23 अप्रैल का दिन मुकर्रर: सांसद अखिलेश सिंह केंद्रीय कृषि मंत्री की खोलेंगे पोल, तो राधामोहन सिंह ने भी उनकी बिरादरी के विधायक को किया आगे

23 अप्रैल का दिन मुकर्रर: सांसद अखिलेश सिंह केंद्रीय कृषि मंत्री की खोलेंगे पोल, तो राधामोहन सिंह ने भी उनकी बिरादरी के विधायक को किया आगे

PATNA: मोतिहारी के चुनावी रण में 23 अप्रैल का दिन काफी महत्वपूर्ण हो गया है. उस दिन पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष डा. अखिलेश प्रसाद सिंह मोतिहारी के बीजेपी उम्मीदवार सह केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह के कारनामों की पोल खोलेंगे. कांग्रेस नेता के इस एलान के बाद राधामोहन सिंह भी एक्टिव मोड में आ गए हैं. राधामोहन सिंह की तरफ से भी 23 अप्रैल को ही अखिलेश सिंह की पोल खोलने का दावा किया जा रहा है. राधामोहन ने इसके लिए अखिलेश सिंह की बिरादरी से आने वाले बीजेपी विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह को आगे किया है. 

दरअसल मोतिहारी के रण में राधामोहन सिंह के खिलाफ आरएलएसपी के टिकट पर कांग्रेस राज्य सभा सांसद अखिलेश सिंह के बेटे आकाश सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. बेटे के चुनाव प्रचार की कमान खुद अखिलेश सिंह थामे हुए हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश सिंह ने एलान कर दिया है कि वे 23 अप्रैल को केंद्रीय मंत्री सह स्थानीय सांसद राधामोहन सिंह की पोल खोलेंगे. अखिलेश सिंह ने दावा किया है कि राधामोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में बंद चीनी मिल की जमीन को बिकवाने में मदद की है. सांसद आदर्श ग्राम में करोड़ों की राशि खर्च की गई है लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्री उस गांव का भी विकास नहीं कर सके. अखिलेश सिंह ने राधामोहन सिंह पर आरोप लगाया है कि 10 साल में मोतिहारी का विकास करने की बजाए उन्होंने विनाश कर दिया. मोतीझील और चीनी मिल दो इसका बेहद खास उदाहरण है. अखिलेश ने दावा किया है कि वे पुख्ता प्रमाण के साथ आगामी 23 अप्रैल को मीडिया के सामने केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह की पोल खोलेंगे. 

राधामोहन ने सचिन्द्र सिंह को आगे किया

अखिलेश सिंह के इस एलान के बाद राधामोहन सिंह का खेमा भी सक्रिय हो गया है. राधामोहन सिंह ने जवाब देने के लिए अखिलेश सिंह की बिरादरी से आने वाले बीजेपी विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह को आगे किया है. सचिन्द्र सिंह ने दावा किया है कि वे भी 23 अप्रैल को 2004 से 2009 तक मोतिहारी से सांसद रहे अखिलेश प्रसाद सिंह की पोल खोलेंगे. बीजेपी विधायक ने दावा किया है कि उनके पास भी सबूत हैं और 23 अप्रैल को मीडिया के समक्ष जारी करेंगे. 

हर चुनाव में चीनी मिल का मुद्दा रहता है हावी

आपको बता दें कि मोतिहारी के चुनाव में हर बार बंद चीनी मिल को चालू कराने का मुद्दा हावी रहता है. इस बार जब स्थानीय सांसद देश के कृषि मंत्री के पद पर आसीन हुए तो लोगो में आस जगी कि कुछ न कुछ बेहतर होगा. लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा. चीनी मिल चालू कराने या कोई नई चीनी मिल स्थापित होने की बजाए स्थिति ऐसी हो गयी कि बंद चीनी मिल मजदूरों को अपने बकाए मजदूरी के लिए आत्मदाह तक करनी पड़ी और दो मजदूरों ने आत्मदाह कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. उधर बंद चीनी मिल की जमीन भी बिकते चली गई.




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