फुंके 'कारतूस' को BJP में शामिल कराने के लिए डिप्टी CM नहीं हुए तैयार ! डेढ़ घंटे तक तारकिशोर प्रसाद का होता रहा इंतजार,फिर....

फुंके 'कारतूस' को BJP में शामिल कराने के लिए डिप्टी CM नहीं हुए तैयार ! डेढ़ घंटे तक तारकिशोर प्रसाद का होता रहा इंतजार,फिर....

PATNA: फुंके कारतूस को बीजेपी नेतृत्व ने आखिरकार दल में शामिल करा ही लिया। बिहार विस चुनाव 2020 में जमानत जब्त करा चुके पूर्व एमपी को भाजपा में शामिल कराने के लिए नेतृत्व ने अपने डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद को लगाया था। बजाप्ता इसकी जानकारी नेतृत्व की तरफ से दी गई थी। प्रदेश कार्यालय में डिप्टी सीएम का डेढ़ घंटे तक इंतजार होते रहा। लेकिन वो नहीं आये। बताया गया कि वे दूसरे कार्यक्रम में व्यस्त हैं। तारकिशोर प्रसाद जब नहीं आये तो आखिरकार खनन मंत्री जनक राम ने पूर्व सांसद वीरेन्द्र चौधरी को भाजपा में शामिल कराया।

फिर मंत्री-महामंत्री ने दल में कराया शामिल

भाजपा नेतृत्व ने 9 महीने पहले आरएलएसपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरकर भाजपा प्रत्याशी को शिकस्त देने के जुर्म में पूर्व सांसद वीरेन्द्र चौधरी को 6 सालों के लिए निष्कासित किया था। अब उस नेता का सारा जुर्म खत्म हो गया लिहाजा आज बीजेपी नेतृत्व ने झंझारपुर के पूर्व सांसद वीरेन्द्र चौधरी को अपना लिया। प्रदेश कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में भले ही डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद नहीं आये हों लेकिन मंत्री जनक राम,महामंत्री देवेश कुमार, उपाध्यक्ष सिद्धार्थ शंभू व कई अन्य नेता मौजूद रहे। डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद के बीजेपी के कार्यक्रम में नहीं शामिल होने पर बीजेपी नेताओं ने कहा कि वे दूसरे कार्यक्रम में व्यस्त हैं। इसी वजह से वे पार्टी कार्यालय में आयोजित मिलन समारोह में शिरकत नहीं कर सके। 

 जानें कौन हैं पूर्व सांसद वीरेन्द्र चौधरी

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी नेतृत्व ने झंझारपुर लोकसभा सीट जेडीयू के खाते में डाल दिया था। इस वजह से भाजपा के सीटिंग सांसद वीरेन्द्र कुमार चौधरी बेटिकट हो गये थे. वीरेन्द्र चौधरी 2014-2019 तक भाजपा के टिकट पर झंझारपुर से सांसद थे। 2020 विस चुनाव में पूर्व सांसद वीरेन्द्र चौधरी उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा में शामिल हो झंझारपुर विस क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतर गये. इस सीट पर भाजपा के कद्दावर नेता व प्रदेश उपाध्यक्ष नीतीश मिश्रा उम्मीदवार थे। पूर्व सांसद ने बीजेपी के कैंडिडेट के खिलाफ जमकर पसीना बहाया। वीरेन्द्र चौधरी विस चुनाव में वंशवाद के खिलाफ लोगों से वोट देने की अपील करते थे। नीतीश मिश्रा के वोट काटने को लेकर इन्होंने पूरी कोशिश की थी। हालांकि इसमें वे सफल नहीं हो सके। विस चुनाव में पूर्व सांसद वीरेन्द्र चौधरी को महज 3200 वोटों से संतोष करना पड़ा था। इस तरह से पूर्व सांसद का झंझारपुर में जमानत जब्त हो गया । बीजेपी नेतृत्व ने आरएलएसपी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे वीरेन्द्र चौधरी को 6 सालों के लिए निष्कासित कर दिया था। लेकिन यह निष्कासन साल भर भी नहीं रह सका। 


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