क्या आप जानते हैं, सितंबर के महीने में क्यों बढ़ जाते हैं प्याज के दाम और नवंबर में आसमान छूती हैं कीमतें

क्या आप जानते हैं, सितंबर के महीने में क्यों बढ़ जाते हैं प्याज के दाम और नवंबर में आसमान छूती हैं कीमतें

DESK: प्याज की कीमतें  फिर बढ़ने लगी हैं. हर साल इसी समय प्याज की कीमतों में तेजी आने लगती है. हालांकि उसकी वजहें भी होती हैं. फिर ये कीमतें नवंबर में आसमान छूने लगती है.  तब इसकी कीमतों को लेकर हाहाकार मचने लगता है. फिलहाल प्याज की कीमत बाजार में 50-60 रुपए किलो तक हो गई है. चूंकि इस सीजन में हर साल ही ऐसा होता है, लिहाजा सरकार ने सतर्कता दिखाते हुए देश से किसी भी तरह की प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगा दी. वैसे ये सवाल लाजिमी है कि आखिर हर साल इस सीजन में प्याज क्यों महंगा होने लगता है.

प्याज का मसला ऐसा है कि सरकारें तक चिंताग्रस्त हो जाती हैं. अक्सर प्याज की कीमतें राजनीतिक मुद्दा बन जाती हैं. लिहाजा सरकार तक कोशिश में रहती है कि उनकी कीमतों को काबू में रखा जाए. इस बार मोटे तौर पर प्याज की कीमतों में बढोतरी का रिश्ता जुलाई-अगस्त में प्याज उत्पादन वाले राज्यों में हुई भारी बारिश और फसल खराब हो जाने है.

वैसे आपको यहां ये भी बता दें कि देशभर में जिस तरह से प्याज पैदा होती है, उसमें इसकी फसल लगातार ही बाजार में उपलब्ध होती रहती है. सितंबर में अक्सर इसकी फसल पर सूखे या बारिश की मार का असर नजर के साथ आवक पर प्रभाव नजर आता है.

कंट्रोल नहीं हो पातीं कीमतें

हर साल प्याज की कीमतें बढ़ने से रोकने के उपाय किए जाते हैं. प्याज के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया जाता है, प्याज के स्टॉक पर रोक लग जाती है, सरकारी एजेंसियां सस्ते दामों पर प्याज की बिक्री शुरू कर देती है. लेकिन इसके बावजूद प्याज आम जनता का रुलाता रहता है. कुछ इस बार भी ऐसा ही होता लग रहा है.

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