नीतीश कुमार ने छीन लिया था शरद यादव का बंगला, दुखी शरद ने कहा था - अब मेरे पास रहने का कोई ठिकाना नहीं, लालू ने भी नहीं दिया था साथ

नीतीश कुमार  ने छीन लिया था शरद यादव का बंगला, दुखी शरद ने कहा था - अब मेरे पास रहने का कोई ठिकाना नहीं, लालू ने भी नहीं दिया था साथ

PATNA : 75 साल की उम्र में जदयू के संस्थापकों में शामिल और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव का निधन हो गया। बीती रात उनके निधन की खबर सामने आते ही बिहार की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई। लगभग सभी नेताओं ने उनके निधन पर दुख जाहिर किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जाहिर किया। साथ ही लिखा कि शरद यादव जी से मेरा बहुत गहरा संबंध था। मैं उनके निधन की खबर से स्तब्ध एवं मर्माहत हूं। वे एक प्रखर समाजवादी नेता थे। उनके निधन से सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शरद यादव के निधन पर उनके साथ अपने गहरे संबंध की बात कर रहे हैं। लेकिन पिछले बीते कुछ साल से दोनों का रिश्ता अच्छा नहीं रहा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनकी दुश्मनी ने खूब सुर्खियां बटोरी। दिल्ली के तुगलक रोड स्थित 7 नंबर बंगले में 22 साल तक जीवन बिताने के बाद उन्हें इसे खाली करना पड़ गया था। जिसका कारण नीतीश कुमार को माना गया। उस समय नीतीश कुमार ने उस बंगले को बचाने के लिए कोई सहायता नहीं की।

भाजपा के साथ जाने के बाद बढ़ गई दूरी

2015 में जब बीजेपी के खिलाफ आरजेडी और कांग्रेस के साथ मिलकर नीतीश कुमार ने बिहार में महागठबंधन बनाया तो शरद यादव को इसका सूत्रधार माना गया। बाद में नीतीश कुमार ने जब फिर बीजेपी के साथ हाथ मिला लिया तो शरद यादव उनके इस फैसले से खुश नहीं थे। बाद में उन्होंने जेडीयू से खुद को अलग कर लिया और एक अलग पार्टी बना ली, जिसका की राष्ट्रीय जनता दल में विलय हो गया। शरद यादव की पार्टी का आरजेडी में विलय होने पर जेडीयू नेताओं ने खूब तंज कसा था। 

शरद यादव के राजनीतिक अवसाद का कारण बने राजनीति

बिहार में शरद यादव की छवि एक ऐसे नेता की रही है, जो हमेशा पीछे से अपनी राजनीति को चलाते रहे। वह बिहार की गद्दी तक पहुंच सकते थे, लेकिन उन्होंने अपनी जगह नीतीश कुमार को आगे बढ़ाया और खुद जदयू को मजबूत करने की कोशिश करते रहे। शरद यादव की मेहनत के कारण जदयू बिहार में बड़ी पार्टी बनकर उभरी। लेकिन समय के साथ नीतीश कुमार का प्रभाव जदयू पर बढ़ता गया और शरद यादव का न सिर्फ पार्टी में, बल्कि इसके साथ बिहार में राजनीतिक कद छोटा होता गया। धीरे-धीरे वह बिहार की राजनीति में लगभग गुम हो गए।

पिछले साल बंगले को छीने जाने के कारण आए थे चर्चा में

राजनीतिक अवसाद झेल रहे शरद यादव पिछले साल अचानक चर्चा में तब आए, जब दिल्ली के तुगलक रोड स्थित 7 नंबर बंगले को खाली करने का फरमान जारी किया गया। बाद में 22 साल तक जीवन बिताने के बाद उन्हें इसे खाली करना पड़ गया था।

शरद यादव ने बंगले से जुड़ी अपनी यादों को बचाने के लिए नीतीश कुमार से भी गुहार लगाई, लेकिन जदयू ने उन्हें फिर से राज्यसभा नहीं भेजा, फिर राजद ने भी यह वादा किया, लेकिन राजद ने भी उन्हें फिर मौका नहीं दिया। जिसके बाद यह मान लिया गया कि अब शरद यादव के राजनीतिक सफर का अंत हो गया। 


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