सुशील मोदी की इन तस्वीरों को देखिए...लालू-राबड़ी राज में जल जमाव जिसके लिए एक राजनीतिक हथियार था, आज उसी के पेंच में ऐसे फंसे की निकले तो भी डूब गए!

सुशील मोदी की इन तस्वीरों को देखिए...लालू-राबड़ी राज में जल जमाव जिसके लिए एक राजनीतिक हथियार था, आज उसी के पेंच में ऐसे फंसे की निकले तो भी डूब गए!

PATNA: राजधानी पटना में जलजमाव पर जनआंदोलन करते-करते सुशील मोदी विधायक से डिप्टी सीएम बन गए। जिस मुद्दे को न जाने कितनी दफा राजनीतिक मौका बना दिया,न जाने कितनी दफा धरना-प्रदर्शन और भूख हड़ताल किया, पता नहीं कितनी दफा सड़क पर धान की रोपनी की,न जाने कितनी बार सरकार को कटघरे में खड़ा किया, न जानें कितनी दफा जन आंदोलन करने का स्वांग रचा,न जाने कितनी दफा संवेदनशील होने का नौटंकी किया, यही सब करते-करते वह वक्त भी आया जब जनता ने सुशील मोदी को सरकार बना दिया। तब लोगों में एक आस जगी कि राजधानी में जलजमाव के जन आंदोलन से निकला एक नेता,जिसे हमलोगों ने सरकार बनाया है वह हमारे दरकार को,हमारे दर्द को जरूर समझेगा....। ऐसा लगने लगा कि जलजमाव के खिलाफ आंदोलन कर नेता बने सुशील की सरकार बन जाने से अब राजधानी के और एशिया के सबसे बड़े कॉलनी को बाढ़नुमा जलजमाव का दंश नहीं झेलना होगा।लेकिन अफसोस जिस जलजमाव को राजनीतिक हथियार बना कर सरकार पर मोदी वार किया करते थे उसी के पेंच में ऐसा फंसे कि तीन दिनों तक अपने हीं घर में एक उप मुख्यमंत्री को जल कैदी हो जाना पड़ा।

जरा विडंबना देखिए... पब्लिक की राजनीति करते-करते उप मुख्यमंत्री बने मोदी को तीन दिनों की जल कैद के बाद पटना के डीएम के नेतृत्व में रेस्क्यू किया गया तो वे पब्लिक से मुंह चुरा रहे थे। मुंह पर ताले लगे थे,हलक सूख रहा था,चेहरा शर्म से पानी-पानी था,हाफ पैंट और टीशर्ट में बेदम बाढ़ पीड़ित की तरह किसी तरह से सुरक्षित ठिकाने पर जाने की जल्दी दिख रही थी। जलजमाव को जन आँदोलन बनाकर जनता के कंधे पर बैठ कर सरकार की कुर्सी पर जा पहुंचने वाले अपने नेता की यह तस्वीर देखकर लोगों की आंखें फटी की फटी रह गई। लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि मोदी की राजनीति का फलसफा यही है जो सबलोग किया करते हैं। पक्ष और विपक्ष के अंतर की कलई खुल रही थी और मोदी के पूरे राजनीतिक जीवन का इकबाल बाढ़ के गंदे पानी में बिखर रहा था।

अब लाख सफाई दें, संवेदनहीनता का सच सबने देख लिया है।सरकार की संवेदनहीनता जब पराकाष्ठा पर जाती है और लालफीताशाही चमचागिरी में व्यस्त रहता है तब पटना जैसा शहर नरक बन जाता है,और नगर आयुक्त कह उठता है कि जलनिकासी की कवायद जारी है ,कबतक होगा हम नहीं बता सकते.....।

आधा शहर नरक में तब्दील हो चुका है,कहीं गाय कहीं कुत्ता तो कहीं इंसान के बच्चे की लाश तैर रही है और उसी में डूबा सुशासन घड़ियाली आसूं बहाते हुए लोगों से धैर्य रखने की अपील कर रहा है।प्राकृतिक आपदा बताकर पल्ला झाडने की कोशिश में जुटी सरकार जिस तरीके से राहत देने का प्रयास कर रही है उसे लोग स्वांग बता रहे हैं।किसी दार्शनिक ने कहा था राजनीति में संवेदनशील होना फायदेमंद नहीं बल्कि उसकी नौटंकी करना सियासत की चमक को दूगना कर देता है।

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