सियासत के निराले खेल ! चंद्रशेखर के शिक्षा मंत्री रहते जारी हुए थे जो आदेश अब उसी के खिलाफ विरोध में उतरे, किया प्रदर्शन

सियासत के निराले खेल ! चंद्रशेखर के शिक्षा मंत्री रहते जारी

पटना. बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को राजद और वाम दलों के विधायकों ने शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोला. सदन की कार्यवाही शुरू होने के पहले कई विधायकों ने एक साथ बैनर लेकर शिक्षा विभाग से जुड़े कई फैसलों का विरोध किया. शिक्षकों की कई मांगों को आगे रखकर शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक का भी जोरदार विरोध किया. केके पाठक का विरोध करने वालों में राज्य के पुव शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर भी शामिल रहे. उन्होंने केके पाठक के उस फरमान का विरोध किया जिसमें हाल ही में नियुक्त शिक्षकों को सन्गठन बनाने पर रोक लगाई गई है. संयोग से जिस समय यह फैसला लिया गया था उस समय चंद्रशेखर ही शिक्षा मंत्री थे. उस दौरान भले ही चंद्रशेखर ने पाठक के उस फरमान पर चुप्पी साध ली हो लेकिन अब उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक बताया है. 

राजद और वाम दलों के विधायकों ने 'शिक्षकों को ऐच्छिक स्थानांतरण का अधिकार दो, शिक्षा का निजीकरण बंद करो, शिक्षा में आउटसोर्सिंग बंद करो, संगठन बनाने पर रोक का अलोकतांत्रिक फैसला वापस लो' का बैनर लहराते हुए अपना विरोध जताया. उन्होंने शिक्षा विभाग पर मनमाने तरीके से आदेश लागू करने की बात कही. साथ ही इससे शिक्षकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया. 

विरोध जताने वालों में चंद्रशेखर ने केके पाठक को तुगलकी फरमान देने वाला बताया. हालांकि जब केके पाठक ने शिक्षकों से जुड़े कई आदेश जारी किए थे तब चंद्रशेखर ही शिक्षा मंत्री हुआ करते थे. उस दौरान उनके और पाठक के बीच कई बार तीखी नोक झोंक हुई थी. यहां तक कि पीत पत्र भी जारी हुआ था. इन सबके बीच केके पाठक के सख्त आदेशों के बाद चंद्रशेखर ने विभाग भी जाना बंद कर दिया था. अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद केके पाठक और शिक्षा विभाग के आदेशों को तुगलकी बताकर राजद और वाम दलों के सदस्यों ने प्रदर्शन किया.