बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग जल्द निकालेगा 2745 पदों पर वैकेंसी, तैयारियां शुरू

बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग जल्द निकालेगा 2745 पदों पर वैकेंसी, तैयारियां शुरू

पटना. बिहार की महागठबंधन सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री बनने के बाद गुरुवार को आलोक मेहता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने विभाग की कार्य योजना और प्राथमिकाएं के बारे में बताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि विभाग 2745 पदों पर जल्द ही वैंकेसी के लिए विज्ञापन निकालेगा। इसके लिए रोस्टर क्लियर करने का काम चल रहा है। संविदा आधारित इन पदों में विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के 103 पद, कानूनगों के 257 पद, विशेष सर्वेक्षण अमीन के 2018 पद, लिपिक के 145 पद और संविदा अमीन के 222 पद शामिल हैं। 

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की प्राथमिकताएं एवं कार्य योजना

1. बिहार में फिलहाल 20 जिलों में भूमि सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। इन 20 जिलों के 89 अंचलों के 4989 मौजों में इसी वर्ष के दिसंबर माह तक सर्वेक्षण का कार्य पूर्ण कर लिए जाने का प्रस्ताव है। अभी तक उक्त सभी मौजों में त्रि-सीमाना और ग्राम सीमा सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया गया है। 3716 मौजों में किस्तवार का कार्य भी पूरा हो चुका है, जबकि 1009 मौजों में खानापुरी का काम पूरा हो चुका है। इसमें से 693 मौजों में एलपीएम वितरण का काम भी पूरा कर लिया गया है। जिन 317 मौजों में अधिकार अभिलेख का प्रारूप प्रकाशन हो चुका है, उसमें से 135 मौजों में अंतिम अधिकार अभिलेख का प्रकाशन हो चुका है। 

2. हमारी योजना पूरे बिहार में भूमि सर्वेक्षण का काम पांच चरणों में संपन्न कर लेने का है। 20 जिले जहां भूमि सर्वेक्षण का काम जारी है, उसे 2 चरणों में बांटकरर अगस्त, 23 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य है। बाकि के 18 जिलों को 6, 7 और 5 जिलों के समूह में मार्च, 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 

3. विशेष सर्वेक्षण को समय पर पूरा करने के लिए 2745 पदों पर जल्द ही विज्ञापन निकालने की तैयारी है। रोस्टर क्लियर करने का काम चल रहा है। संविदा आधारित इन पदों में विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के 103 पद, कानूनगों के 257 पद, विशेष सर्वेक्षण अमीन के 2018 पद, लिपिक के 145 पद और संविदा अमीन के 222 पद शामिल हैं।

4. विभाग के अधिकारियों को यह पता लगाने का निदेश दिया गया है कि जिन जिलों में भूमि विवादों की संख्या अधिक है और जहां इससे संबंधित मुकदमों की संख्या भी काफी है, उस तरह के जिलों में भूमि सर्वेक्षण का काम प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। 

5. ऑनलाइन दाखिल खारिज का काम आम जनता से सीधे जुड़ा है। साधारण स्थिति में म्युटेशन के लिए 35 दिन और आपत्ति की स्थिति में 75 दिनों का समय लगता है। अभी इस काम में पहले आओ पहले पाओ का नियम लागू है। किन्तु आपत्ति लगने पर पूरा प्रोसेस रूक जाता है। हमने निर्णय लिया है कि आपत्ति वाले मामलों की अगल लिस्टिंग होगी ताकि आपत्ति की सूरत में सामान्य मामलों में विलंब नहीं हो।


6. राजस्व कर्मचारियों की तैनाती हल्कों में होती है। किन्तु आम लोगों की शिकायत है कि वो अपने हल्के में नहीं मिलते। उनका कार्यालय निश्चित नहीं है। इसके लिए हमने विभाग में स्पष्ट निर्देश दिया है कि हल्का कर्मचारी का कार्यालय स्पष्ट रूप से चिन्हित हो और लोगों की जानकारी में हो ताकि आम लोगों का भटकना ना पड़े।

