यह कैसा सुशासन राज? बिहार में बन गया हत्या का रिकॉर्ड, नीतीश सरकार के सारे दावे हुए फेल

यह कैसा सुशासन राज? बिहार में बन गया हत्या का रिकॉर्ड, नीतीश सरकार के सारे दावे हुए फेल

पटना. बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में कानून का राज स्थापित करना बताते हैं. इसलिए नीतीश सरकार को सुशासन राज के रूप में जदयू और एनडीए बताती रही है. लेकिन राज्य में कानून का दावा करने वाली बिहार सरकार को हालिया जारी एक रिपोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दरअसल, वर्ष 2022 के पहले तीन महीनों में बिहार में हत्या का नया रिकॉर्ड बन गया है. जनवरी से मार्च 2022 के बीच बिहार के विभिन्न जिलों में 679 हत्या हुई है. यह वर्ष 2021 के शुरुआती तीन महीनों में हुई 640 हत्याओं की तुलना में 6.1 प्रतिशत ज्यादा है. 

यानी कानून का राज होने के तमाम दावों के बीच बिहार में हत्या के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. बिहार पुलिस मुख्यालय के आंकड़े के अनुसार साल 2022 के शुरुआती 3 महीनों में 679 हत्या, 69 डकैती और लूट तथा 317 बलात्कार के मामले दर्ज हुए हैं. वहीं पिछले वर्ष 2021 में इसी अवधि में कुल 640 हत्या, 72 डकैती, 665 लूट और 357 बलात्कार के मामले दर्ज हुए थे. वहीं इस अवधि के दौरान जहाँ 2021 के तीन महीनों में 1548 अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था. वहीं, साल 2022 की इस अवधि में 1385 मामला दर्ज हुआ है. 

हालांकि राहत की बात है कि वर्ष 2021 के मुकाबले वर्ष 2022 में जहाँ हत्या के मामले बढ़े हैं वहीं शेष प्रकार का अपराध के मामलों में गिरावट आई है. हत्या के अतिरिक्त अन्य मामलों में आई कमी राज्य में जहां बेहतर कानून व्यवस्था की ओर इशारा करती है वहीं हत्या के बढ़ते मामलों से चिंता बढ़ी है. 

पुलिस मुख्यालय के अनुसार अभी तक आपरेशन प्रहार के तहत राज्य में 21 हजार 138 वांछित अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा मद्यनिषेध कानून को सख्ती से पालन के लिए 233 एंटी लिकर टास्कर फोर्स का गठन किया गया है. अभी तक अभियान के तहत 17,148 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की गई है.

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