CM नीतीश का ये कैसा सुशासन...प्रमोशन नहीं होने से 'पावर' सेंटर में ही 400 से अधिक पद हैं खाली, बिहार में खाक होगा विकास?

CM नीतीश का ये कैसा सुशासन...प्रमोशन नहीं होने से 'पावर' सेंटर में ही 400 से अधिक पद हैं खाली, बिहार में खाक होगा विकास?

PATNA: बिहार में प्रोन्नति पर पिछले 2 सालों से रोक लगी है। सरकारी कर्मियों की प्रोन्नति बाधित रहने से सरकार के कामकाज से लेकर कर्मियों के मनोबल पर असर पड़ रहा है।कर्मचारी संगठनों ने कई दफे सरकार से प्रोन्नति पर लगी रोक हटाने की मांग की लेकिन गहरी नींद में सोई सरकार न्यायालय का हवाला देकर मौन साधे हुए है। हालात ये हो गए हैं कि पावर सेंटर जहां से सरकार का संचालन होता है वहीं के अधिकांश पद खाली है। ऐसे में समझा जा सकता है कि बिहार में किस तरह का विकास हो रहा ।

सत्ता के गलियारे में कैसे होगा काम ?

हम आपको सत्ता का गलियारा जिसे सचिवालय कहा जाता है उसका हाल बताते हैं। सचिवालय के कामों के निष्पादन को लेकर सचिवालय सेवा संघ के कर्मियों की तैनाती होती है। इन कर्मियों को प्रमोश के तहत अवर सचिव,उप सचिव और निदेशक बनाया जाता है। लेकिन सरकार ने प्रमोशन को रोक रखा है। लिहाजा कर्मी एक ही पद पर बने हुए हैं। बिहार में सत्ता का केंद्र सचिवालय में बिहार सचिवालय सेवा के अवर सचिव एवं अन्य पदाधिकारियों की कुल स्वीकृत बल 419 है। जिसमें निदेशक का स्वीकृत पद 1,उप सचिव का स्वीकृत पद 102, अवर सचिव का स्वीकृत पद 311 है. इस तरह से कुल 429 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में 1 फरवरी 2021 तक की बात करें तो निदेशक का कार्यरत बल  0 है। उप सचिव का कार्यरत बल एक है, अवर सचिव का कार्यरत बल 15 है। इस तरह से कुल कार्यरत पदाधिकारियों की संख्या सिर्फ 16 है. इस तरह से 400 से अधिक पद सिर्फ सचिवालय सेवा के रिक्त हैं. प्रोन्नति नहीं होने की वजह सारे पद रिक्त हो गए हैं। बिहार सचिवालय सेवा संघ ने इस संबंध में कई दफे सरकार को ज्ञापन भी दिया लेकिन प्रमोशन नहीं होने से रिक्ति लगातार बढ़ती जा रही है.2021 में नौ पदाधिकारी सेवानिवृत्त होंगे जबकि 2022 में 7 सेवानिवृत्त हो जायेंगे। 

प्रमोशन बाधित रहने से मनोबल पर असर

प्रोन्नति बाधित रहने से राज्य सरकार के कर्मियों व पदाधिकारियों के मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। प्रतिमाह आर्थिक हानि भी हो रही है। अधिकांश उच्च पदों पर प्रभारी व्यवस्था के तहत कार्य हो रहे हैं।सचिवालय सेवा संघ के महासचिव अशोक कुमार सिंह का कहना है कि लंबित प्रोन्नति तुरंत शुरू करने को लेकर सरकार को कई बार ज्ञापन भी सौंपा गया है। न्यायालय द्वारा इसपर रोक और न्यायाधीन होने का तर्क देते हुए राज्य सरकार द्वारा कोई फैसला नहीं लिया जा रहा है।



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