अंजली की मौत में छुपा है रुपेश की हत्या का राज! जांच होती तो सामने आ सकते थे कई बड़े नाम

अंजली की मौत में छुपा है रुपेश की हत्या का राज! जांच होती तो सामने आ सकते थे कई बड़े नाम

खगड़िया।  जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद पप्पू यादव ने कहा  कि बिहार में नमक से सस्ता खून अब हो गई हैं। इंडिगो एयरलाइन्स के मैनेजर रूपेश सिंह की हत्या के तार दरभंगा मधुबनी के बड़े नेता पर होने का आरोप लगाया है। उन्होने कहा कि पीएचईडी और बिजली विभाग के ठेकों में रूपेश सिंह भी थें। दरभंगा में नहर का ठेका जिस कंपनी को मिला उसमें भी रूपेश सिंह शामिल थें। इन्हीं वजह से बड़े  ठेकेदारों, नेताओं और अधिकारियों के इशारे पर रूपेश सिंह की हत्या करवाई गयी। इसकी पूरी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। 

रूपेश सिंह हत्याकांड के बारे में कहा कि यह हत्या हाईप्रोफाइल मामला है। रूपेश सिंह के मोबाइल से किस किस आई एस के पत्नी से चैटिंग हुआ है। रूपेश सिंह बिजली विभाग के करोड़ों के टेंडर किस सचिव के कहने पर संवेदक से पैसे का लेन देन किया। अंजलि ने  आत्महत्या कि  थी या  उसका हत्या हुआ था इसका खुलासा सरकार क्यों नहीं कर रही है।अंजलि को किस के खाने स्पेशल विमान से दिल्ली के एक मंहगे अस्पताल में इलाज कराया गया और ऊर्जा विभाग के दो इंजीनियरों का तैनाती अंजलि के देख रेख में लगाया गया। अंजलि का पोस्टमॉर्टम क्यों नहीं कराया गया कि उसकी मौत कैसे हुई। अगर अंजलि की मौत की जांच की जाए तो राज्य सरकार के कई सफेदपोश चेहरे सामने आ जाएंगे।

 उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया है कि अगर बिहार से अपराध को खत्म करना है तो शराब, जमीन और बालू से धन कमाने वालों की संपत्ति की जांच प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा हो। इन धंधों से जुड़े सभी तस्करों और माफिया को जेल भेजा जाए। बिहार में वर्तमान में जितनी बड़ी आपराधिक घटनाएं हो रही हैं उन सभी के पीछे इन्हीं लोगों का हाथ है। अपराधियों को नेताओं और सरकारी पदाधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। यादव ने कहा कि शराबबंदी से पहले बिहार सरकार को 4 हजार करोड़ की आय शराब से होती थी। अब इससे दोगुना नेताओं और अधिकारियों को मिल रहा है।

 सरकारी तंत्र के जुड़े लोग ही सरकार की नाक के नीचे से शराब तस्करों की मदद रहे हैं। यादव ने कहा कि कटिहार जिला पदाधिकारी मधेपुरा ,पूर्णिया सुपौल के 70  लोगों को आम्र्स का लाइसेंस निर्गत कर दिया, जिसमें अधिकांश अपराधी हैं।    इन सभी लोगों का मोबाइल प्रिंट आउट कर जांच किया जाय कि ये लोग कटिहार में कितने दिन रहे हैं ।  सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया के जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक उन लोगों को आम्र्स लाईसेंस देना जरूरी नहीं समझा जिन लोगों को कटिहार के जिला पदाधिकारी ने अस्थाई आवास दिखाकर  आर्म्स लाईसेंस दे दिया गया।



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