समाजवादी शिक्षा मंत्री का चेहरा बेनकाब...घोर जातिवादी निकले 'चंद्रशेखर' ! चपरासी,अंगरक्षक से लेकर PA-PS तक स्वजातीय होना चाहिए, BJP अध्यक्ष बोले-जगदा बाबू ने ठीक ही कहा था

समाजवादी शिक्षा मंत्री का चेहरा बेनकाब...घोर जातिवादी निकले 'चंद्रशेखर' ! चपरासी,अंगरक्षक से लेकर PA-PS तक स्वजातीय होना चाहिए, BJP अध्यक्ष बोले-जगदा बाबू ने ठीक ही कहा था

PATNA: समाजवादी शिक्षा मंत्री चंद्रशेखऱ का असली चेहरा उजागर हो गया है।रामचरितमानस पर दिए गए विवादास्पद बयान पर देशभर में माहौल गरमाया हुआ है। शिक्षा मंत्री चंद्रशेखऱ ने रामचरित मानस को नफरत फैलाने वाला बताया. साथ ही ग्रंथ में दलितों शिक्षा के विरोध की बात कही. अपने आप को दलितों का सच्चा हितैषी करार देते हुए शिक्षा मंत्री ने 'मानस' पर गंभीर टिप्पणी कर दी। इसके बाद अब एक नया खुलासा हुआ है। वाकई में शिक्षा मंत्री चंद्रशेखऱ दलित हितैषी हैं ? इसकी जब पड़ताल की गई तो खुलासा हुआ कि समाजवाद का चोला ओढे चंद्रशेखर तो असली जातिवादी निकले। 

असली समाजवादी हैं चंद्रशेखर..चपरासी,अंगरक्षक से लेकर PA, PS तक स्वजातीय 

शिक्षा मंत्री के असली जातिवादी चेहरे पर से नकाब न्यूज4नेशन ने उठाया है. हमने आज खुलासा किया है कि जो चंद्रशेखर रामचरितमानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ और दलित विरोधी बता रहे, दरअसल शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर को दलितों से कोई मतलब नहीं. वे तो घोर जातिवादी हैं. अगर शिक्षा मंत्री चंद्रशेखऱ को दलितों पर भरोसा होता तो वे अपनी अगल-बगल रखने के लिए स्वजातीय अफसर नहीं ढूंढते...। शिक्षा मंत्री ने खोजकर अपनी जाति के PS-PA को रखा है. शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर का असली रूप सामने आने के बाद बिहार बीजेपी ने तंज कसा है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा है,''जगदा बाबू ने ठीक ही चंद्रशेखर जी को असली समाजवादी बताया है। मंत्री जी के चपरासी,अंगरक्षक से लेकर PA, PS और अफसर तक केवल उनकी ही जात के हैं। इससे बड़े समाजवादी सोच का उदाहरण और हो भी क्या सकता है?'

पीए-पीएस से लेकर बॉडीगार्ड तक चाहिए स्वजातीय और बात करेंगे दलितों की 

शिक्षा मंत्री की हकीकत जानें. ये कितने दलित प्रेमी हैं, इस खबर को जानकर आपको भी समझ में आ जायेगा. दरअसल, ये दलित हितैषी नहीं, दलितों को आगे बढ़ाने वाले नहीं बल्कि ये घोर जातिवादी हैं. मंत्री के रूप में चंद्रशेखऱ ने सरकारी आप्त सचिव और बाह्य आप्त सचिव को रखा है। मंत्री की अनुशंसा पर कैबिनेट सचिवालय पीएस व पीए की नियुक्ति का पत्र जारी करता है। दलितों की बात करने वाले शिक्षा मंत्री चंद्रशेखऱ का नकाब उस समय उतर गया जब अपनी जाति के बाह्य आप्त सचिव को रखा. कैबिनेट सचिवालय की तरफ से 25 अगस्त 2022 को आप्त सचिव (बाहरी) की अधिसूचना जारी की गई। अधिसूचना में बताया गया है कि शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर की अनुशंसा के आलोक में डॉक्टर कृष्णानंद यादव, पिता हरि नंदन यादव को 16 अगस्त 2022 के प्रभाव से मंत्री का आ्त सचिव (बाहरी) नियुक्त किया जाता है. इसके बाद 16 सितंबर 2022 को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के सरकारी आप्त सचिव (PS) को लेकर अधिसूचना जारी की. जिसमें कहा गया कि शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर की अनुशंसा के आलोक में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजीव कुमार सज्जन गृह जिला मधेपुरा को 14 सितंबर 2022 के प्रभाव से PS नियुक्त किया जाता है. ये भी उसी जाति (यादव) हैं. संजीव कुमार सज्जन मंत्री के गृह जिले मधेपुरा के हैं. इनके पिता का नाम जनेश्वर प्रसाद है. ये पहले पूर्णिया में A.SDO थे. चंद्रशेखऱ जब मंत्री बने तो अपनी जाति (यादव) के अफसर को खोजकर अपना पीएस बनाया. 

शिक्षा मंत्री पर एक्शन की मांग तेज 

शिक्षा मंत्री चंद्रशेखऱ के बयान पर न सिर्फ बीजेपी बल्कि सत्ताधारी जेडीयू ने भी गहरी नाराजगी जताई है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता उपेन्द्र कुशवाहा ने तो चंद्रशेखर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर दी है. नीतीश कैबिनेट में मंत्री अशोक चौधरी ने शिक्षा मंत्री के बयान पर नारजगी जताई है और बयान वापस लेने की मांग की है। इधर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा है कि हमारी पार्टी सभी धर्म ग्रंथों का सम्मान करती है. शिक्षा मंत्री के रामचरितमानस पर दिये गये बयान से राजद नेता भी सहमत नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा कि हम उनके बयान से सहमत नहीं हैं. 

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने भगवान राम की कथा बताने वाली रामचरितमानस ग्रंथ को नफरत फैलाने वाला करार दे दिया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि रामचरित मानस में दलितों की शिक्षा पर अलग प्रकार की बात कही गई है। रामचरित मानस की अपने तरीके से व्याख्या करते हुए शिक्षा मंत्री ने दलितों के शिक्षा का इसमें विरोध किए जाने की बात कही है। हालांकि, भगवान श्रीराम के मित्रों में प्रमुख निषाद राज के साथ शिक्षा ग्रहण करने के प्रसंग को शायद शिक्षा मंत्री भूल गए। जिस रामचरित मानस को शिक्षा मंत्री नफरत फैलाने वाला करार दे रहे हैं, उसी में भगवान राम के दरबार में निषाद राज की काबिलियत के आधार पर मंत्री बनाए जाने की बात कही है।

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