सुरक्षित बैंकिंग, खाताधारक का अधिकार लेकिन बिहार में बैंक फ्रॉडिंग साइबर ठगों का आसान शिकार

सुरक्षित बैंकिंग, खाताधारक का अधिकार लेकिन बिहार में बैंक फ्रॉडिंग साइबर ठगों का आसान शिकार

हाल ही में लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा थाना अंतर्गत जगदीशपुर निवासी रविन्द्र कुमार ने पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन देते बैंक में हुई धोखाधड़ी की जानकारी दी है। दरअसल रविन्द्र कुमार की पुत्री पूजा कुमारी के बैंक ऑफ इंडिया के सूर्यगढ़ा शाखा से बिना उनकी जानकारी के एक लाख अठानवे हजार रुपए की निकासी हो गई। पीड़ित ने बताया कि शाखा प्रबंधक की मिलीभगत से बगैर उनके आवेदन दिए ही उनके खाते से जुड़े मोबाइल नंबर को बदल दिया गया। मोबाइल नंबर बदलने के बाद ये खेल हुआ और खाताधारक को कुछ पता नहीं चला। दूसरी घटना पटना जिले के मराँची स्थित आईडीबीआई बैंक की है। जहाँ मालपुर पंचायत के एक वार्ड सदस्य के खाते से करीब एक लाख रुपए की निकासी बगैर उनके जानकारी के एटीएम से कर ली गई।जबकि खाताधारक को बैंक द्वारा एटीएम उपलब्ध भी नहीं करवाई गई थी।ऐसी घटनाएं आज आम हो गई हैं।

असुरक्षित होती जा रही है बैंकिंग: हम देख रहे हैं कि बैंकिंग प्रणाली में जालसाजी बढ़ती ही जा रही है।कब किसके खाते से जालसाज रुपए निकाल लें,कोई नहीं जानता।एक ओर सरकार और बैंक,बैंकिंग को आसान करने की बात करते हैं,जबकि दूसरी ओर लोग दिन ब दिन और परेशान होते जा रहे हैं।फर्जी फोन कॉल,नेट बैंकिंग,यूपीआई,बार कोड,पढ़े-लिखे और समझदार लोग भी धोखा खा जाते हैं। इतना ही नहीं,एटीएम मशीन से पैसे की निकासी भी अब कम खतरनाक नहीं रही।हाल के दिनों में एटीएम कार्ड की क्लोनिंग या फिर एटीएम मशीन से छेड़छाड़ कर रुपए निकाल लेने के कई मामले सामने आए हैं।हम देख रहे हैं कि हमारे आस-पड़ोस या जानने वालों में निश्चित रूप से कोई न कोई असुरक्षित बैंकिंग का शिकार हो चुका है।मतलब साफ है कि अब आम लोगों के लिए बैंकिंग सुरक्षित नहीं रहा और ये भी स्पष्ट कहा जा सकता है कि अब आपके रुपए बैंकों में सुरक्षित नहीं हैं।

कभी एटीएम ने दी थी खुशी पुराने जमाने की पारंपरिक बैंकिंग, जबकि लोग पैसा जमा करने और निकालने बैंक जाते थे,बैंकों में कम्प्यूटर नहीं होते थे। शाम चार बजे बैंकिंग सेवा समाप्त हो जाती थी। शाम चार बजे के बाद या किसी छुट्टी के दिन यदि किसी को पैसों की जरूरत होती तो लोग परेशान हो जाते और बैंक खुलने का इन्तेजार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता था। ऐसे में जब चौबीसों घंटे पैसे देने वाली मशीन, एटीएम आई तो लोगों की खुशी का ठिकाना न रहा। बड़े शहरों से होता हुआ एटीएम छोटे शहरों और गाँवों तक पहुंच गया।तब एटीएम वाला कमरा पूरी तरह वातानुकूलित होता था,भरपूर रोशनी,सीसीटीवी कैमरे और दरवाजे पर हर हमेशा सुरक्षा गार्ड का पहरा होता था।


