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बोले रामकृपाल यादव - नीतीश जी, आपने बिहार को क्या बना दिया, ना नेता, ना पुलिस, ना पत्रकार, ना व्यापारी, न सामान्य आदमी, यहां कोई सुरक्षित नहीं है

बोले रामकृपाल यादव - नीतीश जी, आपने बिहार को क्या बना दिया, ना नेता, ना पुलिस, ना पत्रकार, ना व्यापारी, न सामान्य आदमी, यहां कोई सुरक्षित नहीं है

PATNA : बिहार में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं, यहां कानून व्यवस्था पूरी तरह से खत्म हो हो चुकी है। आज न सिर्फ पटना, बल्कि पूरे बिहार में कहीं कोई ऐसा जिला नहीं बचा है, जहां रोज हत्या, लूट की घटनाएं नहीं होती हों। पूरा बिहार असुरक्षित है। जिस शहर में तीस दिन में तीस हत्याएं हो रही है। यह सब मुख्यमंत्री के नाक के नीचे हो रहा है। फिर वह कहते हैं कि बिहार में कानून व्यवस्था ठीक है। यह कहना है पाटलीपुत्र के सांसद रामकृपाल यादव का।

रामकृपाल यादव ने यहां लोगों को टारगेट कर मारा जा रहा  है। स्थिति यहां तक पहुच गया है कि लोग डर से घर से निकालना बंद कर चुके हैं। आज स्थिति यह है कि घर से बाहर निकलने के बाद सकुशल घर वापस लौटेंगे या नहीं, इस बात का डर लगा रहता है। कब कौन किसके घर में घुस जाएगा, यह कहना है मुश्किल है। रामकृपाल यादव ने कहा आज न तो सांसद, विधायक और न ही आम आदमी यहा सुरक्षित नहीं है। यहां केंद्रीय मंत्री को धमकी दी जाती है। एक जनप्रतिनिधि नीलेष मुखिया की हत्या कर दी गई। दारोगा, पत्रकार की हत्या कर दी गई। कोई भी यहां सुरक्षित नहीं है। रामकृपाल यादव ने यह भी कहा कि मेरी पूरी राजनीति में कभी ऐसा नहीं हुआ है। जितनी  बुरी हालत आज बना दी गई है।


सरकार के पास लोगों की सुरक्षा के लिए समय नहीं

पाटलीपुत्र सांसद ने कहा कि आजप पूरा बिहार की सरकार को प्रदेश की जनता के लिए समय नहीं है। पूरे दिन सिर्फ  मीटिंग और दूसरे कामों में मुख्यमंत्री व्यस्त  रहते हैं। सांसद ने कहा आज हर जगह गोली ही गोली चल रही है। भय का वातावरण पूरे बिहार में नजर आ रहा है। पूरा ध्यान लोकसभा चुनाव पर लगा हुआ है।

डोमिसाइल नीति खत्म करने सवाल

रामकृपाल यादव ने शिक्षक भर्ती के लिए जुटी भारी भीड़ को लेकर कि यह सरकार की गलत नीतियों के कारण है। पहले नीतीश बिहार के लिए सोचते थे। इसलिए यहां के युवाओं के लिए वह डोमिसाइल नीति लेकर आए। अब उन्हें प्रधानमंत्री बनना है, इसलिए उन्होंने यह नियम ही खत्म कर दिया। अब उन्हें बिहार के युवाओं की चिंता नहीं है। यहां तक कि जो माले हमेशा गरीबों और आम लोगों की बात करती थी, वह भी अब सत्ता का सुख भोगने में जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी भूल गई है।

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