विजेंद्र प्रसाद यादव के खिलाफ पटना हाई कोर्ट में याचिका दर्ज ,जानें- क्या है पूरा मामला?

विजेंद्र प्रसाद यादव के खिलाफ पटना हाई कोर्ट में याचिका दर्ज ,जानें- क्या है पूरा मामला?

DESK : बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री और जेडीयू नेता विजेंद्र प्रसाद यादव के विधानसभा चुनाव परिणाम को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है. बिहार विधानसभा 2020 के भ्रष्टाचार मुक्त जागरूकता अभियान के आरटीआई कार्यकर्ता और निर्दलीय प्रत्याशी अनिल कुमार सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त सभी अभिलेखों के आधार पर पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष याचिका दायर कर विजेंद्र प्रसाद यादव के चुनाव परिणाम को रद्द करने का अनुरोध किया है. 

पटना उच्च न्यायालय में दायर याचिका में निर्दलीय उम्मीदवार अनिल कुमार सिंह ने सुपौल विधानसभा के विधायक सह बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनका नामांकन पत्र ही अवैध है. मालूम हो कि नामांकन के स्क्रूटनी के दौरान भी अनिल सिंह द्वारा लिखित आपत्ति दर्ज किया गया था. 


लेकिन निर्वाची पदाधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी सुपौल द्वारा न्याय संगत आदेश पारित नहीं किया गया है. ऐसे में अनिल सिंह ने लोक सूचना अधिकार अधिनियम के तहत विजेंद्र प्रसाद यादव के नामांकन पत्र सहित सभी चुनाव संबंधी अभिलेख निर्वाची पदाधिकारी से प्राप्त किया है. कोर्ट में दायर याचिका में अनिल सिंह ने आरोप लगाया है कि विजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा निर्हित वैध जमानत की राशि जमा नहीं की गई है. निर्हित प्रपत्र में शपथ पत्र भी नहीं भरा गया है. 

उन्होंने निर्हित शपथ पत्र में अर्जित संपति पत्र देनदार का पूर्ण ब्यौरा अंकित नहीं किया है. गैर सरकारी संस्था राष्ट्रीय सार्वजनिक मेला समिति के स्थायी सदस्य रहने के बावजूद उनके संबंध में उचित जानकारी शपथ पत्र में नहीं दी गयी है, जबकि मेला समिति पर लाखों रुपये सरकार का बकाया है. उन्होंने प्रमाण पत्र के साथ आरोप लगाया है कि विजेंद्र प्रसाद यादव के पटना स्थित सरकारी क्वाटर संख्या 01 स्टैंड रोड पटना के उपभोक्ता संख्या 101282470 पर 5 लाख 61 हजार 360 रुपया बिजली विभाग का बकाया है. 

बिजली विभाग पटना पीईएसयू, पटना के कार्यपालक अभियंता के कार्यालय में बकाया बताया गया है. जबकि विजेंद्र यादव ने नामांकन पत्र में बिजली बकाया शून्य बताया है. उन्होंने नामांकन पत्र में अपने अपराध के बारे में कॉलम को खाली छोड़ दिया है, जो बिहार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 का उल्लंघन करता है. ऐसे में अनिल सिंह ने चुनाव याचिका ने लोक सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त सूचना के आलोक में मिली सभी चुनाव अभिलेखों की छायाप्रति चुनाव याचिका में सलंग्न कर विजेंद्र प्रसाद यादव के चुनाव को रद्द करने का अनुरोध पटना उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश से किया है.


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