ललन के 'रंग' में रंगा गई रामचंद्र की सेना, RCP के खास नेता अब राष्ट्रीय अध्यक्ष की कर रहे परिक्रमा

ललन के 'रंग' में रंगा गई रामचंद्र की सेना, RCP के खास नेता अब राष्ट्रीय अध्यक्ष की कर रहे परिक्रमा

PATNA: जेडीयू के रामचंद्र दल में किनारे लगा दिये गए। रामचंद्र की सेना ने या तो सरेंडर बोल दिया या फिर दल से बाहर निकाल दिये गए। रामचंद्र प्रसाद सिंह के साथ अब गिनती के कार्यकर्ता ही बचे हैं। अधिकांश लोगों ने नेतृत्व के सामने सरेंडर कर दिया।  कभी आरसीपी सिंह के सेनापति माने जाने वाले नेता भी ललन सिंह के रंग में रंग गये. वैसे नेता अब सार्वजनिक तौर पर यह बताने में लगे हैं कि उनका अब आरसीपी सिंह से कोई वास्ता नहीं । पूर्व विधायक व कुछ समय पहले तक आरसीपी सिंह के बेहद करीबी अभय कुशवाहा पूरी तरह से राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के रंग में रंगे दिख रहे हैं।

ललन रंग में रंगे कुशवाहा

आरसीपी सिंह के सेनापति माने जाने वाले पूर्व विधायक अभय कुशवाहा ने रामचंद्र प्रसाद सिंह के धूर विरोधी ललन सिंह को शॉल से सम्मानित किया। इस दौरान दोनों नेता एक ही रंग गुलाबी कलर का कपड़ा पहने दिखे। अभय कुशवाहा ने बजाप्ता मिलन की तस्वीर को साझा किया है। तस्वीर में अभय कुशवाहा जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलकर काफी खुश नजर आ रहे। वहीं जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह कभी आरसीपी सिंह के सेनापति रहे अभय कुशवाहा के पीठ पर हाथ रख उन्हें ताकत देते दिख रहे।   

कभी रामचंद्र के काफी करीबी थे अभय कुशवाहा

आरसीपी सिंह के मोदी कैबिनेट में मंत्री बनने के बाद पूर्व विधायक अभय कुशवाहा उनके सबसे नजदीकी हो गये थे। पटना में आरसीपी सिंह के सम्मान समारोह के बहाने शक्ति प्रदर्शन का जिम्मा अभय कुशवाहा के कंधो पर ही था। कुशवाहा ने पूरे पटना में होर्डिंग-पोस्टर लगाये थे, जिसमें अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह की तस्वीर ही गायब कर दी थी। यहां तक की अभय कुशवाहा ने जेडीयू प्रदेश कार्यालय पर पोस्टर लगाकर नेतृत्व को खुली चुनौती दी थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह की तस्वीर नहीं होने के बाद आनन-फानन में प्रदेश अध्यक्ष ने होर्डिंग्स हटवाया था। तब कहा गया था कि जिन लोगों ने ऐसा काम किया है उन पर कार्रवाई होगी। सिर्फ इतना ही नहीं केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के बिहार भ्रमण के दौरान भी अभय कुशवाहा साये की तरह साथ रहते थे। नजदीकी इतनी थी कि केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह ने अपना पीएस बनाने के लिए नाम प्रस्तावित किया था। लेकिन विरोधियों ने अभय कुशवाहा की केस कुंडली भारत सरकार में भेज दिया। इस वजह से वे केंद्रीय मंत्री का पीएस नहीं बन सके। कुछ महीनों तक अभय कुशवाहा अपने रामचंद्र के साथ रहे लेकिन जैसे ही सीएम नीतीश ने आरसीपी सिंह को तीसरी दफे राज्यसभा भेजने से इंकार किया, इसके बाद समर्थक डर गये. फिर एक-एक कर सरेंडर कर दिया। 


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