अब एटीएम में नजर नहीं आते सुरक्षा गार्ड : वक्त के साथ वातानुकूलित कमरे सामान्य हो गए, खैर कोई बात नहीं, लेकिन अब तो चंद एटीएम मशीनों को छोड़ कहीं सुरक्षा गार्ड भी नजर नहीं आते। हमेशा पैसे देने वाली मशीन अब छोटे शहरों और गाँवों में रात और छुट्टी के दिन बंद पाया जाता है। कभी पैसे नहीं होते तो कभी लिंक फेल रहता है। कहना गलत न होगा कि आज एटीएम मशीन अपने उद्देश्यों में विफल होता जा रहा है। सुरक्षा गार्ड के अभाव में आज जालसाज घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। निःसन्देह यदि पूर्व की भाँति हर एटीएम मशीन के बाहर गार्ड होते तो एटीएम में होने वाली जालसाजी पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता था।

खातों को सुरक्षा प्रदान करें बैंक:फर्जी फोन कॉल, नेट बैंकिंग, यूपीआई,बार कोड आदि से होने वाली जालसाजी को रोकने के लिए बैंकों को सार्थक प्रयास करना चाहिए। ग्राहकों के पैसे बैंक में सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी पूरी तरह बैंकों की होनी चाहिए।बैंकिंग सिस्टम में जालसाजी की गुंजाइश नगण्य होनी चाहिए और इसके लिए बैंकों को अपना सुरक्षा तंत्र विकसित करना चाहिए,जो ग्राहकों के खातों को पूरी सुरक्षा प्रदान करे। बैंकों को ये समझना चाहिए कि उनका हर ग्राहक न तो जालसाजों की तरह स्मार्ट है और न ही हर ग्राहक स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करता है। सारे खाताधारक उच्च शिक्षित या साक्षर भी नहीं हैं। बैंकों को अपने ग्राहकों के पैसों की सुरक्षा की गारंटी देनी चाहिए। यदि जालसाज किसी भी प्रकार खाताधारक के खाते से पैसा निकाल लेता है तो इसकी जिम्मेदारी बैंक को लेनी चाहिए और खाताधारक को हुए नुकसान की भरपाई बगैर किसी परेशानी के होनी चाहिए। बैंकिंग प्रणाली में सुधार करते हुए ये व्यवस्था होनी चाहिए कि किसी भी खाते से जिस खाते में पैसा ट्रांसफर हुआ,उस खाताधारक का पूरा विवरण उपलब्ध होना चाहिए। बैंक में खाता खोलने के लिए खाताधारक की सख्ती के साथ छानबीन होनी चाहिए ताकि फर्जी तरीके से पैसे ट्रांसफर होने की स्थिति में खाताधारक की पहचान हो सके।

ग्राहकों के हितों की रक्षा,बैंकों का कर्त्तव्य : जालसाजी से बचने के लिए बैंकिंग प्रणाली में सुधार करना उतना भी कठिन नहीं है,जितना कि लोग जालसाजी के शिकार हो रहे हैं। अपने ग्राहकों के हितों की रक्षा करना बैंक और सरकार का कर्तव्य है। अपने पैसे की पूरी सुरक्षा हर खाताधारक का हक है। बैंकों में जालसाजी और फर्जीवाड़े को रोकने की जिम्मेदारी बैंक और सरकार की है। वक्त के साथ बैंक अपने ग्राहकों को आर्थिक लाभ कम दे रहे हैं,हर सुविधा के लिए उपभोक्ता से सुविधा शुल्क लेते हैं और ग्राहकों के साथ जालसाजी हो जाए तो सीधे पल्ला झाड़ लेते हैं। नुकसान हर हाल में खाताधारकों का ही होता है। जिन खाताधारकों के पैसों से बैंक चलते हैं,बैंक उन खाताधारकों की ही उपेक्षा कर रहे हैं। ये कहना कहीं से भी गलत नहीं होगा कि बैंकों में आज खाताधारकों के हितों की रक्षा नहीं हो रही। सरकार की मेहरबानी से बैंक आज अपने ग्राहकों के रक्त चूसने वाले दीमक बनते जा रहे हैं जो जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं।


(अनुभव सिंह/ यह लेखक के निजी विचार हैं.)


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