विरोध का अनोखा तरीका - नौकरी से हटाने का हो गया है आदेश, फिर भी सीएम के समर्थन लगा रहे जिंदाबाद के नारे

विरोध का अनोखा तरीका - नौकरी से हटाने का हो गया है आदेश, फिर भी सीएम के समर्थन लगा रहे जिंदाबाद के नारे

PATNA : 2010 में उनकी नियुक्ति 11 माह के लिए की गई थी, अब सेवा करते करते 11 साल गुजर गए, पुलिस चालकों का कहना है कि उस समय अगर हमें काम से हटा दिया जाता तो हमारे पास दूसरे काम का विकल्प होता, लेकिन एक दशक से ज्यादा समय तक काम करने के बाद अब दूसरे कार्य के लिए उम्र सीमा भी समाप्त हो गई। यह स्थिति है बिहार पुलिस में संविदा पर काम करनेवाले चालकों की। जिन्हें इस माह के अंत तक काम से हटाने का आदेश जारी किया गया है। 

बुधवार को बड़ी संख्या में बिहार पुलिस के लिए काम करनेवाले संविदा चालक पटना पहुंचे और गर्दनीबाग में विरोध प्रदर्शन किया। इन संविदा चालकों ने बताया कि जब उनकी नियुक्ति की गई तो तमाम नियमों का पालन किया गया। शुरुआत में सिर्फ 11 महीने की नियुक्ति की गई, लेकिन यह सेवा अवधि बढ़ते बढ़ते 11 साल का समय पूरा हो गया है। इतने साल तक काम करने के बाद अब हमारी उम्र नहीं है कि हम दूसरी जगह काम की तलाश कर सकें।

सीएम से लगाई उम्मीद

संविदा चालकों ने बताया कि 2019 में स्वतंत्रता दिवस के दौरान सीएम नीतीश कुमार ने यह घोषणा की थी कि सभी संविदा पुलिस चालकों की नियुक्ति स्थायी की जाएगी, लेकिन स्थायी करने की जगह उन्हें काम से हटाने का आदेश जारी कर दिया गया। इस दौरान काम से हटाए जाने के फैसले के बाद भी सीएम नीतीश का समर्थन किया और उन्हें रोजगार का सृजनकर्ता बता दिया। संविदा पुलिस चालकों ने उम्मीद जताई कि पुलिस मुख्यालय और बिहार सरकार उनकी समस्याओं को लेकर सही फैसला लेगी और उन्हें काम से हटाने का आदेश वापस ले लिया जाएगा


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