पटना के रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल में सेमिनार का हुआ आयोजन, अंगदान के महत्व पर हुई चर्चा

पटना के रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल में सेमिनार का हुआ आयोजन, अंगदान के महत्व पर हुई चर्चा

PATNA : विश्व अंगदान दिवस के मौके पर पटना के रूबन मेमोरियल हॉस्पिटल में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रुप में रेनू देवी और सोनिया देवी जिन्होंने अपने बेटे को किडनी दान देकर नई जिंदगी दी तथा मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉक्टर अनिल कुमार सिंह,विभागाध्यक्ष नेफ्रोलॉजी डॉ पंकज हंस, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ विपिन कुमार, यूरोलॉजिस्ट डॉ वैभव विकास, डॉक्टर अनीश कुमार, डॉ वैभव राज, डॉक्टर उत्कर्ष भारद्वाज और डॉक्टर जमशेद अनवर शामिल हुए। 


इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि विश्व में लगभग 10% लोगों को किडनी की बीमारी है। भारत में अलग-अलग अध्ययनों में पाया गया है की 6.4% से लेकर 17.4% लोगों में CKD की बीमारी पाई गई है। किडनी के बीमारी का पांच अवस्था होता है। स्टेज 5 मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण अथवा डायलिसिस की जरूरत होती है। भारत में प्रतिवर्ष 2 से ढाई लाख मरीजों को डायलिसिस एवं गुर्दा प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। अधिकतम 15% से 20% लोग ही इस इलाज को करा पाते हैं। ISOT के डाटा के अनुसार हाल के वर्षों में लगभग 8 से 10 हज़ार लोग भारत में गुर्दा प्रत्यारोपण करा रहे हैं। इनमें बिहार के भी 3 गुर्दा प्रत्यारोपण सेंटर शामिल हैं। बिहार में सर्वप्रथम सफल गुर्दा प्रत्यारोपण रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल में 2008 में हुआ था। 

भारत में मुख्यता परिवार के सदस्य या अन्य सगे संबंधी अपनी किडनी डोनेट करते हैं। जबकि अमेरिका, इंग्लैंड और अन्य विकसित देशों में गुर्दा प्रत्यारोपण ज्यादा होता है। आज के समारोह का मुख्य उद्देश्य आम जनता को ऑर्गन डोनेशन संबंधी जानकारी देना एवं भ्रांतियां दूर करना है। उन्होंने कहा की पूर्व में किडनी की खरीद बिक्री भी होती थी। जिसे रोकने के लिए कानून बनाया गया। इसके तहत अब NOTTO एवं SOTTO बनाए गए हैं। बिहार का SOTTO सेंटर आईजीआईएमएस और NOTTO नोटों सेंटर आईपीजीएमईआर कोलकाता में है। NOTTO,SOTTO के मार्गदर्शन में गुर्दा प्रत्यारोपण को बढ़ावा दिया जाता है। एक डोनर कई लोगों की जिंदगी दे सकता है। जब तक गुर्दा प्रत्यर्पण को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। तब तक ओर्गंस की कमी दूर नहीं की जा सकती। इस कार्य में सरकार, उच्च पदाधिकारी, समाज सेवक, प्रेस एवं मीडिया कर्मी की भूमिका भी कम नहीं है।

वंदना शर्मा की रिपोर्ट

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