आखिर क्यों मिला सन ऑफ़ मल्लाह को बीजेपी के तरफ़ से 10 सीटों की सौगात ? जानिए इसके पीछे की वजह

आखिर क्यों मिला सन ऑफ़ मल्लाह को बीजेपी के तरफ़ से 10 सीटों की सौगात ? जानिए इसके पीछे की वजह

DESK बिहार में चुनावी माहौल और इसके दाव- पेंच आम आदमी के समझ से बहार है. भाजपा में ने बिहार विधानसभा चुनाव में 11 सीटें मुकेश सहनी की पार्टी VIP को दे दी है. इसके पीछे कि वजह क्या है ये तो आने वाला समय ही बताएगा . खुद को सन ऑफ़ मल्लाह कहने वाली मुकेश सहनी के पार्टी को आखिर किस वजह से बीजेपी इतनी अहमियत देती नजर आ रही है.

बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के बारे में माना जा रहा है कि वह अपने दम पर ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सहयोगी जनता दल यूनाइडेट  से ज्यादा सीटे जीत लेगी. गठबंधन में एक ओर जहां जदयू 115 सीटों पर इलेक्शन लड़ रही है तो वहीं भाजपा 110 सीटों पर मैदान में है. बिहार में भाजपा के इस राजनीतिक बदलाव की वजह को वीआईपी पार्टी के मतदाताओं के साथ आने को माना जा रहा है. 

दरभंगा के मुकेश सहनी  की अगुआई में दो साल पहले गठित हुए राजनीतिक दल- वीआईपी के साथ भाजपा का गठबंधन है. सहनी खुद राजनीति में साल 2013 से है. मल्लाह जाति की अगुआई करने वाले सहनी, आधिकारिक तौर पर खुद को  'सन ऑफ मल्लाह' यानी मल्लाह का बेटा कहते हैं. वीआईपी उत्तर बिहार में नाविकों और मछुआरों के समूह के मतों में बड़ी हिस्सेदारी का दावा करती है. शायद यह एक बड़ा एंगल हो सकता है कि बीजेपी सहनी के पार्टी को इतनी अहमियत डे रही है.

VIP 10 सीटों पर बीजेपी का सियासत 

भाजपा के बिहार प्रभारी देवेन्द्र  फड़नवीस के सूत्रों से पता चला है- बीजेपी वीआईपी को बिहार में एक अहम रूप में देखती है. बिहार में ना ही केवल मल्लाहों कि संख्या ज्यादा है बल्कि अन्य अत्यंत पिछड़े वर्गों कि संख्या भी काफी अधिक है. बीजेपी का कहना है कि ऐसे वर्गों के बीच मुकेश सहनी और उनके पार्टी का प्रभाव काफी ज्यादा है और इन्हें उनसे फायदा मिल सकता है. उत्तर बिहार के ग्रामीण इलाकों में मल्लाह एक मुखर जाती के रूप में जानी जाती है. राजनितिक रो से अप्रमाणित समुदाय खुद को मल्लाह नेता से जोड़ कर रख सकती है और आने वाले वक़्त में बीजेपी को इसका फायदा मिल सकता है. सूत्रों का कहना है कि बीजेपी का वीआईपी के साथ गठबंधन एक राजनीतिक संदेश भेजने और बिहार में अपने सामाजिक आधार का विस्तार करना है. राज्य में भाजपा पारंपरिक रूप से उच्च जाति के राजनीतिक दल के रूप में जानी जाती है. अमित शाह के अगुआई में, पार्टी ईबीसी में पैठ बना कर सामाजिक आधार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है.


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