आज जेल से 15 दिन के पेरोल पर रिहा होंगे कद्दावर नेता आनंद मोहन, डीएम की हत्या के आरोप में हुई थी सजा

आज जेल से 15 दिन के पेरोल पर रिहा होंगे कद्दावर नेता आनंद मोहन, डीएम की हत्या के आरोप में हुई थी सजा

 SAHARSA : डीएम जी कृष्णैया की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में पिछले 15 साल के सहरसा जेल में  बंद पूर्व सांसद व कद्दावर नेता आनंद मोहन 15 दिन के पेरोल पर आज रिहा हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें यह पेरोल एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के दी गई है।आज लगभग 12 बजे के करीब वह जेल से बाहर आ जाएंगे।  हालांकि आनंद मोहन की उम्र कैद की सजा पूरी हो गई है और  इसके अलावा आचार संहिता उल्लंघन के 31 साल पुराने मामले में भी वह पहले ही बरी हो चुके हैं।

क्या है डीएम जी. कृष्णैया हत्याकांड?

 दरअसल, मुजफ्फरपुर जिले में 5 दिसंबर 1994 को जिस भीड़ ने गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी कृष्णैया की पीट-पीट कर हत्या की थी, उसका नेतृत्व आनंद मोहन कर रहे थे. एक दिन पहले (4 दिसंबर 1994) मुजफ्फरपुर में आनंद मोहन की पार्टी (बिहार पीपुल्स पार्टी) के नेता रहे छोटन शुक्ला की हत्या हुई थी. इस भीड़ में शामिल लोग छोटन शुक्ला के शव के साथ प्रदर्शन कर रहे थे

मॉब लिचिंग के शिकार हुए थे डीएम 

बताया जाता है कि तभी मुजफ्फरपुर के रास्ते हाजीपुर में मीटिंग कर गोपालगंज वापस जा रहे डीएम जी. कृष्णैया पर भीड़ ने खबड़ा गांव के पास हमला कर दिया। मॉब लिंचिंग और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बीच डीएम को गोली मार दी गई. इस घटना उन दिनों काफी सुर्खियों में रहा था. हादसे के समय जी. कृष्णैया की आयु 35 साल के करीब था।

देश में पहली बार किसी सांसद को हुई थी सजा

इस मामले में आनंद मोहन को जेल गये थे. निचली अदालत ने 2007 में उन्हें मौत की सजा सुना दी. बताया जाता है कि आनंद मोहन देश के पहले पूर्व सांसद और पूर्व विधायक हुए, जिन्हें मौत की सजा मिली थी. हालांकि, दिसंबर 2008 में पटना हाईकोर्ट ने उनके मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी जुलाई 2012 में पटना हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. डीएम हत्याकांड में वे सजा पहले ही पूरी कर चुके हैं।


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