बिहार पुलिस खाक होगी हाईटेक? करोड़ों की बिल्डिंग में सुशासन की पुलिस का ट्वीटर हैंडल 28 नवंबर के बाद से गहरी नींद में सो रही है...

बिहार पुलिस खाक होगी हाईटेक? करोड़ों की बिल्डिंग में सुशासन की पुलिस का ट्वीटर हैंडल 28 नवंबर के बाद से गहरी नींद में सो रही है...

PATNA: बिहार में सुशासन की पुलिस क्राइम रोकने में ही फेल नहीं बल्कि सोशल मीडिया हैंडल करने में भी फिसड्डी है। दिल्ली-मुंबई की बात छोड़िए पड़ोसी राज्य झारखंड़ और उत्तरप्रदेश भी बिहार से काफी आगे आगे हैं। यूं कहें कि बिहार पुलिस का नई तकनीक और मीडिया से तौबा कर लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बार-बार सरकारी महकमे को सोशल मीडिया पर एक्टिव होने और सरकार की उपलब्धियों को पहुंचाने की बात कहते हैं। लेकिन अधिकारी हैं कि सुनते ही नहीं। सीएम नीतीश ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया की पकड़ काफी बढ़ी है। हमारे अच्छे काम नीचे तक नहीं जा पाता लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से नकारात्मक खबरे तुरंत नीचे तक पहुंच जा रहीं।

बिहार पुलिस का ट्वीटर अकाउंट 28 नवंबर के बाद खामोश

आप इसी से समझ सकते हैं कि बिहार की तेजतर्रार पुलिस की क्या स्थिति है। बिहार पुलिस का वेरिफाइड ऑफिशियल फेसबुक पेज पर 2 अक्टूबर के बाद कोई पोस्ट नहीं है। फेसबुक पर आखिरी पोस्ट पूर्व पीएम लाल बहादुर शाष्त्री के जन्मदिन पर नमन लिखा गया है। इसके बाद बिहार पुलिस की तकनीकी टीम आंख बंद कर सो गई। अब जरा ट्वीटर की बात कर लेते हैं. बिहार पुलिस का ऑफिशियल ट्वीटर अकाउंट पर 28 नवंबर 2020 को आखिरी ट्वीट है। आखिरी ट्वीट में पुलिस मुख्यालय की तरफ से क्राइम का रिलीज है। इसके बाद ट्वीटर के माध्यम से एक भी ट्वीट नहीं किया गया। मतलब साफ है कि बिहार पुलिस को फेसबुक और ट्वीटर से कोई मतलब नहीं है। आज भी बिहार पुलिस पुराने ढ़र्रे पर काम करना चाहती है। 

झारखंड पुलिस से सीखने की जरूरत

बिहार का पड़ोसी राज्य झारखंड की बात करें या फिर उत्तर प्रदेश की। इन राज्यों का पुलिस मुख्यालय लगातार एक्टिव रहता है। हर क्राइम पर  पुलिस मुख्यालय की तरफ से सफाई या फिर उपलब्धियों के बारे में ट्वीट किया जाता है या फेसबुक पोस्ट किया जाता है। लेकिन बिहार की पुलिस को इन सब से कोई मतलब नहीं। ऐसा नहीं कि बिहार पुलिस को सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने के लिए संसाधन की कमी है,बल्कि अपने आप को बदलने की इच्छा शक्ति ही खत्म हो गई है। तभी तो ऐसी लापरवाही दिखती है। बिहार की पुलिस को अब छोटे राज्य झारखंड से सीखने की जरूरत है। 

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