क्या भूमिहार बहुल क्षेत्र होने की सजा भुगत रहा बड़हिया ? स्थानीय लोग अब उठा रहे हैं सवाल

क्या भूमिहार बहुल क्षेत्र होने की सजा भुगत रहा बड़हिया ? स्थानीय लोग अब उठा रहे हैं सवाल

BARAHIYA : यदि सरकार के इरादे नेक होते तो आज लखीसराय जिला अंतर्गत बड़हिया हिन्दुस्तान के मानचित्र पर विशेष स्थान रखता।ये मेरा निजी मत है कि भूमिहार बहुल क्षेत्र होने की वजह से सरकारें हमेशा से ही बड़हिया की उपेक्षा करती रही हैं।जबकि भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से बड़हिया हमेशा से ही काफी समृद्ध रहा है।बड़हिया हमेशा से कृषि और पशुपालन के लिए प्रसिद्ध रहा है।कभी यहाँ दूध की नदी बहा करती थी।बड़हिया का रसगुल्ला प्रदेश के लिए एक ब्रांड है।पटना और लखीसराय जिले की सीमा पर बसा बड़हिया केवल मानचित्र का एक हिस्सा नहीं है,यह एक प्रसिद्ध धाम है।ऐसी मान्यता है कि यहाँ स्थित माता के मंदिर में साक्षात माता जगदम्बा विराजती हैं।कई इतिहासकार बताते हैं कि बड़हिया स्थित माता जगदम्बा, माता वैष्णो देवी की छोटी बहन हैं।ऐसे तो सालों भर यहाँ प्रदेश के कोने-कोने से और अन्य प्रदेशों से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते रहते हैं लेकिन नवरात्र के दौरान यहाँ काफी भीड़ उमड़ती है।मान्यता है कि दर्शन करने वाले किसी भी श्रद्धालु को माता निराश नहीं करती हैं।इसके अलावा छोटी सी नगरी बड़हिया के हर गली में ढेरों मंदिर और 38 ठाकुरबाड़ी हैं,जो यहाँ के पूर्वजों की समृद्धि और धार्मिक विचारों की गाथा कहते हैं।श्रावण माह में पूरे बड़हिया के हर ठाकुरबाड़ी में प्रवचन होते हैं, झूले का आयोजन होता है और मथुरा-वृंदावन से आए प्रवचनकर्ताओं और कलाकारों के द्वारा रासलीला किया जाता है।पूरे महीने बड़हिया में उत्सव का माहौल रहता है।

कद्दावर नेताओं का गढ़ है बड़हिया

बड़हिया निवासी गिरिराज सिंह केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार में मंत्रीं हैं, यहाँ के विधायक विजय कुमार सिन्हा बिहार विधानसभा के अध्यक्ष हैं जबकि स्थानीय सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह मुख्यमंत्री के बाद बिहार के सबसे ताकतवर नेता हैं। इसके बाद भी बड़हिया का विकास ठप्प है।

दलहन और तिलहन उत्पादन में है खास स्थान

दलहन और तिलहन के उत्पादन में बड़हिया पूरे देश में खास महत्व रखता है।यहाँ चना,मसूर और मटर की खेती मुख्य रूप से की जाती है।साथ ही साथ तिलहन का उत्पादन की होता है।मोकामा-बड़हिया टाल क्षेत्र में बड़हिया का रकवा काफी बड़ा है।सम्भवतः पूरे बिहार में बड़हिया के जमींदारों के पास ही सबसे अधिक जमीन का रकवा था।बड़हिया की नई पीढ़ी को भी खेती से विशेष लगाव है और वो जी तोड़ मेहनत करते हैं।यही वजह है कि विषम परिस्थितियों में भी बड़हिया टाल में आसपास के इलाकों से बेहतर पैदावार होती है।लेकिन आश्चर्य की बात है कि सरकार की नजर में बड़हिया तिलहन उत्पादन में बेहतर है न कि दलहन की खेती में।

