खिलौने में भ्रष्टाचार के खेल को रफा-दफा करने में जुटा शिक्षा विभाग, गबन के खेल में शामिल ही कर रहे जांच

खिलौने में भ्रष्टाचार के खेल को रफा-दफा करने में जुटा शिक्षा विभाग, गबन के खेल में शामिल ही कर रहे जांच

MOTIHARI: मोतिहारी शिक्षा विभाग स्कूल में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के लिए दिए जाने वाले खिलौना व सामग्री की गड़बड़ी की जांच गबन के खेल में शामिल कर्मी को ही दे दिया। एक सप्ताह से अधिक मामला संज्ञान में आने के बाद भी जांच टीम द्वारा मात्र 10 विद्यालय का ही जांच किया गया। सूत्रों की माने तो शिक्षा विभाग इस मामले को रफा दफा करने में जुटी है। डीपीओ एसएसए कार्यालय के दो सप्लायर स्कूलों में कम समान को पूरा करने में जुटे है।

आखिर जिस स्कूल में आंगनबाड़ी केंद्र चलते ही नहीं है, उस स्कूल में 30 -30 हज़ार की राशि किसके इशारे पर भेजी गई? बिना सीडीपीओ के जानकारी के सामान की खरीदारी कैसे की गई? आखिर किसके दबाव में शिक्षा समिति के खाते से चेक सप्लायर के नाम से काट दिया गया? स्कूल एचएम पर दबाव बनाने वाले दबंग दो सप्लायर कौन है? जिसके इशारे पर कार्यालय का कार्य चलता है? इस खिलौना के खेल में डीपीओ कार्यालय से लेकर बीआरसी कार्यालय तक जुड़े है ।आखिर जिस विद्यालय में आंगनबाड़ी केंद्र चलते थे उस विद्यालय में राशि नही भेजकर केंद्र नही चलने वाले विद्यालय में किसके इशारे पर राशि भेजी गई ।सूत्रों की माने तो जिला के 89 विद्यालयों में आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के खिलौना, अलमारी, दीवार लेखन के लिए भेजी गई ।लेकिन सूची में अंकित अधिकांश विद्यालय में आंगनबाड़ी केंद्र चलता ही नही है ।जिला के कोटवा ,पहाडपुर, चकिया ,अरेराज सहित प्रखंडो के सीडीपीओ कार्यालय के अनुसार शिक्षा विभाग द्वारा नहीं इसकी जानकारी दी गई नही अधिकांश विद्यालय में आंगनबाड़ी केंद्र चलते है।

क्या है गबन का यह पूरा मामला

सरकार द्वारा स्कूल में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के सशक्तिकरण व खुशनुमा माहौल बनाने के लिए जिला के चयनित 89 विद्यालयों में 30-30 हज़ार रुपया देना था ।शिक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मी मिलकर बच्चों के खिलौने ही हड़प गए ।डीपीओ एसएसए कार्यालय द्वारा सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना में पलीता लगाते हुए उस विद्यालय को पैसा भेजा गया जिसमें आंगनबाड़ी केंद्र चलते ही नहीं है ।वहीं उक्त कार्यालय के दो माफियाओं द्वारा स्कूल में राशि भेजकर बीआरसी के मिलीभगत समान खरीदारी के नाम पर चेक लेकर राशि का बंदरबाट कर लिया गया। आखिर जिस स्कूल में आंगनबाड़ी केंद्र चलते ही नही थे, वहां राशि भेजने का क्या मतलब था? सरकार द्वारा जारी पत्र के अनुसार सरकारी स्कूल में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के सशक्तिकरण व खुशनुमा माहौल बनाने के लिए जिला को लगभग 27 लाख की राशि दी गई ।सीडीपीओ कार्यालय से सम्पर्क कर एचएम को आवश्यकतानुसार खिलौना ,अलमीरा, दीवार लेखन सहित कार्य पर राशि का खर्च करना था ।लेकिन शिक्षा विभाग व एचएम ने बिना सीडीपीओ को जनकारी दिए ही आंगनबाड़ी नही चलने वाले स्कूल में राशि भेजकर उसका बंदरबाट कर लिया गया ।

मीडिया की चमक पड़ते ही लीपापोती शुरू

अब जब मीडिया में खबर आयी तो विभाग लीपापोती में जुटा है ।डीपीओ कार्यालय ने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है ।जांच टीम में भी उसी को शामिल किया गया है, जो इस खेल के मास्टरमाइंड है ।मामला संज्ञान में आने के दस दिनों बाद भी अबतक जांच पूरी नहीं की गयी ।वहीं माफिया व सप्लायर स्कूल में सामान की आपूर्ति करने जुटे है। सूत्रों की माने तो मामला को रफा दफा करने के लिए कछुए गति से जांच की जा रही है ।डीपीओ कार्यालय के अनुसार जांच टीम में एडीपीसी दिलीप झा, समन्वयक आरपी सिंह व सहायक सुबोध कुमार को शामिल किया गया है । सूत्रों के अनुसार जांच टीम द्वारा एक सप्ताह में मात्र अबतक दस विद्यालय का जांच किया गया।

डीपीओ एसएसए प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि मामला संज्ञान में आने पर 89 विद्यालयों की सूची से अरेराज प्रखंड के दो विद्यालयों का जांच किया गया। दोनों विद्यालय में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं चलने का मामला सामने आया। एक विद्यालय एचएम द्वारा राशि विभाग को लौटा दी गई थी ।वहीं दूसरे विद्यालय में खरीदे गए सामान गुणवत्तापूर्ण नहीं थे। वहीं लिस्ट के अनुसार बहुत ही कम मात्रा में खिलौना सामग्री पायी गई ।जांच रिपोर्ट डीईओ को सौंप दी गयी है । वहीं सभी बीईओ को पत्र भेजकर स्थलीय जांच कर रिपोर्ट भेजने व तीन सदस्यीय जांच टीम का भी गठत की गयी है । वहीं फाइल देखने वाले प्रधान सहायक से स्पष्टीकरण की मांग की गयी है।

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