एजेंट द्वारा करोड़ों रुपए लेकर भागने से डाक विभाग की विश्ववसनियता पर उठे सवाल, ठगी के शिकार लोगों के निकले आंसू

एजेंट द्वारा करोड़ों रुपए लेकर भागने से डाक विभाग की विश्ववसनियता पर उठे सवाल, ठगी के शिकार लोगों के निकले आंसू

डाक विभाग और फर्जीवाड़ा चोली दामन का रिश्ता

बिना उपभोक्ता के उपस्थिति के एजेंट कैसे कर लेते हैं निकासी , लोगों ने खड़े किए सवाल

डाक विभाग के कभी कर्मी तो कभी एजेंट करते रहे हैं फर्जीवाड़ा व घोटाला

विभाग ने कभी भी सुधार के नहीं लिए बेहतर निर्णय, आए दिन घोटालों से लोगों का टूट रहा विश्वास

CHHAPRA : डाक विभाग और फर्जीवाड़ा मानो इन दोनों में चोली दामन का रिश्ता है। केवल छपरा का ही उदाहरण ले तो यहां अब तक आधा दर्जन फर्जीवाड़ा के मामले सामने आ चुके हैं। कर्मियों की बहाली से लेकर राशि निकासी में भी फर्जीवाड़ा यहां आम बात हो गई है अब तो लोग यह पूछने लगे हैं कि आखिर में दीना उपभोक्ता की उपस्थिति के विभाग के अधिकारी और कर भी एजेंटों को रूपए का भुगतान कैसे कर देते हैं कहीं ना कहीं विभागीय अधिकारियों और कर्मियों की भी मिलीभगत है। अब तो जांच के बाद ही मामला सामने आएगा कि आखिर में इतनी बड़ी राशि की निकासी कैसे होती रही है। उपभोक्ताओं के खाते खुलते हैं और राशि जमा होती है तू उसकी मासिक समीक्षा क्यों नहीं होती? एजेंट 6 माह से साल भर तक राशि जमा नहीं करता इसे लेकर सवाल क्यों नहीं किए जाते हैं? यह तमाम बातें पोस्ट ऑफिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठा रहे हैं. हालांकि उपभोक्ताओं की गलती सबसे अधिक है यह बात अधिकारी ही स्पष्ट रूप से कह रहे हैं उनका कहना है की थोड़ी सी आलस की वजह से उपभोक्ता पोस्ट ऑफिस में आकर अपना अकाउंट चेक नहीं करते हैं और ना ही राशि जमा करते हैं।


अभी तक के विवादों पर एक नजर

केस 1 - मौना उप डाक घर और जगदम कॉलेज उप डाकघर में घोटाले की बात सामने आई थी इसमें एक पोस्ट ऑफिस के ही कर्मी की संलिप्तता सामने आई थी। जिसकी शिकायत मिलने के बाद वहां से कर्मी का स्थानांतरण कर दिया गया था पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। कर्मी जब जिला परिषद उप डाक घर में थे तो, वहां भी लाखों रुपए का वारा न्यारा किया गया था। शहर के मौना चौक स्थित उप डाकघर में लाखों रुपए के गबन के मामले की तीन सदस्य टीम ने जांच की थी। जमा कर्त्ताओं के खाते से लाखों रुपए की राशि का घोटाला किए जाने के शिकायत के बाद डाक विभाग ने यह कार्रवाई शुरू की थी। पोस्ट मास्टर जनरल उत्तरी बिहार मुजफ्फरपुर  के निर्देश के आलोक में तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया था। जांच टीम ने डाकघर में जाकर सभी अभिलेखों की छानबीन की थी। जानकारी के अनुसार करीब पचास लाख रुपये से अधिक की राशि का गबन किए जाने का मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया था। 

