 से 50 लाख की लागत तक की मछलियां मर गयी थी, जिसके कारण आर्थिक  नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार भी वही स्थिति देखने को मिल रही है। मछली पालक राहुल बताते है कि निजी जमीन पर निगम के नाले का पानी छोड़ा जाता है, और मना करने पर हमें ही धमकाया जाता है और केस करने की बात कही जाती है।

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