सोनू सूद अब नहीं रहे आइकॉन, चुनाव आयोग ने पंजाब में दी थी बड़ी जिम्मेदारी, लेकिन अब हटाया, यह बताया गया कारण

सोनू सूद अब नहीं रहे आइकॉन, चुनाव आयोग ने पंजाब में दी थी बड़ी जिम्मेदारी, लेकिन अब हटाया, यह बताया गया कारण

DESK : कोरोना के तीसरे फेज में संक्रमितों की संख्या बढ़ने के साथ सोनू सूद एक बार फिर से उनकी  सहायता के लिए एक्टिव हो गए हैं. लेकिन इन सबके बीच उन्हें चुनाव आयोग ने बड़ा झटका दिया है। चुनाव आयोग ने सोनू सूद को वोटिंग आइकॉन की जिम्मेदारी से अलग से कर दिया है। चुनाव आयोग ने सोनू सूद को मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए पंजाब का स्टेट आईकॉन नियुक्त किया था। पंजाब के मुख्य चुनाव अफसर डॉ. एस. करुणा राजू ने कहा कि 4 जनवरी 2022 के बाद वह इस नियुक्ति पर नहीं हैं।

बहन के कारण हुआ ऐसा

सून सूद को वोटिंग आइकॉन की जिम्मेदारी से हटाने का मुख्य कारण उनकी बहन मालविका को बताया जा रहा है। सोनू सूद की बहन मालविका सूद सच्चर इस बार चुनाव लड़ने वाली हैं। इसकी घोषणा सोनू सूद ने ही मोगा में की थी। मालविका मोगा से चुनाव लड़ेंगी। हालांकि वह किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं लेकिन राजनीति में आने की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने यह कदम उठाया है।

बहन के लिए प्रचार कर रहे हैं सोनू सूद

सोनू सूद खुद तो सक्रिय सियासत में नहीं आ रहे लेकिन बहन मालविका के लिए लगातार प्रचार कर रहे हैं। वह बहन के लिए वोट भी मांग रहे हैं। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि सूद की बहन जल्द कोई राजनीतिक पार्टी जॉइन कर सकती हैं।  

खुद भी राजनीति में आने  की तलाश रहे हैं संभावना

सोनू सूद न सिर्फ बहन के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं, बल्कि खुद भी वह अपने लिए चुनावी जमीन की तलाश में लगे हुए हैं।  इस संबंध में पहले वह दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल से मिले। फिर उन्होंने चंडीगढ़ में पंजाब की कांग्रेस सरकार के CM चरणजीत चन्नी से मुलाकात की। फिर वह अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल से मिले। इससे पहले वह CM रहते कैप्टन अमरिंदर सिंह से मिल चुके हैं। इस वजह से चुनाव आयोग को सोनू सूद से पल्ला झाड़ना पड़ा।


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