केस 2 - मांझी डाकघर में भी घोटाला होने का मामला सामने आया था। मांझी डाकघर में घोटाले के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने के मामले में नया मोड़ आ गया था। इस मामले में रिटायर्ड डाक सहायक  ने वरिष्ठ डाक अधीक्षक को पत्र भेजकर कहा था कि 5 फरवरी 2018 को वह सेवानिवृत्त हो चुके थे और 25 - 07- 2019 का यूसीआर तथा विभाग का जमा सूची की जमा की थी उन्होंने कहा था कि राशि की निकासी मांझी उप डाकघर से नहीं किया गया था, बल्कि एटीएम के द्वारा दूसरे जगह राशि की निकासी की गई थी, जिसकी यूसीआर कथा जमा सूची उन्होंने उपलब्ध कराया था।साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि 16 लाख 75 हजार रुपए रिकवरी कर सरकारी खजाने में जमा कराया जा चुका है, जिसमें डाक विभाग का कोई राजस्व की क्षति नहीं हुई है । 

इसके अलावा शहर के एक चर्चित डॉक्टर के खाते से भी फर्जी निकासी का मामला सामने आया था। डाकघरों में चल रहे घोटालों के खेल में विभाग के वरीय अधिकारियों की संलिप्तता की चर्चा का बाजार हमेशा से गर्म रहा है।

धीरज चला रहा था समानांतर पोस्ट ऑफिस

धीरज अग्रवाल छपरा हेड पोस्ट ऑफिस के समानांतर एक अपना कार्यालय चला रहा था। इसके घरों में सैकड़ों की संख्या में  पासबुक कागजात आदि देखने से पता चलता है कि घर पर ही कार्यालय  चल रहा था लोगों से पोस्ट ऑफिस में एफडी, एमआईएस, एनएससी, केव्हीपी, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम, सावधि जमा और आरडी के नाम पर पैसे लेता था इसे पोस्ट ऑफिस में जमा न कर, फर्जी पोस्ट ऑफिस में जमा कर उन्हें पासबुक दे देता था।

गरीबों के आंसू छलके

जैसे ही एजेंट धीरज के फरार होने की खबर पेट्रोल की तरह शहर में फैली सबसे पहले गरीबों के आंसू छलक पड़े क्योंकि उन्होंने पाई पाई करके अपने नौनिहालों की भविष्य संवारने के लिए रुपए इकट्ठा किए थे कोई ₹100 तो कोई ₹200 प्रतिदिन मजदूरी करके जमा करता था ऐसे में जिनकी मोटी रकम हो चुकी थी उनकी तो सांसे ही उखड़ गई. वह रो रो कर अपनी व्यथा कहने लगे. हालांकि अभी कोई भी कैमरा पर नहीं आना चाह रहा है धीरज के आने को लेकर आशान्वित है.

कई की हार्ट अटैक की नौबत तबीयत खराब 

एजेंट ने शहर के लगभग सभी वार्डों में अपने खाता धारक बना लिए थे .ऐसे में कई खाताधारक ऐसे भी सामने आ रहे हैं जिन्होंने 1000000 से लेकर ₹5000000 तक धीरज के माध्यम से या तो पोस्ट ऑफिस में जमा कराया है या फिर सूद पर कर्ज  दिया है, ऐसे खाताधारकों की तो हार्ट अटैक की नौबत आ चुकी है कई बीमार पड़ गए हैं.

सट्टा बाजार और लॉटरी में विशेष थी रुचि

एजेंट धीरज लॉटरी और सट्टेबाजी का बड़ा शौकीन था लोगों का कहना है कि वह आम खाता धारको का रुपया सत्यवादी या लॉटरी में लगा चुका है इसके अलावा जो रुपया बच्चा वह लेकर फरार हो गया है क्योंकि वह खाता खोलने के साथ ही निकासी फॉर्म पर भी लगे हाथ खाताधारक से हस्ताक्षर करा लेता था।

क्या कहते हैं सीनियर सुपरिटेंडेंट

देखिए इसमें सबसे अधिक गलती उपभोक्ताओं की है वे थोड़ी सी आलस की वजह से पोस्ट ऑफिस में नहीं आते और ना ही खुद जमा करते हैं और ना ही खुद निकालते हैं सारे काम एजेंट के भरोसे रखते हैं ऐसे में धोखा होना लाजमी है। मैंने काफी नकेल कसी है और कार्रवाई की जा रही है।

एसबी सिंह ,सीनियर सुपरिटेंडेंट, डाक विभाग, छपरा



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