लालू के MY समीकरण के दो स्तम्भ, तस्लीमुद्दीन-शहाबुद्दीन, दोनों समाप्त हो गए... अब क्या करेंगे तेजस्वी यादव

लालू के MY समीकरण के दो स्तम्भ, तस्लीमुद्दीन-शहाबुद्दीन, दोनों समाप्त हो गए... अब क्या करेंगे तेजस्वी यादव

PATNA: शहाबुद्दीन के निधन की खबर से आरजेडी को झटका लगा है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव ने ट्वीट कर दुख व्यक्त किया है. शहाबुद्दीन यूं ही आरेजडी सुप्रीमो लालू यादव के करीबी नहीं कहे जाते थे. शहाबुद्दीन बिहार में मुस्लिम राजनीति की ताकतवर धुरी थे. लाख आलोचनाओं के बावजूद आरेजडी सुप्रीमो उन्हें पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए हुए थे. बिहार में लालू यादव के अलावा नीतीश कुमार ने भी मुस्लिम राजनीति की, मगर उन्हें इस कद का नेता मिला ही नहीं, जिस वजह से वह लालू यादव जैसा समीकरण बना नहीं पाए.

लालू प्रसाद ने अपने राज में यादव वोट के साथ मुस्लिम वोट बैंक को जोड़कर राजनीति की. उनका दिया MY समीकरण आज तक चर्चा में रहता है. दोनों जातियों को जोड़ने पर उनका वोट बैंक 32-33 फीसदी से ऊपर चला जाता है. लालू प्रसाद की मुस्लिम राजनीति को पश्चिम बिहार में तसलीमुद्दीन संभालते थे और पूर्वी बिहार के इलाके को शहाबुद्दीन. लालू प्रसाद ने मुस्लिम नेताओं में पढ़े लिखे प्रो. जाबिर हुसेन को भी तरजीह दी और तनवीर हसन को भी. इन दोनों की छवि के उलट शहाबुद्दीन और तसलीमुद्दीन की छवि थी, ये दोनों दबंग थे. यहां तक कि टिकट बंटवारे में भी लालू प्रसाद इन दोनों की राय मानते थे. तसलीमुद्दीन का निधन 17 दिसंबर 2017 को हुआ था और अब शहाबुद्दीन के निधन से पार्टी को बड़ा झटका लगा है.

केन्द्र में बिहार से मुस्लिम राजनीति की दखल पर बात करें तो लालू प्रसाद की पार्टी RJD ने कटिहार के अशफाक करीम को राज्यसभा भेज मुस्लिम राजनीति की. लोकसभा में बिहार से अभी खगड़िया सीट से महबूब अली कैसर LJP के सांसद हैं. किशनगंज से कांग्रेस के डॉ.जावेद अहमद सांसद हैं. मीसा भारती के लोकसभा चुनाव हारने के बाद लालू प्रसाद ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया था. बहुत संभव है शहाबुद्दीन ता पत्नी हिना शहाब को भी RJD राज्यसभा भेज दे.

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