रसगुल्ले का हर कोई दीवाना

दशकों से बड़हिया का रसगुल्ला काफी प्रसिद्ध है।आसपास ही नहीं, काफी दूर-दूर के लोग शादी-ब्याह, पार्टी,फंक्शन या श्राद्ध में भोज के लिए यहाँ से रसगुल्ला ले जाते हैं।सालों भर यहाँ से लोग गाड़ियों में भर भर कर रसगुल्ले ले जाते हैं।काफी स्वादिष्ट होने के साथ ही यहाँ रसगुल्ले की कीमत काफी कम होती है। 


गैंगवार में बीते दो दशक

अस्सी और नब्बे का दशक बड़हिया के इतिहास का काला अध्याय है।आन,बान और शान की लड़ाई में सैंकड़ों जान गई।अपराधियों के कई गैंग यहाँ सक्रिय थे और गोलियों की तड़तड़ाहट और बम के धमाकों से बड़हिया की गलियाँ गूँजा करती थीं।यही वो दौर था जब बड़हिया से बड़े-बड़े व्यापारी पलायन कर गए।बड़हिया अपराधियों की शरणस्थली बन चुका था और बाहर के भी अपराधी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर यहाँ शरण लेते थे।दो दशक के खूनी खेल के बाद जब यहाँ शांति की स्थापना हुई तब तक यहाँ का बाजार पूरी तरह उजड़ चुका था।

सरकार की गलत नीतियों से खत्म हुआ रोजगार

कभी खेती और पशुपालन बड़हिया निवासियों के जीविका का मुख्य साधन हुआ करता था।लेकिन सरकार द्वारा टाल समस्या का समाधान नहीं करने से जब खेती में उत्पादन कम होने लगा तो यहाँ के लोग ट्रक खरीदकर बालू के कारोबार से जुड़ गए।लेकिन सरकार की गलत नीतियों की वजह से बालू का कारोबार भी चौपट हो गया और ट्रक बन्द हो गए।युवाओं के आगे रोजगार की घोर समस्या आ गई।

नई पीढ़ी पेश कर रही मिसाल

बड़हिया की नई पीढ़ी ने समझा कि अपराध ने बड़हिया को काफी पीछे धकेल दिया है।युवाओं ने शिक्षा के महत्व को समझा और आज यहाँ के कई युवा देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्यरत हैं,कई युवा प्रदेश में उच्च पदों पर हैं।आईआईटी,नीट जैसे परीक्षाओं में प्रतिवर्ष दर्जनों युवा सफलता प्राप्त कर बड़हिया का परचम लहरा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर यहाँ के कई युवा खेती में काफी सफल हैं तो कई व्यापार में काफी आगे हैं और नई पीढ़ी को राह दिखा रहे हैं।

सरकारों ने हमेशा की है उपेक्षा

हमेशा से ही बड़हिया सरकार द्वारा उपेक्षित रहा है।भौगोलिक रूप से काफी समृद्ध,रेलवे और सड़क के मुख्य मार्ग से जुड़े होने,पर्याप्त जमीन, कृषि उत्पाद सहित तमाम संसाधन होने के बावजूद बड़हिया में एक भी कल-कारखाना नहीं है।युवाओं को तकनीकी शिक्षा देने के लिए यहाँ एक भी तकनीकी संस्थान नहीं हैं और आपातकालीन स्थिति में यहाँ स्वास्थ्य सुविधा का भी अभाव है। 

अब तो रेलवे भी कर रही उपेक्षा

अब तो रेलवे के द्वारा भी बड़हिया की उपेक्षा की जा रही है।कोरोना काल के बाद बड़हिया स्टेशन पर कई ट्रेनों का ठहराव खत्म कर दिया गया है।अभयपुर,मननपुर,खुसरूपुर जैसे कई रेलवे स्टेशनों से अधिक राजस्व देने के बाद भी बड़हिया रेलवे स्टेशन मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।यहाँ न तो यात्रियों के लिए अच्छी सुविधा है न ही  स्टेशन परिसर की साफ सफाई का ख्याल रखा जाता है।


ANUBHAV SINGH


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