अध्यक्ष को 'स्टेपनी' बनने पर होना पड़ा मजबूर ! सांसद खुद सेंटर में रहे और अपने बॉस को बगल में बिठाया, पॉलिटिकल शॉप सजाने के ऐलान के दौरान दिखी वो तस्वीर

अध्यक्ष को 'स्टेपनी' बनने पर होना पड़ा मजबूर ! सांसद खुद सेंटर में रहे और अपने बॉस को बगल में बिठाया, पॉलिटिकल शॉप सजाने के ऐलान के दौरान दिखी वो तस्वीर

PATNA:  राजनीति भी अजीब होती है. दल के अंदर ही दलदल होता है. नेताओं में एक-दूसरे को पीछे छोड़ने की प्रतियोगिता होती है. राजनीति में खुद को साबित करने और आगे बढ़ाने को लेकर महापुरूषों को मोहरा बनाया जाता है. महापुरूषों की जयंती-पुण्यतिथि के बहाने नेता स्वहित साधने की जुगत में रहते हैं. बिहार में वैसे भी जात की राजनीति होती है. महापुरूषों को खास जाति से जोड़कर और उऩकी जयंती मनाकर नेता अपने आप को जात-समाज का सबसे बड़ा चेहरा साबित करने में लगे रहते हैं. यही काम कर नेता माननीय बनते हैं फिर मंत्री की अर्जी लगाते हैं. सभी दलों में यह प्रचलन है. महापुरूषों की जयंती-पुण्यतिथि पर राजधानी पटना में हर महीने कोई न कोई बड़ी राजनीतिक दुकान सजती है. नेताओं की एक दुकान खत्म नहीं होती और दूसरे नेता की पॉलिटिकल शॉप सजने लगती है. 

अगले महीने सजने वाली है बड़ी राजनीतिक दुकान 

राजधानी पटना में अगले महीने एक बड़ी राजनीतिक दुकान सजने वाली है. दुकान सजाने को लेकर ऐलान हो गया है. इस बार बड़े किसान नेता के नाम पर उनके समाज से आने वाले एक नेताजी की दुकान सजने वाली है. दुकान सजाने के ऐलान के समय की तस्वीर देखकर उनके दल के नेताओँ में भी खूब चर्चा हो रही है. दरअसल, ऐलान के समय की तस्वीर देखकर दल के पटना से लेकर दिल्ली तक के नेता अवाक हैं. आखिर किसी दल के प्रदेश अध्यक्ष को क्यों साइडलाइऩ में रखा गया.  दल के अंदर ही जबरदस्त कानाफूसी हो रही है. पार्टी के अंदर यह भी चर्चा है कि जहां अध्यक्ष पहुंच गए वहां सांसद कैसे अपने वरिष्ठ नेता के प्रोग्राम के बारे में ऐलान कर सकते हैं? अगर वह प्रोेग्राम सांसद का निजी है तो फिर अपने दल के अध्यक्ष को बुलाया ही क्यों.....? 

सेंटर में सांसद और बगल में अध्यक्ष को मिली जगह 

किसान हित की बात करने वाले महापुरूष की जयंती समारोह कार्यक्रम का ऐलान किया गया है. ऐलान वाले प्रोग्राम में दल के अध्यक्ष को ही स्टेपनी बनने पर मजबूर कर दिया गया था. उसी दल के सांसद महोदय खुद को सेंटर में रखे हुए थे. आप इसे ऐसे समझिए.....मंच पर सात नेता बैठे थे. बाएं-दाएं दोनं तरफ से काउंट करने पर सांसद महोदय चौथे नंबर पर थे. यानि केंद्र में वे खुद मौजूद थे. सांसद महोदय के तीन नेता बायें और तीन दायें बैठे थे. सांसद खुद को सेंटर में रखे थे और अपने अध्यक्ष को बगल में बिठाये थे. कहा जा रहा था कि इस कार्यक्रम में दल के नंबर-दो नेता बिहार आने वाले हैं. लेकिन यह ऐलान उस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से नहीं कराया गया.इसका ऐलान खुद सांसद ने किया. किसी भी पार्टी में अध्यक्ष का पद सर्वोच्च होता है. लेकिन यहां की तस्वीर को देखकर सबको आश्चर्य हो रहा. जिस कार्यक्रम में अध्यक्ष हों वहां पर जयंती कार्यक्रम के आयोजनकर्ता यह बता रहे हों कि उस कार्यक्रम में हमारे दल के नंबर-दो नेता आने वाले हैं. बेचारे अध्यक्ष जी बगल में यह सब सुनते रहे. सांसद महोदय का भाषण खत्म हुआ तो बची बातें कहकर अध्यक्ष महोदय आने की जिम्मेदारी निभाई।


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