सबसे निचले तबके को नहीं मिल पा रहा इसका लाभ, आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

सबसे निचले तबके को नहीं मिल पा रहा इसका लाभ, आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

Desk : आरक्षण का फल एससी-एसटी के सबसे निचले स्तर के लोगों तक नहीं पहुंच रहा, क्या हमेशा पिछड़े रहना ही उनकी नियति हो गई है। आरक्षितों के वर्गों में विशेष वर्ग को प्राथमिकता देने के लिए सरकार को अधिकृत करने का फैसला देने वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने मामले को बड़ी पीठ को रेफर करते हुए यह टिप्पणी की है। 

पीठ की इस टिप्पणी से एससी-एसटी आरक्षण में ओबीसी की तरह से क्रीमी लेयर लागू होने का दरवाजा खुल सकता है। केंद्र सरकार क्रीमी लेयर का विरोध कर रही है और ये मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

पीठ की ओर से फैसला लिखते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा लाख टके का सवाल यह है कि आरक्षण का लाभ कैसे निचले तबके तक पहुंचाया जाए। रिपोर्ट बताती हैं कि आरक्षण का लाभ लगातार वही ले रहे हैं, जो ऊपर उठ चुके हैं और जो नौकरियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व हासिल कर चुके हैं। 

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि एससी-एसटी और सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची में बहुत से वर्ग गैरबराबरी पर हैं। अपने 78 पेज के फैसले में पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 338, 341, 342 और 342ए की व्यापक जनहित में व्याख्या करने का वक्त आ गया है। इनकी व्याख्या कर इंदिरा साहनी और अन्य फैसलों की बाध्यकारी नजीरों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। 

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