सच्चे प्रेम के सामने टूटी मजहब की दीवार : लाल जोड़े में सजी रुबीना की मांग में अंकित ने भरा सिंदूर, विवाह के साक्षी बने दोनों के परिवार और सैंकड़ों ग्रामीण

सच्चे प्रेम के सामने टूटी मजहब की दीवार : लाल जोड़े में सजी रुबीना की मांग में अंकित ने भरा सिंदूर, विवाह के साक्षी बने दोनों के परिवार और सैंकड़ों ग्रामीण

CHHAPRA : माना जाता है कि प्यार वह बंधन है, जो किसी जाति धर्म के बंधनों को नहीं मानता है। यह बात तब सच साबित होती नजर आई, जो एक मुस्लिम युवती की मांग में हिन्दु लड़के ने सिंदूर डाला। दोनों ने सोमवार की रात अंबिका भवानी मंदिर आमी (Ambika Bhawani Temple of Saran) में सात फेरे लिए। वहीं उनके प्रेम को आशीर्वाद देने के लिए दोनों के परिवार के लोग भी वहां मौजूद रहे। साथ ही शादी में मौजूद सैंकड़ों ग्रामीणों ने भी नए जीवन के लिए शुभकामना दी। इस दौरान लाल जोड़े में सजी युवती और दूल्हा बने युवक काफी अपने प्रेम की जीत पर बेहद खुश नजर आ रहे थे। 

अंबिका भवानी मंदिर में हुई इस शादी को लेकर बताया गया कि भेल्दी थाना क्षेत्र के बेडवालिया गांव निवासी दिनेश कुमार सिंह के पुत्र अंकित कुमार सिंह ने गांव के ही नासिर अंसारी की पुत्री रूबीना खातून से लंबे समय से प्रेम चल रहा था। लेकिन दो विभिन्‍न धर्मों के युवक-युवती की शादी में पहले परिवार फिर समाज रोड़ा डालता रहा है। अंकित और रूबी के साथ भी ऐसा ही हुआ। दोनों के परिवार वाले विरोध में खड़े हो गए। लेकिन दोनों रिश्ते को लेकर अपनी जिद पर कायम रहे। आखिरकार उनके प्रेम की जिद के आगे परिवार के लोग भी झुकने को मजबूर हो गए और उनकी शादी कराने को अपनी रजामंदी दे दी। इसके बाद आपसी सहमति से दोनों ने आमी मंदिर में एक-दूसरे को जीवनसाथी चुन लिया। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से स्‍वजनों ने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया।    

रिति रिवाजों के साथ हुई शादी

इस शादी को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी थी। रूबीना खातून लाल जोड़े में सोलह शृंगार कर के बैठी थी। उसके हाथ में सुहाग का प्रतीक सिन्‍होरा भी था। वहीं अंकित सिंह ने मैरून कलर का शूट पहन रखा था। इसके बाद आमी माता को साक्षी मानकर दोनों की शादी करा दी गई। दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। इस दौरान पंडित ने वैदिक मंत्र भी पढ़ाए। दोनों शादी से काफी खुश नजर आ रहे थे। 

परिवार की तारीफ कर रहे हैं लोग

दोनों की शादी की चर्चा उनके गांव के साथ ही पूरे सारण जिले में हो रही है। आम तौर पर ऐसे रिश्ते में मजहब सबसे बड़ी बाधा बन जाती है, जिसके परिणाम बेहद दुखभरे होते हैं। जोड़े ऐसे कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं, जिनकी भरपाई संभव नहीं हो पाती है। लेकिन यहां अंकित और रूबी के परिवार ने जिस तरह  इस मामले में बुद्ध‍िमता और सहनशीलता दिखाई है। यह काबिलेतारीफ है। लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं। 


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