गरीबों के लिए आवास नहीं बनवा पाने से निराश थे इस राज्य के पंचायती मंत्री, दे दिया इस्तीफा, अपने क्षेत्र में राजा का है दर्जा

गरीबों के लिए आवास नहीं बनवा पाने से निराश थे इस राज्य के पंचायती मंत्री, दे दिया इस्तीफा, अपने क्षेत्र में राजा का है दर्जा

DESK : राजनीति में यह सोचना भी बड़ी गलती होगी कि कोई मंत्री सिर्फ इस्तीफा दे दे कि वह उस पद पर रहते  हुए अपनी जनता के लिए कुछ नहीं कर पा रहा है। लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसा ही हुआ है। यहां के पंचायती राज मंत्री टीएस सिंहदेव ने सिर्फ इसलिए पंचायती राज मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है कि क्योंकि वह गरीबों को पीएम आवास योजना का लाभ और मनरेगा में उन्हें काम नहीं दिलवा पा रहे थे। टीएस सिंहदेव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपना इस्तीफा भेज दिया है। हालांकि टीएस सिंहदेव के पास पांच विभाग थे, जिनमें चार विभाग के मंत्री पद पर वह बने रहेंगे।

सिंहदेव के इस्तीफे की खबर से प्रदेश में हड़कंप मच गया है। अपने इस्तीफे में टीएस सिंहदेव ने पंचायत विभाग में लिए गए फैसलों के बारे में बताया कि उनकी जानकारी के बगैर कई फैसले लिए गए। टीएस सिंहदेव ने सीएम को दिए गए इस्तीफे में बताया कि प्रदेश की गरीब जनता को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका। इसके अलावा उन्होंने मनरेगा योजना में भी हस्तक्षेप भी बात कही है।

पीएम आवास के लिए नहीं मिली राशि

टीएस सिंहदेव ने लिखा, प्रदेश के आवास विहीन लोगों को पीएम आवास योजना के तहत घर दिए जाने थे, जिसके लिए मैंने आपसे कई बार चर्चा करते हुए राशि आवंटन की अपील की थी किंतु राशि उपलब्ध नहीं हो पाई। इसकी वजह से 8 लाख लोगों के लिए आवास नहीं बनाए जा सके। टीएस सिंहदेव ने पीएम आवास योजना का लाभ नहीं गरीब जनता को नहीं मिलने पर दुख भी जताया।

मनरेगा में हड़ताल करना साजिश का हिस्सा

 सिंहदेव ने लिखा, साजिश के तहत रोजगार सहायकों से हड़ताल करवाकर मनरेगा के कार्यों को प्रभावित किया गया, जिसमें सहायक परियोजना अधिकारियों (संविदा) की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई। स्वयं आपके द्वारा हड़तालरत कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया। इसके बाद भी हड़ताल पूरी नहीं की गई। हड़ताल के कारण लगभग 1250 करोड़ रुपये की मजदूरी भुगतान प्रभावित हुआ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नहीं पहुंच सका। समन्वय के माध्यम से आपसे अनुमोदन लेकर सहायक परियोजना अधिकारियों (संविदा) के स्थान पर रेगुलर सहायक परियोजना अदिकारियों की भर्ती कर दी गई थी ताकि मनरेगा का कार्य सुचारू रूप से चल सके। 

मेरी जानकारी के बिना हुई नियुक्ति

जब हमारे प्रदेश को रोजगार की सबसे ज्यादा जरूरत थी तो सहायक परियोजना अधिकारियों के द्वारा कार्य को प्रभावित रखा गया, जबकि रोजगार सहायक अपने काम पर वापस आना चाह रहे थे। जब मुझे इसकी जानकारी मिली कि सहायक परियोजना अधिकारियों (संविदा) की बहाली होने लगी तो मैंने आपसे चर्चा की थी कि उन्हें उसी पद पर दोबारा नियुक्त न किया जाए. लेकिन इसके बाद भी उनकी नियुक्ति मेरे अनुमोदन के बगैर हो गई, जोकि मुझे स्वीकार्य नहीं है. 

मैं ऊपर दिए गए कारणों की वजह से वर्तमान परिस्थितियों में मैं स्वयं को पंचायत विभाग चलाने में असमर्थ हूं इसलिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के भार से मैं अपने आप को अलग कर रहा हूं। आपने मुझे जिन विभागों की जिम्मेदारी दी है उन्हें मैं निभाता रहूंगा। 

हालांकि वह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, बीस सूत्री कार्यान्वयन और वाणिज्यिक कर (जीएसटी) विभागों के मंत्री बने रहेंगे। सरगुजा क्षेत्र के अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सिंह देव ने कहा, "मैंने कल (शुक्रवार) रात ही इस विभाग से खुद को अलग करने का फैसला किया है।

बता दें कि टीएस सिंहदेव को छत्तीसगढ़ में सीएम का चेहरा माना गया था। लेकिन उनकी जगह भूपेश बघेल को जिम्मेदारी सौंप दी गई। खुद सिंहदेव अंबिकापुर के राजा कहे जाते हैं।




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