7. निर्देश दिया है कि सारे राजस्व कर्मचारियों का लैपटाॅप/डेस्कटाॅप देने पर विचार किया जाए ताकि उनके काम में पारदर्शिता आए और ऑनलाइन म्युटेशन का काम जल्दी हो सके। इससे उनके अधिक आईटी फ्रेंडली बनाने में मदद मिलेगी और डाटा इंट्री ऑपरटरों पर उनकी निर्भरता भी कम होगी।

8. म्युटेशन में अनियमतता बरतने वाले या अनावश्यक विलंब करने वाले अंचल कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे संबंधित आदेश निर्गत करने का निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिया गया है।

9. अंचल अधिकारियों को यह भी निदेश दिया गया है कि जमाबंदी में सुधार की जो समय सीमा विभाग द्वारा निर्धारित की गई है, उसे हर हाल में पूरा कर लें अन्यथा विभागीय स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

10. हमारी सबसे पहली और अहम प्राथमिकता वास रहित गरीबों केा आवास देने और जिन्हें सरकारी भूमि का पर्चा दिया गया है, उस पर उनका कब्जा दिलाने का है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को 3 महीने में इस तरह के लोगों का सर्वे कराने का निर्देश दिया है। हमने यह भी कहा है कि वास भूमि रहित गरीब लोगों को सुविधा देने के लिए ऑनलाइन आवेदन देने की व्यवस्था की जाए।

11. जल जीवन हरियाली हमारी सरकार की महात्वाकांक्षी योजना है। किन्तु ऐसे लोगों का संख्या काफी है, जो जल स्रोतों के किनारे बसे हुए हैं। हमने स्पष्ट निर्देश दिया है कि ऐसे लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

12. राज्य के 534 अंचलों में से 270 में आधुनिक अभिलेखागार-सह-डाटा केन्द्र बनकर तैयार है। इसी महीने शुरू करने की योजना है। यहां से 16 तरह के राजस्व दस्तावेजों को मामूली शुल्क लेकर आम-जनता को देने की योजना है।

13. बिहार के गांव, कस्बों और मौजों का राजस्व मानचित्र अब ऑनलाइन मंगाया जा सकता है। इसकी भी तैयारी पूरी हो चुकी है। इसी महीने सेवा शुरू होगी। ऐसा करनेवाला बिहार देश का पहला राज्य होगा।

14. भू-सर्वेक्षण के बाद चकबंदी का काम किया जाएगा। चकबंदी के काम में आईआईटी रुडकी की मदद ली जाएगी। चक बिहार साॅफ्टवेयर विकसित किया गया है, इसके इस्तेमाल से चकबंदी के काम में मानवीय हस्तक्षेप काफी कम हो जाएगा। चकबंदी से सबंधित अभिलेखों और दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन और स्कैनिंग का काम भी जल्द शुरू हो जाएगा। इसके लिए एजेंसी का चयन कर लिया गया है। 

15. बिहार के दो लाख से अधिक नदी, नहर, पोखर, तालाब, आहर एवं पईन का विस्तृत एवं प्रामाणिक ब्यौरा जल्द ही आधिकारिक रूप से उपलब्ध हो जाएगा। भारत दुनिया में संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद दूसरा ऐसा देश है, जो अपने वाटर बाॅडीज का एटलस तैयार कर रहा है। भारत में भी यह काम सिर्फ बिहार सरकार द्वारा किया जा रहा है। 

16. मापी के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर संपन्न करने का निदेश अंचल अधिकारियों को दिया गया है। साथ ही विभाग द्वारा जल्द ही बिहार के जमीन मालिकों को ई-मापी की सौगात दिया जाएगा। ई-मापी में रैयत को मापी के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा दी जाएगी। अंचल कार्यालय जाकर आवेदन देने की जरूरत नहीं रहेगी। 

17. सभी भूमि सुधार उपसमाहर्ता को कहा गया है कि वो दाखिल-खारिज अपील वाद की सुनवाई को 2 बार से अधिक स्थगित नहीं करेंगे।

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