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41 साल पहले 39 बिहारियों के मरने पर संसद में गरजे थे रामविलास, वो सच आज भी जिंदा है, सर्दी के सितम पर इनसाइड स्टोरी

41 साल पहले 39 बिहारियों के मरने पर संसद में गरजे थे रामविलास, वो सच आज भी जिंदा है, सर्दी के सितम पर इनसाइड स्टोरी

पटना. बिहार में इन दिनों सर्दी का सितम लोगों को परेशान किए हुए हैं. पटना, गया जैसे एक दर्जन जिलों का तापमान 4 से 7 डिग्री सेल्सियस के बीच चल रहा है. यहां तक कि भीषण ठंड के कारण बिहार में लोगों का जीना मुहाल हो चुका है. बिहार में ठंड से लोगों को बचाने के लिए कई प्रकार की सरकारी पहल की बातें इन दिनों हो रही है. लेकिन अगर देखा जाए तो बिहार में ठंड से लोगों का जीवन बचाने की बात करने का यह कोई पहला मौका नहीं है. बल्कि पिछले कई दशक से इसी तरह हर साल ठंड में लोगों का जीवन बचाने के लिए बड़ी बड़ी बातें होते रही हैं. 40 साल पहले तो बिहार की ठंड का मुद्दा लोकसभा में भी उठा. तब यह मुद्दा उठाया था दिवंगत राम विलास पासवान ने. 

रामविलास पासवान ने कहा था कि लोग ठंड से कम और गरीबी तथा अभाव से ज्यादा मरते हैं. दशकों पहले लोकसभा कही गई रामविलास पासवान की वह बातें आज भी जमीनी हकीकत बनी हुई हैं. तब दिसम्बर 1981 में रामविलास ने कहा था ‘जो पहला अहम सवाल है, वह है गिनती का, इसमें कोई महत्व नहीं रखता है। ... बुनियादी सवाल यह है कि लोग मर क्यों रहे हैं और मरने वाले लोग हैं कौन? क्या ठंडक इस देश में ही है या ठंडक इस देश के बाहर दूसरे मुल्कों में भी है? क्या इस देश में ही गरमी है या इससे ज्यादा अरब मुल्कों में है? जहां 6-6 महीने बर्फ रहती है, वहां कभी लोगों के मरने का सवाल नहीं आता है, जहां आग बरसती है, वहां से मरने की शिकायत नहीं आती है.’ 

उन्होंने कहा था, दिल्ली में बहुत ठंडक है, लेकिन दिल्ली की अपेक्षा बिहार में ज्यादा लोग मरे हैं। दिल्ली की अपेक्षा बिहार में कम ठंड है, लेकिन अगर इसकी तह में आप जाएंगे, तो मरने वाले गरीब हैं, भुखमरी से मरने वाले हैं। यह मरने वाले वही हरिजन-आदिवासी-पिछड़े समुदाय के लोग और दलित वर्ग के लोग हैं। 

लू किस को मारती है? जिसके पेट में अन्न नहीं रहता है, उसको मारती है। लू के दिनों में भरपेट पानी पीजिए, तो लू नहीं लगेगी, लेकिन जिसके पेट में पानी भी नहीं रहेगा, तो उसको लू मारेगी। ठंडक किसको मारती है? जिसके पेट में अन्न नहीं होता है।

लोकसभा में रामविलास पासवान का यह बयान तब काफी सुर्खियां बटोरा था. 18 दिसम्बर 1981 लोकसभा में उनके बयान के बाद कहा गया था कि रामविलास ने उस हकीकत को बयान किया है जिसमें  देश की गरीबी और अभाव को नहीं दिखाया जाता है. दरअसल तब शीतलहर के कारण बिहार में 10 दिन में 39 लोगों की मौत हुई थी. उन मौतों के बाद रामविलास ने देश में गरीबी का दर्द बयां किया था. संयोग से 41 साल बाद भी बिहार में ठंड एक जानलेवा समस्या बनी हुई है. और शायद रामविलास पासवान ने जिस सच को कहा था कि ठंड का कारण गरीबी और अभाव है वह सच ही दिख रहा है.