अपराधियों पर नकेल कसने की तैयारी, सदन में आज पेश होगा बिहार अपराध नियंत्रण विधेयक 2024,डीएम को मिलेगा असीमित अधिकार
पटना: बिहार में अपराध पर लगाम लगाने के लिए सरकार नया कानून लाने जा रही है.प्रस्तावित कानून के अनुसार डीएम को अधिक शक्ति देने की तैयारी है. इस कानून के तहत जिलाधिकारी असामाजिक तत्वों को दो साल तक के लिए तड़ीपार कर सकेंगे और अगर तड़ीपार नहीं किया गया तो एक साल के जेल की सजा सुनाई जा सकती है.बिहार अपराध नियंत्रण विधेयक 2024 का प्रारूप तैयार किया गया है.आज यानी गुरुवार को यह विधेयक विधानसभा में पारित होकर कानून बन जाएगा. यह कानून 1981 के कानून का स्थान लेगा.
जिलाधिकारी को सीधी कार्रवाई का अधिकार
विधानमंडल से पास होने के बाद ये कानून अमल में आ जायेगा. बालू माफिया, जमीन और शराब माफियाओं पर नकेल कसने के लिए ये नया कानून बनाया जा रहा है,इस कानून राज्य के किसी जिले के डीएम को किसी व्यक्ति को दो साल तक के लिए तड़ीपार कर देने का अधिकार दिया गया है.अब इनपर सीधी कार्रवाई कर जिलाधिकारी कर सकेंगे.नए प्रस्तावित कानून के अनुसार अगर डीएम को लगता है कि कोई व्यक्ति एक असामाजिक तत्त्व है. उसके जिले में रहने और गतिविधियों से लोगों या सम्पत्ति को भय, खतरा या हानि पहुंच रही है या पहुंच सकती है या डीएम को ये लगता है कि उस व्यक्ति को अपनी जगह से हटाये बगैर उसकी गतिविधियां नहीं थमेंगी, तो डीएम उसे तड़ीपार करने का आदेश दे सकेगें. उस व्यक्ति से पहले स्पष्टीकरण मांगा जायेगा और फिर कार्रवाई कर दी जायेगी. डीएम ऐसे व्यक्ति को 6 महीने के लिए तड़ीपार करने का आदेश देंगे. इसे 2 साल तक बढ़ाया जा सकेगा.
जिलाधिकारी को मिलेगा असीमित अधिकार
बिहार सरकार जिलाधिकारी को असीमित शक्ति देने जा रही है. इसका प्रावधान राज्य सरकार द्वारा बिहार अपराध नियंत्रण विधेयक, 2024 में किया गया है. गुरुवार को विधानमंडल से पारित होते ही राज्य में अपराध नियंत्रण का नया कानून राज्य में लागू हो जाएगा.
प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष अपील
नये कानून में जिलाधिकारी को वारंट जारी करने, गिरफ्तार करने, जेल भेजने, बेल देने का अधिकार होगा. उन्हें आपराधिक मामलों में शामिल तत्वों को छह माह तक जिला तथा राज्य से तड़ीपार करने का भी अधिकार होगा. आदेश लेकर ही तड़ीपार व्यक्ति वापस लौट सकेगा. हालांकि जिलाधिकारी के आदेश के खिलाफ प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष अपील किया जा सकेगा. जिलाधिकारी को दंडात्मक कार्रवाई करने की सूचना राज्य सरकार को पांच दिनों के अंदर देनी होगी. वहीं, 12 दिनों के अंदर सरकार से अनुमति लेनी होगी.
जिलाधिकारी के पास कोर्ट का अधिकार
अगर किसी ने जिलाधिकारी का आदेश नहीं माना तो उसे जेल भेजने का आदेश होगा. सरकार ने नये कानून में कहा है कि जिलाधिकारी के पास कोर्ट का अधिकार होगा. इस कानून के तहत जिलाधिकारी किसी को अरेस्ट करने का आदेश देगा तो कोई भी पुलिस अधिकारी बगैर वारंट के उसे गिरफ्तार कर लेगा. फिर उसे किसी कार्यपालक दंडाधिकारी के सामने पेश कर जेल भेज दिया जायेगा. असामाजिक तत्व किसे माना जायेगा. सरकार ने इसकी भी परिभाषा दी है.
सलाहकार बोर्ड का गठन
राज्य सरकार इस कानून के तहत सलाहकार बोर्ड का गठन करेगी. इसमें तीन व्यक्ति होंगे. इनमें उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीश होंगे या जिन्हें उस रुप में नियुक्त होने की योग्यता प्राप्त हो. बोर्ड के सदस्यों में से एक को अध्यक्ष नियुक्ति किया जाएगा जो उच्च न्यायालय के वर्तमान या सेवानिवृत न्यायाधीश होंगे. सलाहकार बोर्ड को सुनवाई का भी अधिकार दिया गया है। बोर्ड के सदस्यों के बहुमत की राय ही मान्य होगी. बोर्ड के समक्ष विधि व्यवसायी उपस्थित नहीं होंगे.सलाहकार बोर्ड अगर सलाह देगा कि वह व्यक्ति दोषी नहीं है तो सरकार उसे रिहा कर देगी.विधानसभा में गृह विभाग के प्रस्तावित नए कानून का मसौदा आज पेश किया जाएगा और इसे ध्वनित मत से पारित कराने की पहल सरकार की होगी.